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तशरीह के साथ हदीसें

रात की नमाज़

29 हदीसें

मैंने अपनी खाला मैमूना के पास रात बिताई। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) रात की नमाज़ के लिए खड़े हुए तो मैं आपकी बाएँ ओर खड़ा हो गया। ऐसे में, आपने मेरा सिर पकड़ा और अपनी दाहिनी ओर खड़ा कर दिया।

عن عَبدُ اللَّهِ بنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما قال: «بِتُّ عِندَ خَالَتِي مَيمُونَة، فَقَام النَبيَّ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي مِن اللَّيل، فَقُمتُ عَن يَسَارِه، فَأَخَذ بِرَأسِي فَأَقَامَنِي عن يَمِينِه».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि मैंने अपनी खाला मैमूना के पास रात बिताई। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) रात की नमाज़ के लिए खड़े हुए तो मैं आपकी बाएँ ओर खड़ा हो गया। ऐसे में, आपने मेरा सिर पकड़ा और अपनी दाहिनी ओर खड़ा कर दिया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

पराक्रमी सहाबी अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि एक बार उन्होंने अपनी ख़ाला तथा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी मैमूना (रज़ियल्लाहु अंहा) के यहाँ एक बिताई, ताकि स्वयं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की रात की नमाज़ का हाल जान सकें। अतः, जब आप रात में नमाज़ के लिए खड़े हुए, तो अब्दुल्लाह भी आपके साथ नमाज़ पढ़ने के लिए आपकी बाईं ओर खड़े हो गए। लेकिन, चूँकि दाहिनी ओर खड़ा होना उत्तम है और यदि इमाम के साथ एक ही मुक़तदी हो, तो उसे इधर ही खड़ा होना चाहिए, इसलिए आपने उन्हें घुमाकर दाहिनी जानिब खड़ा कर दिया।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام، إسماعيل بن محمد الأنصاري، دار الفكر، دمشق، الطبعة: الأولى 1381هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ، 2006م. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى 1426هـ، 2005م. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم- لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ، 1988م. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.

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ऐ आइशा! उठो और वित्र पढ़ो।

عن عائشة رضي الله عنها : أن النبي صلى الله عليه وسلم كان يصلي صلاته بالليل، وهي مُعْتَرِضَةٌ بين يديه، فإذا بقي الوتر، أيقظها فأوترت. وفي رواية له: فإذا بقي الوتر، قال: «قومي فأوْتِري يا عائشة».
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात को तहज्जुद की नमाज़ पढ़ते और वह आपके आगे सोई हुई होतीं। जब वित्र बाकी रह जाती तो उन्हें जगाते और वह वित्र पढ़तीं। तथा एक रिवायत में हैः जब वित्र बाकी रहती तो कहतेः ऐ आइशा! उठो और वित्र पढ़ो।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस का अर्थ यह है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- तहज्जुद की नमाज़ पढ़ते और आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- आपके सामने सोई रहतीं। बुख़ारी एवं मुस्लिम की एक अन्य रिवायत में आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- कहती हैं : "अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रात को तहज्जुद की नमाज़ पढ़ते और मैं आपके तथा क़िबला के बीच उसी तरह सोई रहती, जैसे जनाज़ा रखा रहता है।" जब आप तहज्जुद की नमाज़ पूरी कर लेते और वित्र पढ़ना चाहते, तो उनको जगाते कि वह भी वित्र पढ़ लें। मुस्लिम की एक रिवायत में है : "जब वित्र बाक़ी रह जाती, तो फ़रमाते : आइशा! उठो और वित्र पढ़ लो।" जबकि अबू दाऊद की एक रिवायत में है : "जब आपको वित्र पढ़ना होता, तो उन्हें जगाते और वह भी वित्र पढ़तीं।" इस हदीस का अर्थ यह है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रात के प्रथम भाग में आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- को छोड़ देते और जगाते नहीं थे। यहाँ तक कि जब तहज्जुद पूरी कर लेते और वित्र ही शेष रह जाती, तो उन्हें वित्र पढ़ने के लिए जगाते और जल्दी वित्र पढ़ने को कहते, ताकि कहीं ऐसा न हो कि दोबारा नींद का ग़लबा हो जाए और वित्र छूट जाए।

हवाला

كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430 هـ بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م المنهاج شرح صحيح مسلم، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي، الناشر: دار إحياء التراث العربي، الطبعة: الثانية 1392 هـ صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت رياض الصالحين، تأليف : محيي الدين يحيى بن شرف النووي ، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل ، الطبعة: الأولى، 1428 هـ دليل الفالحين، تأليف: محمد بن علان، الناشر: دار الكتاب العربي، نسخة الكترونية ، لا يوجد بها بيانات نشر شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426 هـ المنهاج شرح صحيح مسلم، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي، الناشر: دار إحياء التراث العربي، الطبعة: الثانية 1392 هـ صحيح البخاري-المحقق : محمد زهير بن ناصر الناصر-الناشر : دار طوق النجاة-الطبعة : الأولى 1422هـ الموسوعة الفقهية الكويتية-صادر عن: وزارة الأوقاف والشئون الإسلامية - الكويت-عدد الأجزاء: 45 جزءا-الطبعة: من 1404 - 1427 هـ.

