सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

नमाज़ की सुन्नतें

15 हदीसें

अगर नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना गुनाह है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम हो।

عن أبي جُهَيْمِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ الصِّمَّةِ الأنصاري رضي الله عنه مرفوعاً: «لو يعلم المار بين يدي الْمُصَلِّي ماذا عليه لكان أن يَقِفَ أربعين خيرا له من أن يَمُرَّ بين يديه». قال أَبُو النَّضْرِ: لا أدري: قال أربعين يوما أو شهرا أو سنة.
अबू जुहैम बिन हारिस बिन सिम्मा अंसारी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः " यदी नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम हो।" अबू नज़्र कहते हैंः मुझे नहीं पता कि आपने चालीस दिन कहा है या महीना या साल।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नमाज़ी अपने रब के सामने खड़ा उससे वार्तालाप करता और उसे पुकारता है। अतः, जब नमाज़ की अवस्था में कोई उसके सामने से गुज़रता है, तो इस वार्तालाप को भंग करता है और उसकी इबादत में खलल डालता है। यही कारण है कि जो व्यक्ति नमाज़ी के सामने से गुज़रकर उसकी इबादत में खलल डाले, वह बड़े पाप का हकदार बन जाता है। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यहाँ बताया है कि अगर नमाज़ी के समाने से गुज़रने वााला यह जान ले कि वह अपने इस कार्य के कारण कितने बड़े पाप का भागीदार बनेगा, तो उसके सामने से गुज़रने की तुलना में लंबे समय तक अपने स्थान में खड़े रहना पसंद करेगा।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. تأسيس الأحكام للنجمي، ط2، دار علماء السلف، 1414هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जब तुम में से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। अगर वह न रुके, तो उससे लड़ाई करे, इसलिए कि वह शैतान है।

عن أبي سعيد الْخُدْرِيِّ رضي الله عنه مرفوعًا: (إذا صلَّى أحدكم إلى شيء يَسْتُرُهُ من الناس، فأراد أحد أن يَجْتَازَ بين يديه فَلْيَدْفَعْهُ، فإن أبى فَلْيُقَاتِلْهُ؛ فإنما هو شيطان).
अबू सईद ख़ुदरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जब तुम में से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। अगर वह न रुके, तो उससे लड़ाई करे, इसलिए कि वह शैतान है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

वैसे तो शरीयत हमें अपने सभी कामों में सावधानी बरतने और सतर्क रहने का आदेश देती है, लेकिन चूँकि नमाज़ दीन और दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है, इसलिए शरीयत ने उसका खास ख़्याल रखने और नमाज़ शुरू करने से पहले सामने सुतरा रखने का आदेश दिया है, ताकि कोई उसके सामने से गुज़रकर नमाज़ में खलल न डाल सके और वह पूरी तनमयता से अपने रब से वार्तालाप कर सके। लेकिन यदि कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो पहले आसानी से रोकने का प्रयास करे, यदि वह आसानी से रुकने को तैयार न हो, तो उसने अपना सम्मान खोदिया तथा वह ज़्यादती करने वाला है और उसे हाथ से रोका जाएगा, क्योंकि उसका यह काम शैतान का काम है, जो लोगों की इबादतों में खलल डालने और खास तौर से नमाज़ को बिगाड़ने के फिराक में रहता है।

हवाला

الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. تأسيس الأحكام للنجمي، ط2، دار علماء السلف، 1414هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام، لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم، لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة، (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जब गर्मी अधिक तेज़ हो, तो ज़ुहर की नमाज़ ज़रा ठंड पड़ने पर पढ़ा करो, क्योंकि गर्मी की भीषणता जहन्नम की लपट का एक भाग है।

عن عبد الله بن عُمَرَ وأبي هُرَيْرَةَ وأبي ذر رضي الله عنهم عن النبي - صلى الله عليه وسلم - أنه قال: «إذا اشْتَدَّ الْحَرُّ فَأَبْرِدُوا بالصلاة. فإن شدة الْحَرِّ من فَيْحِ جَهَنَّمَ».
अब्दुल्लाह बिन उमर, अबू हुरैरा और अबूज़र- रज़ियल्लाहु अम्हुम- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमयाः जब गर्मी अधिक तेज़ हो, तो ज़ुहर की नमाज़ ज़रा ठंड पड़ने पर पढ़ा करो, क्योंकि गर्मी की भीषणता जहन्नम की लपट का एक भाग है।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भीषण गर्मी (जो कि जहन्नम के साँस लेने और उसकी लपट के कारण होती है) के समय ज़रा देर करके, ठंडा होने पर नमाज़ पढ़ने का आदेश दिया है। ताकि ऐसा न हो कि गर्मी और परेशानी के कारण इनसान सुकून से नमाज़ न पढ़ सके।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426ه عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423 ه.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

