सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

वज़ू की सुन्नतें तथा आदाब

12 हदीसें

जब तुम वस्त्र धारण करो अथवा वज़ू करो तो दाहिने ओर से प्रारंभ करो

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعًا: «إِذَا لَبِسْتُم، وَإِذَا تَوَضَّأتُم، فَابْدَأُوا بَأَيَامِنُكُم».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जब तुम वस्त्र धारण करो अथवा वज़ू करो, तो दाहिने ओर से प्रारंभ करो।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- की यह हदीस सभी अच्छे कार्यों को दाएँ हाथ से करने पर ज़ोर देती है। उनका वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "जब तुम वस्त्रधारण करो" यानी जब कपड़ा पहनने का इरादा करो। "तथा जब तुम वज़ू करो" यानी जब वज़ू करने का इरादा करो। "तो दाहिने ओर से प्रारंभ करो।" इस हदीस में आया हुआ शब्द 'أيامن' बहुवचन है 'أيمن' का। यह बाएँ के विपरीत को कहते हैं। इस हदीस का आशय यह है कि कुर्ता आदि पहनते समय दाएँ हाथ को पहले घुसाया जाएगा और वज़ू करते समय दाएँ हाथ एवं पाँव को बाएँ हाथ एवं पाँव से पहले धोया जाएगा। याद रहे कि वज़ू के कुछ अंग ऐसे भी हैं, जिनमें दाएँ-बाएँ का ख़याल रखना मुसतहब नहीं है। वह हैं, दोनों कान, दोनों हथेलियाँ और दोनों गाल। इन्हें एक साथ पाक किया जाएगा। यदि ऐसा संभव न हो, मसलन किसी का एक हाथ कटा हुआ हो, तो वह दाएँ अंग से आरंभ करेगा।

हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423هـ. جامع الترمذي، تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر وآخرون، ط2، شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي ، مصر، 1395هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. سنن أبي داود ،تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، المكتبة العصرية، بيروت. سنن ابن ماجه، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء الكتب العربية، فيصل عيسى البابي الحلبي. الشرح الممتع على زاد المستقنع، لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، ط1، دار ابن الجوزي، 1422 - 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط و عادل مرشد، وآخرون، تحت إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، ط1، مؤسسة الرسالة، 1421هـ. مشكاة المصابيح للتبريزي، تحقيق: محمد ناصر الدين الألباني، ط3، المكتب الإسلامي، بيروت، 1985م. المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج، للنووي، ط2، دار إحياء التراث العربي - بيروت، 1392هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए मिसवाक और वुज़ू का पानी तैयार रखते थे। फिर अल्लाह जितनी रात को चाहता आपको जगाता। तो आप उठते, वज़ू करते और नमाज़ पढ़ते थे।

عن عائشة رضي الله عنها ، قالت: كُنَّا نُعِدُّ لرسول الله صلى الله عليه وسلم سِوَاكَهُ وَطَهُورَهُ، فَيَبْعَثُهُ الله ما شاء أن يَبْعَثَهُ من الليل، فَيَتَسَوَّكُ، ويتوضَّأ ويُصلي.
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हुा- कहती हैं कि हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए मिसवाक और वज़ू का पानी तैयार रखते थे। फिर अल्लाह जितनी रात को चाहता आपको जगाता। तो आप उठते, वज़ू करते और नमाज़ पढ़ते थे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- कहती हैं कि वह अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के लिए मिसवाक एवं वज़ू का पानी तैयार रखतीं, फिर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह रात को जब चाहता, आपको जगा देता। जब जाग जाते, तो सबसे पहले अपने दाँतों को मिसवाक से रगड़-रगड़ कर साफ़ करते, ताकि सामान्यतः नींद के कारण पैदा होने वाली दुर्गंध दूर हो जाए। फिर नमाज़ के लिए वज़ू करते और उसके बाद रात की नमाज़ पढ़ते।

हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الدمام، الطبعة: الأولى 1415هـ. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، الطبعة: الأولى 1428هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423 هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الرابعة عشر 1407هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में हमें इस तरह का खाना कम ही मिला करता था। जब हमें इस तरह का खाना मिलता, तो हमारे पास रूमाल नहीं होते, अतः अपनी हथेलियों, बाज़ुओं और क़दमों में पोंछ लेते और फिर वज़ू किए बिना ही नमाज़ पढ़ लेते।

عن سعيد بن الحارث: أنه سأل جابرا رضي الله عنه عن الوضوء مما مَسَّتِ النارُ، فقال: لا، قد كنا زمن النبي - صلى الله عليه وسلم - لا نجد مثل ذلك الطعام إلا قليلا، فإذا نحن وجدناه، لم يكن لنا مَنَادِيلُ إلا أَكُفَّنَا، وسَوَاعِدَنَا، وأَقْدَامَنَا، ثم نصلي ولا نتوضأ.
सईद बिन हारिस कहते हैं कि उन्होंने जाबिर (रज़ियल्लाहु अंहु) से आग से पकी हुई वस्तु खाने के बाद वज़ू के बारे में पूछा, तो फ़रमायाः इसकी ज़रूरत नहीं है। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में हमें इस तरह का खाना कम ही मिला करता था। जब हमें इस तरह का खाना मिलता, तो हमारे पास रूमाल नहीं होते, अतः अपनी हथेलियों, बाज़ुओं और क़दमों में पोंछ लेते और फिर वज़ू किए बिना ही नमाज़ पढ़ लेते।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

.دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لابن علان، نشر دار الكتاب العربي. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407ه 1987م. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यदि मेरी उम्मत पर कठिन न होता, तो मैं उन्हें आदेश देता कि प्रत्येक वज़ू के समय मिसवाक कर लिया करें।

عن أبي هريرة رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «لَوْلا أنْ أَشُقِّ على أُمَّتِي لَأَمَرْتُهم بالسِّواكِ مع كلِّ وُضُوء».
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “यदि मेरी उम्मत पर कठिन न होता, तो मैं उन्हें आदेश देता कि प्रत्येक वज़ू के समय मिसवाक कर लिया करें।”
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे मालिक ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि यदि आपको इस बात का भय न होता कि आपकी उम्मत एवं अनुसरणकार्यों को कष्ट एवं परेशानी का सामना पड़ेगा, तो उन्हें हर वज़ू के समय आवश्यक रूप से मिस्वाक करने का आदेश देते। आपने अपनी उम्मत पर दया करते हुए उनपर इसे फ़र्ज़ क़रार नहीं दिया, बल्कि सुन्नत रखा, जिसका पालन करने वाले को पुण्य मिलता है और छोड़ने वाले को दंड नहीं दी जाती है।

हवाला

موطأ الإمام مالك, مالك بن أنس بن مالك الأصبحي المدني, صححه ورقمه وخرج أحاديثه وعلق عليه: محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي، بيروت – لبنان, عام النشر: 1406 هـ - 1985 م. مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421هـ - 2001م. إرواء الغليل في تخريج أحاديث منار السبيل, محمد ناصر الدين الألباني, إشراف: زهير الشاويش, المكتب الإسلامي – بيروت, الطبعة: الثانية 1405 هـ - 1985م. توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن عبد الرحمن بن صالح البسام، الناشر: مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427 ه - 2006 م. فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام لمحمد بن صالح بن محمد العثيمين، تحقيق: صبحي بن محمد رمضان، وأُم إسراء بنت عرفة، ط1، المكتبة الإسلامية، مصر، 1427ه. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن صالح الفوزان، الناشر: دار ابن الجوزي الطبعة: الأولى، 1427 هـ - 1431 هـ. بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية. الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

