अबू बुरदा रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि उनके पिता अबू मूसा अश'अरी रज़ियल्लाहु अनहु एक बार बहुत बीमार हो गए। बीमारी इतनी सख़्त थी कि वह बेहोश हो गए। उस समय उनका सर उनके घर की किसी महिला की गोद में था, जो उनकी बीमारी देखकर चीख़-चीख़कर रोने लगी। लेकिन, बेहोशी के कारण वह उसे कुछ कह नहीं सके। जब होश में आए, तो फ़रमाया : मैं उन तमाम लोगों से बरी होने का ऐलान करता हूँ, जिनसे ख़ुद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बरी होने की बात कही है। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने निम्नलिखित स्त्रियों से बरी होने का इज़हार किया है : सालिक़ा : मुसीबत के समय चीख़-चीख़कर रोने वाली स्त्री। हालिक़ा : मुसीबत के मसय बाल मुड़वाने वाली स्त्री। शाक़्क़ा : मुसीबत के समय कपड़े फाड़ने वाली स्त्री। कारण यह है कि ये अज्ञानता काल के कार्य हैं। इस्लाम का आदेश यह है कि मुसीबतों के समय सब्र से काम लिया जाए और अल्लाह से प्रतिफल की आशा रखी जाए।
- मुसीबत के समय कपड़ा फाड़ने, बाल मुंडवाने और ऊँची आवाज़ में रोने की मनाही। ये बड़े गुनाह हैं।
- दुःख प्रकट करना और रोना हराम नहीं है, जब तक आवाज़ ऊँची न हो और विलाप न हो। यह अल्लाह के निर्णय को धैर्य के साथ सहन करने के विपरीत नहीं है। यह दरअसल दया है।
- अल्लाह के कष्टदायक निर्णयों पर कथन अथवा कार्य द्वारा असंतोष और क्रोध व्यक्त करना हराम है।
- मुसीबत के समय सब्र से काम लेना ज़रूरी है।
صحيح البخاري (2/ 81) (1296). صحيح مسلم (1/ 100) (104). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص287). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (2/ 371).