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सुबह से पहले वित्र पढ़ने में जल्दी करो

عن ابن عمر رضي الله عنهما أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «بادروا الصبح بالوتر».
अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है कि अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "सुबह होने से पहले वित्र पढ़ने में जल्दी करो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة - بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. صحيح مسلم -المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي - بيروت.

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जब तुममें से कोई रात को नमाज़ पढ़ने के लिए उठे और उसकी ज़बान पर क़ुरआन ठीक से न आ रहा हो और उसे पता न चल रहा हो कि क्या कुछ पढ़ रहा है, तो सो जाए

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إذا قَام أحَدُكُم من الليل، فَاسْتَعْجَمَ القرآن على لِسَانه، فلم يَدْرِ ما يقول، فَلْيَضْطَجِع».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जब तुममें से कोई रात को नमाज़ पढ़े और उसकी ज़बान पर क़ुरआन ठीक से न आ रहा हो और उसे पता न चल रहा हो कि क्या कुछ पढ़ रहा है, तो सो जाए।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير - دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى 1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى 1430ه. - إِكمَالُ المُعْلِمِ بفَوَائِدِ مُسْلِم، لعياض بن موسى اليحصبي السبتي أبو الفضل - المحقق: الدكتور يحْيَى إِسْمَاعِيل - دار الوفاء للطباعة والنشر والتوزيع، مصر- الطبعة: الأولى، 1419 هـ - 1998 م.

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हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए मिसवाक और वुज़ू का पानी तैयार रखते थे। फिर अल्लाह जितनी रात को चाहता आपको जगाता। तो आप उठते, वज़ू करते और नमाज़ पढ़ते थे।

عن عائشة رضي الله عنها ، قالت: كُنَّا نُعِدُّ لرسول الله صلى الله عليه وسلم سِوَاكَهُ وَطَهُورَهُ، فَيَبْعَثُهُ الله ما شاء أن يَبْعَثَهُ من الليل، فَيَتَسَوَّكُ، ويتوضَّأ ويُصلي.
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हुा- कहती हैं कि हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए मिसवाक और वज़ू का पानी तैयार रखते थे। फिर अल्लाह जितनी रात को चाहता आपको जगाता। तो आप उठते, वज़ू करते और नमाज़ पढ़ते थे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- कहती हैं कि वह अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के लिए मिसवाक एवं वज़ू का पानी तैयार रखतीं, फिर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह रात को जब चाहता, आपको जगा देता। जब जाग जाते, तो सबसे पहले अपने दाँतों को मिसवाक से रगड़-रगड़ कर साफ़ करते, ताकि सामान्यतः नींद के कारण पैदा होने वाली दुर्गंध दूर हो जाए। फिर नमाज़ के लिए वज़ू करते और उसके बाद रात की नमाज़ पढ़ते।

हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الدمام، الطبعة: الأولى 1415هـ. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، الطبعة: الأولى 1428هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423 هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الرابعة عشر 1407هـ.

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जो ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में कयाम करता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «مَنْ يَقُمْ لَيْلَةَ الْقَدْرِ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ»
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में कयाम करता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम रमज़ान मास की अंतिम दस रातों में से किसी एक रात में विद्यमान लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) की फ़ज़ीलत बता रहे हैं। आप बता रहे हैं कि जिसने इस रात तथा इसकी फ़ज़ीलत पर विश्वास रखते हुए, अल्लाह की ओर से मिलने वाले प्रतिफल की आशा रखते हुए और दिखावे से बचते हुए इस रात में जाग कर इबादत की, मसलन नमाज़ पढ़ी, दुआ की, क़ुरआन की तिलावत की और अज़कार पढ़े, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।

फ़ायदे
  1. लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) की फ़ज़ीलत तथा उस रात में जाग कर इबादत करने की प्रेरणा।
  2. नेकी के कार्य उसी समय अल्लाह के यहाँ स्वीकार किए जाते हैं, जब उनको सच्ची नीयत के साथ किया जाए।
  3. अल्लाह का अनुग्रह तथा उसकी कृपा कि लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में ईमान और नेकी की आशा मन में लिए हुए इबादत करने से पिछले गुनाह माफ़ कर देता है।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 16) (35). صحيح مسلم (1/ 523) (760). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (14/ 435). بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (2/ 337). نزهة المتقين، (2/ 846). شرح النووي على مسلم (6/ 40). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (5/ 220). شرح صحيح البخاري، لابن بطال (4/ 21).