वज़ू सम्पूर्ण रूप से करो और उंग्लियों के बीच ख़िलाल करो तथा यदि रोज़े से न हो तो नाक में पानी डालकर अच्छी तरह से नाक झाड़ो।

عَنْ لَقِيطِ بْنِ صَبِرَةَ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: كُنْتُ وَافِدَ بَنِي الْمُنْتَفِقِ -أَوْ فِي وَفْدِ بَنِي الْمُنْتَفِقِ- إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ: فَلَمَّا قَدِمْنَا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَلَمْ نُصَادِفْهُ فِي مَنْزِلِهِ، وَصَادَفْنَا عَائِشَةَ أُمَّ الْمُؤْمِنِينَ، قَالَ: فَأَمَرَتْ لَنَا بِخَزِيرَةٍ، فَصُنِعَتْ لَنَا، قَالَ: وَأُتِينَا بِقِنَاعٍ -وَالْقِنَاعُ: الطَّبَقُ فِيهِ تَمْرٌ- ثُمَّ جَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَقَالَ: «هَلْ أَصَبْتُمْ شَيْئًا؟ أَوْ أُمِرَ لَكُمْ بِشَيْءٍ؟» قَالَ: قُلْنَا: نَعَمْ، يَا رَسُولَ اللَّهِ، قَالَ: فَبَيْنَا نَحْنُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جُلُوسٌ، إِذْ دَفَعَ الرَّاعِي غَنَمَهُ إِلَى الْمُرَاحِ، وَمَعَهُ سَخْلَةٌ تَيْعَرُ، فَقَالَ: «مَا وَلَّدْتَ يَا فُلَانُ؟»، قَالَ: بَهْمَةً، قَالَ: «فَاذْبَحْ لَنَا مَكَانَهَا شَاةً»، ثُمَّ قَالَ: «لَا تَحْسِبَنَّ» وَلَمْ يَقُلْ: لَا تَحْسَبَنَّ «أَنَّا مِنْ أَجْلِكَ ذَبَحْنَاهَا، لَنَا غَنَمٌ مِائَةٌ لَا نُرِيدُ أَنْ تَزِيدَ، فَإِذَا وَلَّدَ الرَّاعِي بَهْمَةً، ذَبَحْنَا مَكَانَهَا شَاةً» قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، إِنَّ لِي امْرَأَةً وَإِنَّ فِي لِسَانِهَا شَيْئًا -يَعْنِي الْبَذَاءَ- قَالَ: «فَطَلِّقْهَا إِذن»، قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ لَهَا صُحْبَةً، وَلِي مِنْهَا وَلَدٌ، قَالَ: «فَمُرْهَا» يَقُولُ: عِظْهَا، «فَإِنْ يَكُ فِيهَا خَيْرٌ فَسَتَفْعَلْ، وَلَا تَضْرِبْ ظَعِينَتَكَ كَضَرْبِكَ أُمَيَّتَكَ» فَقُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، أَخْبِرْنِي عَنِ الْوُضُوءِ، قَالَ: «أَسْبِغِ الْوُضُوءَ، وَخَلِّلْ بَيْنَ الْأَصَابِعِ، وَبَالِغْ فِي الِاسْتِنْشَاقِ إِلَّا أَنْ تَكُونَ صَائِمًا».
लक़ीत बिन सबिरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि मैं बनू मुनतफ़िक़ के प्रतिनिधि के रूप –अथवा बनू मुनतफ़िक़ के प्रतिनिधिंडल में शामिल होकर- अल्लाह रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया था। उनका बयान है कि जब हम अल्लाह के रसलू -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के यहाँ आए, तो हमने आपको घर में नहीं पाया। हमें मोमिनों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- मिलीं। वह कहते हैं कि उन्होंने हमारे लिए ख़ज़ीरा नामी खाने की वस्तु बनाने का आदेश दिया, जो बनाया गया। हमारे सामने एक थाली खजूर भी लाई गई। (क़ुतैबा ने ख़जूर की थाली लाने की बात नहीं कही है।) फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- का आगमन हुआ, तो फ़रमाया : “क्या तुम्हें कुछ मिला है? -अथवा तुम्हारे लिए किसी चीज़ का आदेश दिया गया है?-” हमने कहा : हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल! वह कहते हैं : हम लोग अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ बैठे ही हुए थे कि एक चरवाहा अपनी बकरियों को लेकर बाड़ा की तरफ़ निकला। उसके साथ एक छोटा बच्चा भी था, जो मिमिया रहा था। आपने उससे पूछा : “ऐ अमुक, क्या पैदा हुआ है?” उसने उत्तर दिया : मादा। आपने कहा : उसकी जगह पर हमारे लिए एक बकरी ज़बह कर दो।” फिर फ़रमाया : “तुम यह न समझो कि हमने तुम्हारे कारण ज़बह किया है, बल्कि हमारे पास सौ बकिरयाँ हैं और हम नहीं चाहते कि उससे ज़्यादा हों, इसलिए जब कोई बच्चा पैदा होता है, तो हम उसकी जगह एक बकरी ज़बह कर देते हैं। वह कहते हैं कि मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मेरी पत्नी बदज़ुबान है। तो आपने कहा : “उसे तलाक़ दे दो।” वहते हैं कि मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, वह मेरे पास बहुत दिनों से है और उससे मुझे बच्चे भी हैं? तो फ़रमाया : “उसे समझाओ। यदि उसमें कोई भलाई है, तो समझाने से सुधर जाएगी। देखा, अपनी पत्नी को उस तरह न मारना, जिस तरह दासी को मारते हो।” मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे वज़ू के बारे में बताईए। तो फ़रमाया : “वज़ू सम्पूर्ण रूप से करो और उंग्लियों के बीच ख़िलाल करो तथा यदि रोज़े से न हो तो नाक में पानी डालकर अच्छी तरह से नाक झाड़ो।”
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

