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तशरीह के साथ हदीसें

इमाम तथा उसके पीछे नमाज़ पढ़ने वाले के अहकाम

27 हदीसें

अपनी सफ़ें सीधी कर लिया करो; क्योंकि सफ़ों को सीधा करने का संबंध नमाज़ की पूर्णता से है।

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «سَوُّوا صُفُوفَكُمْ، فَإِنَّ تَسْوِيَةَ الصَّفِّ مِنْ تَمَامِ الصَّلَاةِ».
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अपनी सफ़ें सीधी कर लिया करो; क्योंकि सफ़ों को सीधा करने का संबंध नमाज़ की पूर्णता से है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ियों को इस बात का आदेश दे रहे हैं कि अपनी सफ़ें बराबर कर लिया करें। कोई किसी से आगे रहे, न पीछे। सफ़ों को बराबर करना नमाज़ को संपूर्ण बनाने वाली चीज़ों में से है, जबकि उनका टेढ़ा रह जाना नमाज़ में कमी पैदा करता है।

फ़ायदे
  1. इन्सान को उन सभी चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए, जो नमाज़ को संपूर्ण बनाएँ और उसे कमियों से बचाएं।
  2. यहाँ शिक्षा के संबंध में अल्लह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हिकमत सामने आती है कि आपने आदेश के साथ उसका निहित कारण भी बता दिया, ताकि आदेश की हिकमत स्पष्ट हो जाए और इन्सान के अंदर आज्ञापालन का जज़्बा पैदा हो।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 145) (723). صحيح مسلم (1/ 324) (433). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص127). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 161). الإفهام في شرح عمدة الأحكام، لابن باز (ص173).

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अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक आदमी को देखा, जिसने लोगों के साथ नमाज़ नहीं पढ़ी थी और सबसे अलग था। आपने फ़रमायाः "ऐ अमुक, आख़िर क्या बात है कि तूने लोगों के साथ नमाज़ नहीं पढ़ी?" उसने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं जुंबी (नापाक) हो गया हूँ और पानी भी न मिल सका। आपने फ़रमायाः "तुम मिट्टी का प्रयोग करो। वह तुम्हारे लिए काफ़ी है।"

عن عمران بن حصين رضي الله عنهما أن رسول الله صلى الله عليه وسلم رأى رجلًا مُعتزلًا، لم يُصَلِّ في القوم، فقال: (يا فلان، ما منعك أن تصلي في القوم؟) فقال: يا رسول الله أصابتني جنابةٌ، ولا مَاءَ، فقال: (عليك بالصَّعِيدِ، فإنه يَكْفِيَكَ).
इमरान बिन हुसैन (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक आदमी को देखा, जिसने लोगों के साथ नमाज़ नहीं पढ़ी थी और सबसे अलग था। आपने फ़रमायाः "ऐ अमुक, आख़िर क्या बात है कि तूने लोगों के साथ नमाज़ नहीं पढ़ी?" उसने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं जुंबी (नापाक) हो गया हूँ और पानी भी न मिल सका। तो आपने फ़रमायाः "तुम मिट्टी का प्रयोग करो। वह तुम्हारे लिए काफ़ी है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

एक दिन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने साथियों को फ़ज्र की नमाज़ पढ़ाई। नमाज़ पढ़ चुके तो देखा कि एक आदमी ने उनके साथ नमाज़ नहीं पढ़ी। चूँकि आप बड़े दयालु थे तथा अल्लाह की ओर बुलाने का कार्य कैसे किया जाए, इसका पूर्ण ज्ञान रखते थे, इसलिए उसे डाँटने के बजाय उससे जमाअत में शरीक न होने का कारण जानना चाहा। फ़रमायाः ऐ अमुक, तुम ने लोगों के साथ नमाज़ क्यों नहीं पढ़ी? उसने (अपनी समझ के अनुसार) कारण यह बताया कि वह जुंबी (उसे नापाकी पहुंची है) है और उसके पास पानी नहीं है, अतः उसने पानी मिलने तथा पवित्रता प्राप्त करने तक नमाज़ को विलंब करने का निर्णय लिया है। यह सुनकर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्लाह ने तुम्हें (अपनी कृपा से) पवित्रता प्राप्त करने के लिए पानी के स्थान पर एक और वस्तु प्रदान की है। अर्थात मट्टी दी है। तुम उसका प्रयोग कर लो। वह तुम्हारे लिए पानी के स्थान पर पर्याप्त है।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