मैं ने अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- से पूछाः क्या अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने दोनों जूतों समेत नमाज़ पढ़ते थे? उन्होंने कहाः हाँ।

عن مَسْلَمَةَ سَعِيدِ بْنِ يَزِيد قال: سألت أنس بن مالك: أكان النبي صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي في نَعْلَيْهِ؟ قال: «نعم».
मसलमा सईद बिन यज़ीद कहते हैं कि मैंने अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- से पूछाः क्या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने दोनों जूतों समेत नमाज़ पढ़ते थे? उन्होंने कहाः हाँ।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

शरीयत के उद्देश्यों में, किताब वालों की मुख़ालफ़त तथा मुसलमानों के लिए परेशानी का कारण बनने वाली हर वस्तु को हटाना भी शामिल है। सईद बिन ज़ैद, जो एक विश्वसनीय 'ताबिई' हैं, उन्होंने अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- से, प्यारे रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के बारे में पूछा कि क्या आप जूते पहनकर नमाज़ पढ़ते थे, ताकि वह भी आपको आदर्श बनाकर ऐसा कर सकें? यह भी हो सकता है कि वह इस चीज़ को असंभव समझते रहे हों, क्योंकि जूतों में आम तौर पर गंदगी रहती ही है। सो अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- ने उन्हें जवाब दिया कि हाँ, आप जूते पहनकर नमाज़ पढ़ा करते थे। यह आपकी सुन्नत है, जो किसी निर्धारित स्थान अथवा निर्धारित समय के साथ खास नहीं है।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ، 2006م. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى 1426هـ، 2005م. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار المنهاج، الطبعة: 1427هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

मैंने मुहम्मद- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की नमाज़ को ध्यान से देखा, तो पाया कि आपका क़याम, रुकू, रुकू के बाद सीधे खड़ा होना, सजदा, दो सजदों के बीच बैठना, उसके बाद का सजदा और सलाम एवं नमाज़ के स्थान से निकलने के बीच का अंतराल, यह सब लगभग बराबर होते थे।

عن الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ رضي الله عنهما قال: «رَمَقْتُ الصلاة مع محمد صلى الله عليه وسلم فوجدت قيامه، فَرَكْعَتَهُ، فاعتداله بعد ركوعه، فسجدته، فَجِلْسَتَهُ بين السجدتين، فسجدته، فَجِلْسَتَهُ ما بين التسليم والانصراف: قريبا من السَّوَاء». وفي رواية: «ما خلا القيام والقعود، قريبا من السَّوَاءِ».
बरा बिन आज़िब- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि मैंने मुहम्मद- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की नमाज़ को ध्यान से देखा, तो पाया कि आपका क़याम, रुकू, रुकू के बाद सीधे खड़ा होना, सजदा, दो सजदों के बीच बैठना, उसके बाद का सजदा और सलाम एवं नमाज़ के स्थान से निकलने के बीच का अंतराल, यह सब लगभग बराबर होते थे। एक रिवायत में है कि क़याम और तशह्हुद के सिवा सारे कार्य लगभग बराबर होते थे।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

बरा बिन आज़िब (रज़ियल्लाहु अंहु) जो रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ध्यान से देखते रहते थे, ताकि आपकी नमाज़ को सीख सकें और उसी जैसी नमाज़ पढ़ सकें, कहते हैं कि आपकी नमाज़ के सभी अंग तुलनात्मक दृष्टि से मुनासिब और एक-दूसरे के करीब होते थे। आपका क़िराअत के लिए क़याम और तशह्हुद के लिए बैठना, दोनों रुकू, उसके बाद के क़याम और सजदे के अनुरूप होते थे। ऐसा नहीं होता था कि क़याम लंबा करें और रुकू हल्का, या सजदा लंबा करें और क़याम या बैठक हल्की। बल्कि हर रुक्न दूसरे रुक्न के अनुरूप होता। इसका मतलब यह नहीं है कि क़याम और तशह्हुद की बैठक रुकू और सजदे के बराबर होते थे। बल्कि इसका अर्थ यह है कि आप एक रुक्न को लंबा और दूसरे को हल्का नहीं करते थे।