سنن أبي داود (1/ 99) (142). سنن الترمذي (2/ 146) (788). سنن النسائي (1/ 66) (87). سنن ابن ماجه (1/ 262) (407). توضيح الأحكام من بلوغ المرام، للبسام (1/ 217). سُبل السلام، للصنعاني (1/ 66 ). فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (1/ 183). منحة العلَّام، لعبد الله الفوزان (1/ 174).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

मैंने अम्मार बिन यासिर को दाढ़ी का ख़िलाल करते देखा तो उनसे कहा गया, अथवा यह कहा कि मैंने उनसे कहा : क्या आप दाढ़ी का खिलाल करते हैं? उन्होंने कहा : “क्यों न करूँ? बेशक मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को अपनी दाढ़ी का ख़िलाल करते हुए देखा है।”

عن حسان بن بلال قال: رأيت عمار بن ياسر رضي الله عنه توضأ فخَلَّلَ لِحْيَتَهُ، فقيل له: -أو قال: فقلت له:- أَتُخَلِّلُ لِحْيَتَك؟ قال: «وما يمنعُني؟ ولقد رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم يُخَلِّلُ لِحْيَتَه».
हस्सान बिन बिलाल कहते हैं : मैंने अम्मार बिन यासिर को दाढ़ी का ख़िलाल करते देखा तो उनसे कहा गया, अथवा यह कहा कि मैंने उनसे कहा : क्या आप दाढ़ी का खिलाल करते हैं? उन्होंने कहा : “क्यों न करूँ? बेशक मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को अपनी दाढ़ी का ख़िलाल करते हुए देखा है।”
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