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अपने परिवार ओर वापस जाओ, उनके बीच रहो, उन्हें शिक्षा प्रदान करो, आदेश दो और अमुक नमाज़ अमुक समय में तथा अमुक नमाज़ अमुक समय में पढ़ो। जब नमाज़ का समय आ जाए, तो तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारे लिए अज़ान दे और तुममें सबसे अधिक आयु वाला व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे।

عن أبي سليمان مالك بن الحويرث رضي الله عنه قال: أَتَينَا رسُول الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- ونَحنُ شَبَبَةٌ مُتَقَارِبُون، فَأَقَمْنَا عِندَهُ عِشْرِينَ لَيلَةً، وَكَان رَسُولُ الله -صلَّى الله عليه وسلَّم- رَحِيمًا رَفِيقًا، فَظَنَّ أَنَّا قَدْ اشْتَقْنَا أَهْلَنَا، فَسَألَنا عمَّنْ تَرَكْنا مِنْ أَهلِنا، فأَخبَرنَاه، فقال: «ارْجِعُوا إلى أَهْلِيكُم، فَأَقِيمُوا فيهم، وَعَلِّمُوهُم وَمُرُوهُم، وَصَلُّوا صَلاَةَ كَذَا في حِينِ كذَا، وصَلُّوا كَذَا في حِينِ كَذَا، فَإِذا حَضَرَتِ الصلاةُ فَلْيُؤذِّن لكم أَحَدُكُم وَلْيَؤُمَّكُم أكبركم». زاد البخاري في رواية له: «وصَلُّوا كَمَا رَأَيتُمُونِي أُصَلِّي».
अबू सुलैमान मालिक बिन हुवैरिस (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए। हम लोग उस समय लगभग समान आयु वाले जवान थे। हम आपके पास बीस दिन ठहरे। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बहुत ही दयालु और नरम स्वभाव के मालिक थे। आपको लगा कि हम लोग अपने परिवार की ओर लौटने की इच्छा रखते हैं, इसलिए हमसे हमारे परिवार के बारे में पूछा, तो हमने आपको बताया। इसपर आपने फ़रमायाः "अपने परिवार ओर वापस जाओ, उनके बीच रहो, उन्हें शिक्षा प्रदान करो, आदेश दो और अमुक नमाज़ अमुक समय में तथा अमुक नमाज़ अमुक समय में पढ़ो। जब नमाज़ का समय आ जाए, तो तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारे लिए अज़ान दे और तुममें सबसे अधिक आयु वाला व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد بن علان الشافعي، دار الكتاب العربي- بيروت - بدون تاريخ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة - بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. صحيح البخاري، للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب - الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا - الطبعة الأولى 1430هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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तुम अपनी सफ़ों को ज़रूर सीधी करो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे बीच मतभेद डाल देगा (दूसरा अर्थः तुम्हारे चेहरों को बिगाड़ देगा)।

