नमाज़ी अपने रब के सामने खड़े होकर उससे प्रार्थना करता है और उसे पुकारता है। अतः, इस हाल में यदि कोई उसके सामने से गुज़रता है, तो वह इस प्रार्थना में रुकावट खड़ी करता है और उसकी इबादत में ख़लल डालता है। यही कारण है कि नमाज़ी के सामने से गुज़र कर उसकी नमाज़ में ख़लल डालने वाला अल्लाह के यहाँ बड़ा पापी है। चुनांचे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बताताः यदि नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला यह जान ले कि उसके इस कार्य का कितना गुनाह है, तो उसके सामने से गुज़रने की तुलना में अपने स्थान में चालीस तक ठहरे रहने को तरजीह देगा। इससे अंदाज़ा होता है कि इस काम से बचना और दूर रहना कितना ज़रूरी है। ज्ञात हो कि रावी को इस बात में शक है कि यहाँ चालीस से आशय चालीस दिन हैं या महीने या फिर साल? लेकिन एक बात ध्यान में रहे कि यहाँ उल्लिखित संख्या से मुराद दिन, महीना या साल बताना नहीं है, बल्कि मुराद मनाही में ताकीद और पैदा करना है।
صحيح البخاري (1/ 108) (510). صحيح مسلم (1/ 363) (507). تيسير العلام، للبسام تيسير العلام (ص184). تنبيه الأفهام، لابن عثيمين (2/ 239). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 154).