हवाला

تيسير العلام، للبسام، الناشر: مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة العاشرة، 1426هـ - 2006 م. تنبيه الأفهام، للعثيمين، طبعة مكتبة الصحابة الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة الأولى، 1426. تهذيب اللغة, المؤلف: محمد بن أحمد بن الأزهري الهروي، المحقق: محمد عوض مرعب, الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت, الطبعة: الأولى، 2001م. - تأسيس الأحكام، لأحمد بن يحيى النجمي, طبعة دار المنهاج. صحيح البخاري، لأبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد زهير بن ناصر الناصر، الناشر: دار طوق النجاة، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي - الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यदि नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना गुनाह है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम होगा। अबू नज़्र कहते हैं : मुझे नहीं पता कि आपने चालीस दिन फ़रमाया है अथवा महीना अथवा साल।

عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ، أَنَّ زَيْدَ بْنَ خَالِدٍ الْجُهَنِيَّ رَضيَ اللهُ عنه، أَرْسَلَهُ إِلَى أَبِي جُهَيْمٍ رَضيَ اللهُ عنه، يَسْأَلُهُ مَاذَا سَمِعَ مِنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْمَارِّ بَيْنَ يَدَيِ الْمُصَلِّي؟ قَالَ أَبُو جُهَيْمٍ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَوْ يَعْلَمُ الْمَارُّ بَيْنَ يَدَيِ الْمُصَلِّي مَاذَا عَلَيْهِ لَكَانَ أَنْ يَقِفَ أَرْبَعِينَ خَيْرًا لَهُ مِنْ أَنْ يَمُرَّ بَيْنَ يَدَيْهِ» قَالَ أَبُو النَّضْرِ: لَا أَدْرِي قَالَ: أَرْبَعِينَ يَوْمًا أَوْ شَهْرًا أَوْ سَنَةً؟
अबू जुहैम बिन हारिस बिन सिम्मा अंसारी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "यदि नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना गुनाह है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम होगा।" अबू नज़्र कहते हैं : मुझे नहीं पता कि आपने चालीस दिन फ़रमाया है अथवा महीना अथवा साल।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नमाज़ी अपने रब के सामने खड़े होकर उससे प्रार्थना करता है और उसे पुकारता है। अतः, इस हाल में यदि कोई उसके सामने से गुज़रता है, तो वह इस प्रार्थना में रुकावट खड़ी करता है और उसकी इबादत में ख़लल डालता है। यही कारण है कि नमाज़ी के सामने से गुज़र कर उसकी नमाज़ में ख़लल डालने वाला अल्लाह के यहाँ बड़ा पापी है। चुनांचे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बताताः यदि नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला यह जान ले कि उसके इस कार्य का कितना गुनाह है, तो उसके सामने से गुज़रने की तुलना में अपने स्थान में चालीस तक ठहरे रहने को तरजीह देगा। इससे अंदाज़ा होता है कि इस काम से बचना और दूर रहना कितना ज़रूरी है। ज्ञात हो कि रावी को इस बात में शक है कि यहाँ चालीस से आशय चालीस दिन हैं या महीने या फिर साल? लेकिन एक बात ध्यान में रहे कि यहाँ उल्लिखित संख्या से मुराद दिन, महीना या साल बताना नहीं है, बल्कि मुराद मनाही में ताकीद और पैदा करना है।

हवाला

صحيح البخاري (1/ 108) (510). صحيح مسلم (1/ 363) (507). تيسير العلام، للبسام تيسير العلام (ص184). تنبيه الأفهام، لابن عثيمين (2/ 239). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 154).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

हम लोग नमाज़ पढ़ते और हमारे आगे से पशु गुजरते रहते। हमने इसका उल्लेख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से किया, तो आपने फरमयाः "कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु अपने सामने रख लो, तो सामने से गुज़रने वाली कोई चीज़ तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचाएगी।

عن طلحة بن عبيد الله رضي الله عنه قال: كنَّا نصلِّي والدواب تمرُّ بين أيدينا فذكرنا ذلك لرسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: «مِثْلُ مُؤْخِرَةِ الرَّحْلِ تكون بين يدي أحدكم، ثم لا يضُرُّه ما مر بين يديه».
तलहा बिन उबैदुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं : हम लोग नमाज़ पढ़ते और हमारे आगे से पशु गुजरते रहते। हमने इसका उल्लेख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से किया, तो आपने फ़रमयाः "कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु अपने सामने रख लो, तो सामने से गुज़रने वाली कोई चीज़ तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचाएगी।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح مسلم، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي، الناشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت. توضيح الأحكام من بلوغ المرام، لعبدالله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة ، ط الخامسة 1423هـ. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن صالح الفوزان، ط 1، 1427هـ، دار ابن الجوزي.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जब तुममें से कोई नमाज़ पढ़े, तो अपनी नमाज़ के लिए कोई ओ़ट बना ले, चाहे वह एक तीर ही क्यों न हो।