عن النعمان بن بشير رضي الله عنه مرفوعاً: «لَتُسَوُّنَّ صُفُوفَكُم أو لَيُخَالِفَنَّ الله بين وُجُوهِكُم». وفي رواية: «كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يُسَوِّي صُفُوفَنَا، حتى كَأَنَّمَا يُسَوِّي بها القِدَاح، حتَّى إِذَا رأى أَنْ قد عَقَلْنَا عَنهُ، ثم خَرَج يومًا فَقَام، حتَّى إِذَا كاد أن يُكَبِّرُ، فَرَأَى رَجُلاً بَادِيًا صَدرُهُ، فقال: عِبَادَ الله، لَتُسَوُّنَّ صُفُوفَكُم أو لَيُخَالِفَنَّ الله بين وُجُوهِكُم».
नोमान बिन बशीर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः ''तुम अपनी सफ़ों को ज़रूर सीधी करो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे चेहरों को बिगाड़ देगा (दूसरा अर्थः तुम्हारे दिलों में मतभेद डाल देगा)।'' और एक रिवायत मे हैः ''रसूलुल्लाह (सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारी सफ़ें सीधी करवाया करते थे, यहाँ तक कि यह मालूम होता कि गोया आप उनसे तीर सीधा कर रहे हैं। यहाँ तक कि आप को अनुभव हुआ कि हमने आपसे यह मसला समझ लिया है। फिर एक दिन आप नमाज़ के लिए आए और खड़े हुए। फिर तकबीर कहने ही वाले थे कि एक आदमी को देखा, कि उसका सीना सफ़ से बाहर निकला हुआ है। तो आपने फ़रमायाः "अल्लाह के बंदो, तुम अपनी सफ़ों ज़रूर सीधी करो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे चेहरों को बिगाड़ देगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस बात की ताकीद की है कि अगर सफ़ों को बराबर नहीं किया गया, तो अल्लाह उन लोगों के मतो में विभेद डाल देगा, जिनकी सफ़ें टेढ़ी रह गईं और उनको सीधी करने पर ध्यान नहीं दिया। अतः, सफ़ में कोई आगे रहा तो कोई पीछे और नमाज़ियों के बीच में खाली स्थान भी छोड़ दिए। प्यारे रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जहाँ अपने साथियों को बताकर सिखाते थे, वहीं अमली तौर पर भी उन्हें प्रशिक्षण देते थे। चुनांचे आप हर नमाज़ के समय उनकी सफ़ें खुद अपने हाथों से सीधी करते रहे, यहाँ तक कि जब आपको लगा कि वे अच्छी तरह से समझ गए हैं, तो इस सिलसिले को बंद कर दिया। फिर एक दिन नमाज़ के समय अपने एक साथी को देखा कि उनका सीना सफ़ से बाहर निकला हुआ है, तो नाराज़ हुए और कहाः "तुम अपनी सफ़ें ज़रूर सीधी रखो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे मतों में विभेद पैदा कर देगा।"

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381ه. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426ه. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

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क्या तुममें से कोई व्यक्ति, जो इमाम से पहले अपना सर उठाता है, इस बात से नहीं डरता कि अल्लाह उसके सर को गधे का सर बना दे अथवा उसकी आकृति को गधे की आकृति में बदल दे?

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «أَمَا يَخْشَى أَحَدُكُمْ - أَوْ: لاَ يَخْشَى أَحَدُكُمْ - إِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ قَبْلَ الإِمَامِ، أَنْ يَجْعَلَ اللَّهُ رَأْسَهُ رَأْسَ حِمَارٍ، أَوْ يَجْعَلَ اللَّهُ صُورَتَهُ صُورَةَ حِمَارٍ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क्या तुममें से कोई व्यक्ति, जो इमाम से पहले अपना सर उठाता है, इस बात से नहीं डरता कि अल्लाह उसके सर को गधे का सर बना दे अथवा उसकी आकृति को गधे की आकृति में बदल दे?"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इमाम से पहले अपना सर उठाने वाले व्यक्ति को यह सख़्त चेतावनी दी है कि अल्लाह उसके सर को गधे का सर बना दे या उसकी आकृति को गधे की आकृति बना दे।

फ़ायदे
  1. इमाम के साथ मुक़तदियों की चार हालतें हो सकती हैं, जिनमें से तीन हालतें मना हैं। यानी इमाम से आगे बढ़ जाना, उसके साथ-साथ चलना और उससे पीछे रह जाना। जबकि होना यह चाहिए कि मुक़तदी इमाम का अनुसरण करे।
  2. मुक़तदी पर नमाज़ में इमाम का अनुसरण करना वाजिब है।
  3. इमाम से पहले अपना सर उठाने वाले का सर गधे के सर में बदल जाए, ऐसा संभव है। यह एक प्रकार की विकृति है।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 140) (691). صحيح مسلم (1/ 321) (427). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 111). خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، لفيصل آل مبارك (ص65). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص133).

