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तशरीह के साथ हदीसें

तुममें से जो कोई नमाज़ पढ़ने के लिए आए तो उसे चाहिए कि वह वैसी ही अवस्था में हो जाए जैसा इमाम कर रहा है।

عن علي بن أبي طالب، ومعاذ بن جبل رضي الله عنهما مرفوعًا: «إذا أتى أحدُكم الصلاةَ والإمامُ على حال، فلْيصنعْ كما يصنع الإمامُ».
अली बिन अबू तालिब व मुआज़ बिन जबल -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से मरफूअन वर्णति है : “तुममें से जो कोई नमाज़ पढ़ने के लिए आए तो उसे चाहिए कि वह वैसी ही अवस्था में हो जाए जैसा इमाम कर रहा है।”
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जब तुममें से कोई नमाज़ पढ़ने पहुँचे और इमान क़याम, रुकू, सजदा या बैठक आदि किसी हालत में हो, तो इमाम को क़याम अथवा रुकू आदि जिस अवस्था में पाए, उसी में उसके साथ हो जाए और उसके खड़े होने की प्रतीक्षा न करे, जैसा कि कुछ लोग करते हैं।

फ़ायदे
  1. इमाम के साथ बाद में नमाज़ में मिलने वाले को आदेश कि वह इमाम को जिस अवस्था में पाए उसी में उसके साथ हो जाए। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि वह रुकू में है या सजदे में या फिर बैठक में।
  2. बाद में मिलने वाला इमाम को जिस रकात में पाए, वह रकात उसे उसका रुकू पाने से मिल जाती है। यह बात अन्य हदीसों से प्रमाणित है।
हवाला

سنن الترمذي، محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر، ومحمد فؤاد عبد الباقي، وإبراهيم عطوة عوض، شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، مصر، الطبعة الثانية، 1395هـ - 1975م. نيل الأوطار، محمد بن علي الشوكاني اليمني، تحقيق: عصام الدين الصبابطي، الناشر: دار الحديث، مصر، الطبعة الأولى، 1413هـ - 1993م. صحيح الجامع الصغير وزيادته، محمد ناصر الدين الألباني، المكتب الإسلامي، بيروت، الطبعة الثالثة، 1408هـ. تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي، محمد عبد الرحمن بن عبد الرحيم المباركفورى، دار الكتب العلمية، بيروت. بلوغ المرام من أدلة الأحكام، أحمد بن علي بن حجر العسقلاني، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض، المملكة العربية السعودية، الطبعة الأولى، 1435هـ - 2014م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
इमाम तथा उसके पीछे नमाज़ पढ़ने वाले के अहकाम

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com