عن سَبْرة بن معبد الجهني رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «إذا صلى أحدكم، فليسْتَتِر لصلاته، ولو بسهم».
सबरा बिन माबद जुहनी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः“जब तुममें से कोई नमाज़ पढ़े, तो अपनी नमाज़ के लिए कोई ओ़ट बना ले, चाहे वह एक तीर ही क्यों न हो।”
इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

مسند أحمد بن حنبل، لأبي عبد الله أحمد بن محمد بن حنبل، تحقيق أبو المعاطي النوري، عالم الكتب. سلسلة الأحاديث الصحيحة وشيء من فقهها وفوائدها, أبو عبد الرحمن محمد ناصر الدين الألباني, مكتبة المعارف للنشر والتوزيع، الرياض, الطبعة: الأولى، (لمكتبة المعارف)، عام النشر: 1415 هـ - 1995. توضيح الأحكام من بلوغ المرام، لعبدالله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة ، ط الخامسة 1423هـ . منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف عبد الله بن صالح الفوزان، ط 1، 1427هـ، دار ابن الجوزي، الرياض.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
15 में से 8
15 हदीसें
  1. अगर नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना गुनाह है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम हो।
  2. जब तुम में से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। अगर वह न रुके, तो उससे लड़ाई करे, इसलिए कि वह शैतान है।
  3. जब गर्मी अधिक तेज़ हो, तो ज़ुहर की नमाज़ ज़रा ठंड पड़ने पर पढ़ा करो, क्योंकि गर्मी की भीषणता जहन्नम की लपट का एक भाग है।
  4. मैं ने अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- से पूछाः क्या अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने दोनों जूतों समेत नमाज़ पढ़ते थे? उन्होंने कहाः हाँ।
  5. मैंने मुहम्मद- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की नमाज़ को ध्यान से देखा, तो पाया कि आपका क़याम, रुकू, रुकू के बाद सीधे खड़ा होना, सजदा, दो सजदों के बीच बैठना, उसके बाद का सजदा और सलाम एवं नमाज़ के स्थान से निकलने के बीच का अंतराल, यह सब लगभग बराबर होते थे।
  6. यदि नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना गुनाह है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम होगा। अबू नज़्र कहते हैं : मुझे नहीं पता कि आपने चालीस दिन फ़रमाया है अथवा महीना अथवा साल।
  7. हम लोग नमाज़ पढ़ते और हमारे आगे से पशु गुजरते रहते। हमने इसका उल्लेख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से किया, तो आपने फरमयाः "कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु अपने सामने रख लो, तो सामने से गुज़रने वाली कोई चीज़ तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचाएगी।
  8. जब तुममें से कोई नमाज़ पढ़े, तो अपनी नमाज़ के लिए कोई ओ़ट बना ले, चाहे वह एक तीर ही क्यों न हो।
  9. जब तुममें से कोई नमाज़ के लिए खड़ा हो और उसके सामने कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु हो, तो वह उसके लिए ओट हो जाती है। किंतु, यदि उसके सामने कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु न हो, तो उसकी नमाज़ को गधा, महिला तथा काला कुत्ता भंग कर देते हैं।
  10. जब तुममें से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। यदि वह न रुके, तो उससे भिड़ जाए, इसलिए कि वह शैतान है।
  11. अपने इस परदे को हमारे सामने से हटा दो। क्योंकि, इसके चित्र बराबर मेरी नमाज़ में व्यवधान डाल रहे हैं।
  12. मेरी यह चादर अबू जह्म को दे दो और अबू जह्म से उसकी अंबजानी चादर (बिना धारियों वाली मोटी चादर) ले आओ। क्योंकि इसने अभी नमाज़ से मेरा ध्यान भटकाने का काम किया है।
  13. नमाज़ में जम्हाई लेना शैतान की ओर से होता है। अतः यदि किसी को जम्हाई आए तो उसे सामर्थ्य भर रोके।
  14. ऐ लोगों, नबूवत के शुभ संदेशों में से अब केवल अच्छे स्वप्न ही रह गए हैं, जिस को मुस्लिम देखता है, या उस के लिए देखा जाता है, सचेत रहो मुझे रुकू तथा सज्दा में क़ुरआन पढ़ने से मना किया गया है।
  15. मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को दाईं और बाईं ओर सलाम फेरते हुए देखता था, यहाँ तक कि मैं आपके गाल का उजलापन देख लेता।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com