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मैं एक गधी पर सवार होकर आया। उन दिनों मैं बालिग़ होने को था। रसूलुल्लाह - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मिना में लोगों को नमाज़ पढ़ा रहे थे, सामने कोई दीवार नहीं थी।

عن عبد الله بن عَبَّاس رضي الله عنهما قال: أقبلْتُ راكبا على حِمار أَتَانٍ، وأنا يومئذ قد نَاهَزْتُ الاحْتِلامَ، ورسول الله صلى الله عليه وسلم يصلِّي بالناس بِمِنًى إلى غير جِدار، مررتُ بين يدي بعض الصفّ، فنزلت، فأرسلتُ الأَتَانَ تَرْتَعُ، ودخلتُ في الصفّ، فلم يُنْكِرْ ذلك عليَّ أحد.
अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- का वर्णन है, वह कहते हैंः मैं एक गधी पर सवार होकर आया। उन दिनों मैं बालिग़ होने को था। रसूलुल्लाह- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मिना में लोगों को नमाज़ पढ़ा रहे थे। सामने कोई दीवार नहीं थी। मैं सफ़- पंक्ति- के कुछ भाग के आगे से गुज़रकर उतर गया, गधी को चरने के लिए छोड़ दिया एवं सफ़ में दाख़िल हो गया। किंतु इसपर किसी ने मुझे नहीं टोका।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहु) बताते हैं कि हज्जतुल वदा के अवसर पर जब वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ मिना में थे, उसी बीच की बात है कि एक बार वह एक गधी पर सवार होकर आए। और सफ़ के कुछ भाग के आगे से गुज़रेे। उस समय नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने साथियों को नमाज़ पढ़ा रहे थे। आपके सामने कोई दीवार भी नहीं थी। वह गधी से उतरे और उसे चरने के लिए छोड़ दिया और खुद सफ़ में दाखिल हो गए। उनका बयान है कि वह उस समय व्यस्क होने के थे। अर्थात् आयु इतनी हो चुकी थी कि यदि कोई टोकने के लायक काम करते और लोगों की नमाज़ में खलल पैदा होता, तो ज़रूर टोके जाते। लेकिन इसके बावजूद किसी ने कुछ नहीं कहा। न रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने, न आपके किसी साथी ने।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

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खड़े हो जाओ, मैं तुम्हें नमाज़ पढ़ाता हूँ।

عن أَنَس بنِ مَالِكٍ رضي الله عنه «أنَّ جَدَّتَهُ مُلَيكَة دَعَت رسول الله صلى الله عليه وسلم لِطَعَام صَنَعتُه، فَأَكَل مِنه، ثم قال: قُومُوا فَلِأُصَلِّي لَكُم؟ قال أنس: فَقُمتُ إِلَى حَصِيرٍ لَنَا قد اسوَدَّ من طُولِ مَا لُبِس، فَنَضَحتُه بماء، فقام عليه رسول الله صلى الله عليه وسلم وَصَفَفتُ أنا واليَتِيمُ وَرَاءَهُ، والعَجُوزُ مِن وَرَائِنَا، فَصَلَّى لَنَا رَكعَتَين، ثُمَّ انصَرَف». ولمسلم «أن رسول الله صلى الله عليه وسلم صلى به وبِأُمِّه فَأَقَامَنِي عن يَمِينِه، وأقام المَرأةَ خَلْفَنَا».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि उनकी दादी मुलैका ने खाना तैयार करके अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को खाने के लिए बुलाया। चुनांचे आपने उसमें से कुछ खाया और फरमायाः "खड़े हो जाओ, मैं तुम्हें नमाज़ पढ़ाता हूँ।" अनस कहते हैंः मैं एक चटाई के पास गया, जो बहुत दिनों से प्रयोग में रहने के कारण काली पड़ चुकी थी। मैंने उसे पानी डालकर धो दिया। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उसपर खड़े हो गए। मैंने और यतीम ने आपके पीछे सफ़ बना ली और बूढ़ी (दादी) हमारे पीछे खड़ी हो गई। आपने हमें दो रकात नमाज़ पढ़ाई और वापस चले गए। तथा मुस्लिम शरीफ़ में हैः अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उन्हें और उनकी माँ को नमाज़ पढ़ाई। (वह कहते हैं कि) आपने मुझे अपने दाएँ और महिला को हमारे पीछे खड़ा किया।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

