سنن أبي داود، سليمان بن الأشعث أبوداود، دار الفكر، تحقيق : محمد محيي الدين عبد الحميد. سنن الترمذي، محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق: أحمد محمد شاكر وآخرين، دار إحياء التراث العربي، بيروت. مسند الإمام أحمد بن حنبل، أحمد بن حنبل أبو عبدالله الشيباني، تحقيق: شعيب الأرنؤوط و عادل مرشد، وآخرون، تحت إشراف: عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى1421هـ، 2001م. سنن الدارمي، تحقيق: حسين سليم أسد الداراني، دار المغني للنشر والتوزيع، المملكة العربية السعودية، الطبعة: الأولى 1412هـ، 2000م. توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، الطبعة الخامِسَة، 1423هـ، 2003 م.
तशरीह के साथ हदीसें
हमें मुग़ीरा बिन शोबा ने नमाज़ पढ़ाई और दो रकात के बाद खड़े हो गए। हमने 'सुबहानल्लाह' कहा, तो उन्होंने भी 'सुबहानल्लाह' कहा और नमाज़ जारी रखी। जब नमाज़ पूरी करके सलाम फेर चुके तो, त्रुटि के दो सजदे कर लिए। जब नमाज़ से बाहर आ गए, तो फ़रमायाः मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को ऐसा ही करते देखा है, जैसा मैंने किया है।
عن زياد بن علاقة قال: صَلَّى بِنَا المغيرة بنُ شُعْبَةَ فَنَهَضَ في الركعتين، قلنا: سبحان الله، قال: سبحان الله وَمَضَى، فَلَمَّا أَتَمَّ صَلَاتَهُ وَسَلَّمَ، سَجَدَ سَجْدَتَيِ السَّهْوِ، فَلَمَّا انْصَرَفَ، قَالَ: «رَأَيْتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يَصْنَعُ كَمَا صَنَعْتُ».
ज़ियाद बिन अलाक़ा कहते हैं कि हमें मुग़ीरा बिन शोबा ने नमाज़ पढ़ाई और दो रकात के बाद खड़े हो गए। हमने 'सुबहानल्लाह' कहा, तो उन्होंने भी 'सुबहानल्लाह' कहा और नमाज़ जारी रखी। जब नमाज़ पूरी करके सलाम फेर चुके तो, त्रुटि के दो सजदे कर लिए। जब नमाज़ से बाहर आ गए, तो फ़रमायाः मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वैसा ही करते देखा है, जैसा मैंने किया है।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com