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अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात में इतनी देर तक नमाज़ में खड़े रहते कि आपके दोनों पाँव सूज जाते थे।

عن عائشة رضي الله عنها والمغيرة بن شعبة رضي الله عنه : أن النبي صلى الله عليه وسلم كان يقوم من الليل حتى تَتَفَطَّرَ قَدَمَاهُ فقلت له: لم تَصْنَعُ هذا يا رسول الله، وقد غفر اللهُ لك ما تقدم من ذنبك وما تأخر؟ قال: «أَفَلَا أحب أن أكونَ عبدا شَكُورًا».
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- और मुग़ीरा बिन शोबा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात में इतनी देर तक नमाज़ में खड़े रहते कि आपके दोनों पाँव सूज जाते थे। मैंने आपसे कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आप ऐसा क्यों करते हैं, जबकि अल्लाह ने आपके अगले-पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए हैं? तो फ़रमायाः क्या मुझे यह अच्छा नहीं लेगगा कि मैं शुक्रगुज़ार बंदा बनूँ?
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لابن علان، نشر دار الكتاب العربي. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. - صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के हर भाग में वित्र पढ़ते थे। शुरू में भी, बीच में भी और अंत में भी। आपके वित्र पढ़ने अंतिम समय सहर तक होता था।

عن عائشة رضي الله عنها قالت: «من كلِّ الليل أَوْتَرَ رسول الله صلى الله عليه وسلم : من أول الليل، وأوسطه، وآخره، وانتهى وِتْرُهُ إلى السَّحَرِ».
आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के हर भाग में वित्र पढ़ते थे। शुरू में भी, बीच में भी और अंत में भी। आपके वित्र पढ़ने अंतिम समय सहर तक होता था।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

मोमिनों की माता आइशा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- यहाँ बता रही हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रात में वित्र किस वक़्त पढ़ा करते थे। उनका कहना है कि इसमें किसी विशेष समय की कैद नहीं थी। आप रात के हर भाग में वित्र पढ़ते थे। कभी शुरू में पढ़ लेते, जब इशा की नमाज़ पढ़ते या उसके कुछ देर बाद। कभी रात के बीच में प्रथम तिहाई गुजरने के पश्चात और कभी रात के अंतिम भाग में उसका दो तिहाई गुज़र जाने के बाद से लेकर अंतिम क्षणों तक।

हवाला

تيسير العلام، للبسام، الناشر: مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة العاشرة، 1426 هـ - 2006 م. تنبيه الأفهام، للعثيمين، طبعة مكتبة الصحابة، الامارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة الأولى 1426هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري، طبعة دار الفكر، دمشق، الطبعة الأولى 1381هـ. صحيح البخاري، لأبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد زهير بن ناصر الناصر، الناشر: دار طوق النجاة، الطبعة الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، لأبي الحسين مسلم بن الحجاج النيسابوري، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