मुलैका (रज़ियल्लाहु अंहा) ने खाना तैयार करके अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को खाने पर बुलाया। अल्लाह तआला ने चूँकि आपको आदर्श चरित्र और उत्तम व्यवहार का मालिक बनाया था, जिसके कारण आपने बड़ी विनयशील तबीयत पाई थी, अतः हर एक का आमंत्रण स्वीकार कर लेते थे, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, स्त्री हो या पुरुष एवं धनी हो या निर्धन। इससे आपके सामने, दुखी दिलों की ढारस बंधाना, निर्धनों को विनम्रता दिखाना और न जानने वालों को शिक्षा प्रदान करना जैसे महत्वपूर्ण एवं प्रशंसनीय उद्देश्य होते थे। चुनांचे आप इस आमंत्रण देने वाली स्त्री का घर गए, उनके यहाँ खाना खाया और फिर इस अवसर का सदउपयोग करते हुए इन कमज़ोर लोगों को नमाज़ सिखाने लगे, जो संभव है कि बड़ों के साथ आपकी मजलिस में बैठ न पाते हों। आपने उन्हें नमाज़ के लिए खड़े होने का आदेश दिया, ताकि उन्हें नमाज़ पढ़ाएँ और वे आपसे नमाज़ का पूरा तरीक़ा सीख लें। अतः, अनस (रज़ियल्लाहु अंहु) ने एक पुरानी चटाई को, जो बहुत दिनों से प्रयोग में रहने के कारण काली पड़ चुकी थी, पानी से धोया और आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नमाज़ पढ़ाने के लिए उसपर खड़े हो गए। अनस (रज़ियल्लाहु अंहु) और उनके साथ एक यदीम ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पीछे एक सफ़ बना ली तथा आमंत्रण देने वाली बूढ़ी स्त्री उन दोनों के पीछे अकेली एक सफ़ में खड़ी हो गई। आपने उन्हें दो रकअत नमाज़ पढ़ाई और फिर निमंत्रण तथा शिक्षा का ह़क़ अदा करके वापस हो गए। अल्लाह हमें आपके सुकर्मों एवं चरित्र के अनुसरण की तौफ़ीक़ दे।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام، لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم، لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ . صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

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मैंने किसी इमाम के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ी, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अधिक हल्की और संपूर्ण नमाज़ पढ़ाता हो।

