सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

जब तुममें से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। यदि वह न रुके, तो उससे भिड़ जाए, इसलिए कि वह शैतान है।

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه مرفوعًا: «إذا صلَّى أَحَدُكُم إلى شيء يَسْتُرُهُ مِنَ النَّاس، فأَرَاد أحَد أن يَجْتَازَ بين يديه، فَلْيَدْفَعْهُ، فإن أبى فَلْيُقَاتِلْهُ؛ فإنما هو شيطان». وفي رواية: «إذا كان أَحَدُكُمْ يُصَلِّي فلا يَدَعْ أحدا يمُرُّ بين يديه، فإنْ أبى فَلْيُقَاتِلْهُ؛ فإن معه القَرِينَ».
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जब तुममें से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। यदि वह न रुके, तो उससे भिड़ जाए, इसलिए कि वह शैतान है।" एक दूसरी रिवायत में इस प्रकार हैंः "जब तुममें से कोई नमाज़ पढ़ रहा हो, तो अपने सामने से किसी को न गुज़रने दे। यदि वह न रुके, तो उससे लड़ाई करे; क्योंकि उसके साग उसका साथी (शैतान) है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जब किसी नमाज़ पढ़ने वाले ने नमाज़ शुरू करने से पहले अपने सामने सुतरा रख लिया कि वह लोगों के लिए आड़ बन जाए और कोई उसके सामने से गुज़रकर उसकी नमाज़ में कोई कमी पैदा न करे और फिर वह अपने रब से वार्तालाप करने लगा, तो ऐसे स्थिति में यदि कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो वह उसे आसानी से रोकने की कोशिश करे। लेकिन यदि वह आसानी से न रुके, तो वह अत्याचारी है और उसके अत्याचार को रोकने के लिए हाथ का प्रयोग करने तथा उससे लड़ने की अनुमति है। क्योंकि उसका यह काम शैतान का काम है, जो लोगों की इबादतों को नष्ट करने और उनकी नमाज़ में भ्रांति उत्पन्न करने की कोशिश में रहता है।

हवाला

صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة 1423هـ، 2003م. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، عبد الله صالح الفوزان، دار ابن الجوزي، الطبعة: الأولى 1428هـ، 1432هـ. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، اعتنى بإخراجه عبدالسلام بن عبد الله السليمان، الرسالة، بيروت، الطبعة: الأولى 1427هـ، 2006م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
नमाज़ की सुन्नतें

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com