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29 में से 8
29 हदीसें
  1. मैंने अपनी खाला मैमूना के पास रात बिताई। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) रात की नमाज़ के लिए खड़े हुए तो मैं आपकी बाएँ ओर खड़ा हो गया। ऐसे में, आपने मेरा सिर पकड़ा और अपनी दाहिनी ओर खड़ा कर दिया।
  2. ऐ आइशा! उठो और वित्र पढ़ो।
  3. सुबह से पहले वित्र पढ़ने में जल्दी करो
  4. जब तुममें से कोई रात को नमाज़ पढ़ने के लिए उठे और उसकी ज़बान पर क़ुरआन ठीक से न आ रहा हो और उसे पता न चल रहा हो कि क्या कुछ पढ़ रहा है, तो सो जाए
  5. हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए मिसवाक और वुज़ू का पानी तैयार रखते थे। फिर अल्लाह जितनी रात को चाहता आपको जगाता। तो आप उठते, वज़ू करते और नमाज़ पढ़ते थे।
  6. जो ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में कयाम करता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।
  7. अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात में इतनी देर तक नमाज़ में खड़े रहते कि आपके दोनों पाँव सूज जाते थे।
  8. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के हर भाग में वित्र पढ़ते थे। शुरू में भी, बीच में भी और अंत में भी। आपके वित्र पढ़ने अंतिम समय सहर तक होता था।
  9. जो व्यक्ति अपनी रात की पूरी नमाज़ या उसका कुछ भाग पढ़े बिना सो जाए, फिर प्रातः उठकर फज्र तथा ज़ुहर के बीच पढ़ ले, उसे ऐसा लिखा जाएगा, जैसे उसने उसे रात ही में पढ़ी हो।
  10. हे लोगों, सलाम फैलाओ (प्रचारित करो), लोगों को खाना खिलाओ, रिश्तेदारियों को जोड़ो, रात्रि में जब लोग सो रहे होते हैं, तो उठ कर नमाज़ पढ़ो, (ऐसा करने पर) सुरक्षित रूप से जन्नत में प्रवेश पा जाओगे।
  11. जब तुममें से किसी को नमाज़ पढ़ने की दशा में नींद आए, तो सो जाए, यहाँ तक नींद खत्म हो जाए।
  12. जब तक चुस्ती बाक़ी रहे, नमाज़ पढ़ो और चुस्ती खत्म हो जाए, तो सो जाओ।
  13. ठहरो! तुम उतना ही अमल करो, जितने की क्षमता रखते हो। अल्लाह की सौगंध, अल्लाह नहीं उकताएगा, यहाँ तक कि तुम ही उकता जाओगे। तथा आपकी नज़र में वही अमल सबसे प्रिय था, जिसे करने वाला हमेशा करता रहे।
  14. ऐ अल्लाह! मैंने अपने आपको तेरे हवाले कर दिया, तुझपर ईमान लाया, तुझपर भरोसा किया, तेरी मदद से अपने शत्रुओं से झगड़ा किया और निर्णय को तेरे हवाले कर दिया। अतः, मेरे उन सारे गुनाहों को क्षमा कर दे, जो मैंने पहले किए और जो मैं करने वाला हूँ और जो मैंने छिपाकर किए और जो दिखाकर किए और जिन्हें तू मुझसे अधिक जानता है। तेरे सिवा कोई सत्य पुज्य नहीं है।
  15. एक रात नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सारी रात एक आयत को ही निरंतर पढ़ते हुए क़्याम किया।
  16. एक व्यक्ति ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से, जब आप मिंबर पर थे, पूछा : रात की नमाज़ के बारे में आप क्या कहते हैं? आपने फरमाया : "दो-दो रकात पढ़ा करो
  17. रमज़ान के बाद सबसे श्रेष्ठ रोज़े अल्लाह के महीने मुहर्रम के रोज़े हैं तथा फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद सबसे उत्तम नमाज़ रात की नमाज़ है।
  18. वित्र हक़ है।अब, जो चाहे सात रकात के साथ वित्र बनाये, जो चाहे पाँच रकात रकात के साथ वित्र बनाये, जो चाहे तीन रकात के साथ वित्र बनाये और जो चाहे एक रकात के साथ वित्र बनाये।
  19. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें रमज़ान में आठ रकात तथा वित्र पढ़ाई। फिर अगली रात हम मस्जिद में जमा हुए और उम्मीद की कि आप हमारी ओर निकल कर आएँगे। इसी आशा में हम मस्जिद ही में रुके रहे, यहाँ तक कि सुबह हो गई।
  20. सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने तुम्हें एक अतिरिक्त नमाज़ प्रदान की है। उसे तुम इशा नमाज़ और फ़ज्र की नमाज़ के बीच में पढ़ो। वह नमाज़ वित्र है। वह नमाज़ वित्र है।
  21. ऐ आइशा ! मेरी आंखें तो सो जाती हैं मगर मेरा दिल नहीं सोता।
  22. ऐ अब्दुल्लाह ! फलाँ आदमी की तरह न हो जाना कि वह रात को उठा करता था, फिर उसने रात में क़याम करना छोड़ दिया ।
  23. ऐ क़ुरआन वालो ! वित्र पढ़ा करो, निश्चित ही अल्लाह वित्र (विषम) है तथा वित्र को पसंद करता है।
  24. एक रात में दो वित्र नहीं हैं।
  25. सुबह होने से पहले वित्र की नमाज़ पढ़ लो।
  26. जिसने सुबह होने से पहले वित्र नहीं पढ़ी तथा सुबह हो गई, तो उसके लिए वित्र नहीं।
  27. जो सोया रह जाए और वित्र न पढ़ सके, अथवा भूल जाए, तो उसे चाहिए कि जब याद आए तब पढ़ ले।
  28. जिसको यह डर हो कि वह रात के अंतिम भाग में नहीं उठ पाएगा तो उसे चाहिए कि प्रथम भाग में ही वित्र पढ़ ले, और जिसे गुमान हो कि वह अंतिम भाग में उठ जाएगा उसे चाहिए कि रात के अंतिम भाग में ही वित्र पढ़े, क्योंकि रात के अंतिम भाग में नमाज़ पढ़ना (फरिश्तों इत्यादि के) हाजिर होने का समय है, तथा यह बेहतर है।
  29. "ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे, मेरी आँख में नूर रख दे, मेरे कान में नूर रख दे, मेरे दाएँ नूर रख दे, मेरे बाएँ नूर रख दे, मेरे ऊपर नूर रख दे, मेरे नीचे नूर रख दे, मेरे सामने नूर रख दे, मेरे पीछे नूर रख दे और मेरे लिए नूर बना दे।"

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com