عن أَنَس بن مالك رضي الله عنه مرفوعاً: «ما صَلَّيْتُ خلف إمام قَطُّ أَخَفَّ صلاة، ولا أَتَمَّ صلاة من النبي صلى الله عليه وسلم ».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैंने किसी इमाम के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ी, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अधिक हल्की और संपूर्ण नमाज़ पढ़ाता हो।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
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नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- आसानी पैदा करने का आदेश देते थे और ज़बान तथा कर्म द्वारा उसकी ओर बुलाते भी थे। आसानी पैदा करने का एक रूप यह है कि नमाज़ पढ़ाते समय हल्की नमाज़ पढ़ाई जाए। लेकिन इससे नमाज़ की संपूर्णता में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं कि उन्होंने जितने भी इमामों के पीछे नमाज़ पढ़ी है, उनमें सबसे हल्की नमाज़ सबसे बड़े इमाम यानी अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की होती थी। आपकी नमाज़, कभी पीछे नमाज़ पढ़ने वालों को भारी नहीं लगती और जब वह नमाज़ से निकलते तो उनके अंदर नमाज़ की चाहत बाक़ी होती थी। साथ ही, उनका यह भी कहना है कि उन्होंने आपसे से अधिक संपूर्ण नमाज़ किसी के पीछे नहीं पढ़ी। आप नमाज़ हमेशा वाजिब एवं मुसतहब चीज़ों का ख़याल रखते हुए संपूर्ण ढंग से पढ़ाते और उसमें कोई कमी नहीं रहने देते थे। इसे दरअसल आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की बरकत का एक नमूना ही कहा जा सकता है।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ، 2006م. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى 1426هـ، 2005م. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم- لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ، 1988م. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار المنهاج، القاهرة، الطبعة: الأولى 1427هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
27 में से 8
27 हदीसें
  1. अपनी सफ़ें सीधी कर लिया करो; क्योंकि सफ़ों को सीधा करने का संबंध नमाज़ की पूर्णता से है।
  2. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक आदमी को देखा, जिसने लोगों के साथ नमाज़ नहीं पढ़ी थी और सबसे अलग था। आपने फ़रमायाः "ऐ अमुक, आख़िर क्या बात है कि तूने लोगों के साथ नमाज़ नहीं पढ़ी?" उसने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं जुंबी (नापाक) हो गया हूँ और पानी भी न मिल सका। आपने फ़रमायाः "तुम मिट्टी का प्रयोग करो। वह तुम्हारे लिए काफ़ी है।"
  3. अपने परिवार ओर वापस जाओ, उनके बीच रहो, उन्हें शिक्षा प्रदान करो, आदेश दो और अमुक नमाज़ अमुक समय में तथा अमुक नमाज़ अमुक समय में पढ़ो। जब नमाज़ का समय आ जाए, तो तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारे लिए अज़ान दे और तुममें सबसे अधिक आयु वाला व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे।
  4. तुम अपनी सफ़ों को ज़रूर सीधी करो, अन्यथा अल्लाह तुम्हारे बीच मतभेद डाल देगा (दूसरा अर्थः तुम्हारे चेहरों को बिगाड़ देगा)।
  5. क्या तुममें से कोई व्यक्ति, जो इमाम से पहले अपना सर उठाता है, इस बात से नहीं डरता कि अल्लाह उसके सर को गधे का सर बना दे अथवा उसकी आकृति को गधे की आकृति में बदल दे?
  6. मैं एक गधी पर सवार होकर आया। उन दिनों मैं बालिग़ होने को था। रसूलुल्लाह - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मिना में लोगों को नमाज़ पढ़ा रहे थे, सामने कोई दीवार नहीं थी।
  7. खड़े हो जाओ, मैं तुम्हें नमाज़ पढ़ाता हूँ।
  8. मैंने किसी इमाम के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ी, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अधिक हल्की और संपूर्ण नमाज़ पढ़ाता हो।
  9. तुम नमाज़ में سَبِّحِ اسم ربك الأعلى' ,'والشمس وَضُحَاهَا' और 'والليل إذا يغشى' जैसी सूरतें क्यों नहीं पढ़ते, क्योंकि तुम्हारे पीछे बड़े-बूढ़े, कमज़ोर और ज़रूरतमंद, हर तरह के लोग नमाज़ पढ़ते हैं?
  10. जब तुममें से कोई लोगों को नमाज़ पढ़ाए, तो हल्की पढ़ाए। क्योंकि उनके अंदर दुर्बल, रोगी तथा ज़रूरतमंद भी होते हैं। हाँ, जब अकेला नमाज़ पढ़े, तो जितनी चाहे, लंबी करे।
  11. इमाम इस लिये बनाया गया है, ताकि उसका अनुसरण किया जाए। उस से मतभेद न करो। जब वह तकबीर कहे तो तुम लोग तकबीर कहो और जब रुकू करे तो तुम लोग रुकू करो और जबः سمع الله لمن حمده (समि अल्लाहु लेमन हमेदहु) कहे तो ربنا ولك الحمد (रब्बना व लकल हम्द) कहो। और जब सजदा करे तो सजदा करो और जब वह बैठ कर नमाज़ पढ़े तो तुम लोग भी बैठ कर नमाज़ पढ़ो।
  12. अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब 'سمع الله لمن حمده' (समिअल्लाहु लिमन ह़मिदहु) कहते तो हममें से कोई अपनी पीठ नहीं झुकाता, यहाँ तक कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सजदे में चले जाते, फिर हम आपके बाद ही सजदे में जाते थे।
  13. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को सूचना मिली कि अम्र बिन औफ़ के बेटों के बीच लड़ाई हो गई है। अतः, अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- कुछ लोगों के साथ उनके बीच सुलह कराने पहुँचे।
  14. तसबीह (सुबहान अल्लाह कहना) पुरुषों के लिए है और ताली बजाना स्त्रियों कि लिए।
  15. ऐसा न करो, जब तुम में से कोई अपने घर में (फ़र्ज़) नमाज़ पढ़ चुका हो, फिर वह इमाम को नमाज़ पढ़ाते हुए पाए , तो उसे चाहिए कि इमाम के साथ नमाज़ पढ़ ले, यह नमाज़ उसके लिए नफ़्ल हो जाएगी।
  16. एक दफा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम घोड़े पर सवार हुए तो उससे गिर गए, जिस के कारण आपका दायां पहलू जख़्मी हो गया।
  17. आगे बढ़ो तथा मेरा अनुसरण करो, तथा तुम्हारा अनुसरण तुम्हारे पीछे वाले करें, (याद रखो) लोग बराबर पीछे हटते रहते हैं यहां तक कि अल्लाह भी उन्हें पीछे कर देता है।
  18. ऐ लोगो ! तुम नफ़रत फैला रहे हो, जो लोगों को नमाज़ पढ़ाए उसे चाहिए कि हल्की नमाज़ पढ़ाए, उन में रोगी भी होते हैं, कमज़ोर भी तथा ज़रूरत मंद भी।
  19. फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो और फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो,जब नमाज़ का समय हो जाए तो तुम में से एक व्यक्ति अज़ान दे तथा तुम में से जो क़ुरआन का सबसे ज़्यादा याद रखता हो वह इमामत करे।
  20. जो क़ुरआन को सर्वाधिक याद रखता हो वह लोगों की इमामत करे।
  21. मैंने और यतीम ने, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पीछे अपने घर में नमाज़ पढ़ी और मेरी माँ उम्मे सुलैम हमारे पीछे थीं।
  22. अल्लाह तआला तुम्हारे शौक़ (चाह, अभिरुचि) में वृद्धि करे, लेकिन पुनः ऐसा न करना।
  23. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक व्यक्ति को सफ़ के पीछे अकेले नमाज़ पढ़ते हुए देखा, तो उसे नमाज़ दोहराने का आदेश दिया।
  24. उम्मे वरक़ा बिन्ते अब्दुल्लाह बिन हारिस अंसारी से वर्णित है कि उन्होंने क़ुरआन हिफ़्ज़ (कंठस्थ) किया था, (और) नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उन्हें आदेश दिया था कि वह अपने घर वालों की इमामत करें (उन्हें नमाज़ पढ़ाएं)।
  25. नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इब्ने उम्मे मकतूम को अपना ख़लीफा (उत्तराधिकारी) बनाया था जो लोगों की इमामत करते थे, जबकि वह अंधे आदमी थे।
  26. तुममें से जो कोई नमाज़ पढ़ने के लिए आए तो उसे चाहिए कि वह वैसी ही अवस्था में हो जाए जैसा इमाम कर रहा है।
  27. जब तुम नमाज़ पढ़ो तो अपनी सफ़ें सठीक कर लो। फिर तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे। फिर जब वह तकबीर कहे, तो तुम तकबीर कहो

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com