سنن الترمذي، محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر، ومحمد فؤاد عبد الباقي، وإبراهيم عطوة عوض، شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، مصر، الطبعة: الثانية: 1395هـ، 1975م. سنن ابن ماجه، ابن ماجه محمد بن يزيد القزويني، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء الكتب العربية، فيصل عيسى البابي الحلبي. النهاية في غريب الحديث والأثر، مجد الدين أبو السعادات المبارك بن الأثير، تحقيق: طاهر أحمد الزاوى، محمود محمد الطناحي، نشر: المكتبة العلمية، بيروت، الطبعة: 1399هـ، 1979م. الشرح الممتع على زاد المستقنع، محمد بن صالح العثيمين، دار ابن الجوزي، الطبعة: الأولى 1422، 1428هـ. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، اعتنى بإخراجه عبدالسلام بن عبد الله السليمان، الرسالة، بيروت، الطبعة: الأولى 1427هـ، 2006م. توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، الطبعة الخامِسَة، 1423هـ، 2003 م. صحيح وضعيف سنن الترمذي، محمد ناصر الدين الألباني، مصدر الكتاب: برنامج منظومة التحقيقات الحديثية -المجاني- من إنتاج مركز نور الإسلام لأبحاث القرآن والسنة بالإسكندرية.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जिसका वज़ू नहीं, उसकी नमाज़ नहीं और जिसने वज़ू करने से पहले अल्लाह का नाम नहीं लिया, उसका वज़ू नहीं।

عن أبي هريرة، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «لا صلاةَ لِمن لا وُضوءَ له، ولا وُضوءَ لِمن لم يَذْكر اسم الله تعالى عليه».
अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “जिसका वज़ू नहीं, उसकी नमाज़ नहीं और जिसने वज़ू करने से पहले अल्लाह का नाम नहीं लिया, उसका वज़ू नहीं।”
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में अबू हुरैरा - रज़ियल्लाहु अनहु - अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम - के हवाले से बता रहे हैं कि आपने उस व्यक्ति की नमाज़ सही न होने की बात कही है, जिसने वुज़ू नहीं किया और इसी तरह उस व्यक्ति का वुज़ू सही न होने की बात कही है, जिसने वुज़ू से पहले बिस्मिल्लाह नहीं कहा। इस तरह यह हदीस इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वुज़ू करते समय अल्लाह का नाम लेना ज़रूरी है। जिसने जान-बूझकर बिस्मिल्लाह छोड़ दिया, तो उसका वुज़ू नहीं होगा। लेकिन यदि कोई वुज़ू करते समय अल्लाह का नाम लेना भूल गया या शरई आदेश से अनजान होने के कारण अल्लाह का नाम नहीं लिया, तो उसका वुज़ू सही है।

हवाला

-سنن ابن ماجه، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء الكتب العربية، فيصل عيسى البابي الحلبي. -سنن أبي داود ،تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، المكتبة العصرية، بيروت. -مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط و عادل مرشد، وآخرون، تحت إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، ط1، مؤسسة الرسالة، 1421 هـ. -إرواء الغليل في تخريج أحاديث منار السبيل لمحمد ناصر الدين الألباني، إشراف: زهير الشاويش، ط2، المكتب الإسلامي، بيروت، 1405 هـ. -توضيح الأحكام للشيخ البسام، ط5، مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، 1423ه. -تسهيل الإلمام للشيخ صالح الفوزان، بعناية: عبدالسلام السليمان، ط1، 1427ه. -شرح الشيخ ابن عثيمين على البلوغ، تحقيق صبحي رمضان وآخر، ط1، المكتبة الإسلامية، مصر، 1427ه. -عون المعبود شرح سنن أبي داود، ومعه حاشية ابن القيم: تهذيب سنن أبي داود وإيضاح علله ومشكلاته للعظيم آبادي، ط3، دار الكتب العلمية، بيروت، 1415 هـ. -منحة العلَّام للشيخ عبد الله بن صالح الفوزان، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1427ه. -فتاوى اللجنة الدائمة - المجموعة الأولى, اللجنة الدائمة للبحوث العلمية والإفتاء, جمع وترتيب: أحمد بن عبد الرزاق الدويش, الناشر: رئاسة إدارة البحوث العلمية والإفتاء - الإدارة العامة للطبع – الرياض.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

“अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक साअ से पाँच मुद तक पानी से स्नान करते और एक मुद पानी से वज़ू करते थे।”

عَنْ أَنَسٍ رضي الله عنه قَالَ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَغْسِلُ، أَوْ كَانَ يَغْتَسِلُ، بِالصَّاعِ إِلَى خَمْسَةِ أَمْدَادٍ، وَيَتَوَضَّأُ بِالْمُدِّ.
अनस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : “अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक साअ से पाँच मुद तक पानी से स्नान करते और एक मुद पानी से वज़ू करते थे।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जनाबत का स्नान एक साअ से पाँच मुद और वज़ू एक मुद पानी से कर लिया करते थे। साअ चार मुद का होता है और मुद एक मध्यम शरीर वाले इन्सान की दोनों हथेलियों भर का होता है।

फ़ायदे
  1. यह हदीस वज़ू तथा स्नान करते समय पानी बचाने और ज़रूरत से अधिक पानी खर्च करने से मना करती है, चाहे पानी उपलब्ध ही क्यों न हो।
  2. वज़ू और स्नान करते समय आवश्यकता अनुसार और कम से कम पानी का प्रयोग करना मुसतहब है, और यही अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का तरीक़ा है।
  3. इस हदीस का उद्देश्य वज़ू और स्नान की सुन्नतों तथा आदाब का ख़्याल रखते हुए, पानी के इस्तेमाल में फ़ुज़ूलखर्ची और कंजूसी किए बिना, समय और पानी की उपलब्धता एवं अनुपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, वज़ू एवं स्नान करने के कार्य संपूर्ण रूप से संपन्न कराना है।
  4. अरबी शब्द जनाबत का प्रयोग हर उस व्यक्ति के लिए होता है, जिसने वीर्य स्खलन या संभोग किया हो। जनाबत को जनाबत इसलिए कहा जाता है कि इस अवस्था में इन्सान पाक हो जाने तक नमाज़ और इबादतों से दूर रहता है।
  5. सा एक प्रसिद्ध मापक पात्र है। यहाँ मुराद सा-ए-नबवी है, जिसका वज़न उत्कृष्ट प्रकार के गेहूँ का 480 मिस्क़ाल और लीटर में तीन लीटर है।
  6. मुद एक शरई माप एकाई है। इससे मुराद एक सामान्य शरीर वाले इन्सान की दोनों हथेलियों भर चीज़ है, जब उनको पूरा फैलाकर भरा जाए। मुद एक चौथाई साअ् है, इसपर सारे फ़क़ीह एकमत हैं। इसकी मात्रा 750 मिलीलीटर होती है।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 51) (201). صحيح مسلم (1/ 258) (325). توضيح الأحكام، للبسام (1/ 250). سُبل السلام، للصنعاني (1/ 79 ). فتح ذي الجلال والإكرام، لابن عثيمين (1/ 212). منحة العلَّام، لعبد الله الفوزان (1/ 186). منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، لحمزة قاسم (1/ 272). تحقيق مقدار المد والصاع النبوي، للدكتور عبدالمحسن القاسم

यह हदीस HadeethEnc.com पर
12 में से 8
12 हदीसें
  1. जब तुम वस्त्र धारण करो अथवा वज़ू करो तो दाहिने ओर से प्रारंभ करो
  2. हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए मिसवाक और वुज़ू का पानी तैयार रखते थे। फिर अल्लाह जितनी रात को चाहता आपको जगाता। तो आप उठते, वज़ू करते और नमाज़ पढ़ते थे।
  3. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में हमें इस तरह का खाना कम ही मिला करता था। जब हमें इस तरह का खाना मिलता, तो हमारे पास रूमाल नहीं होते, अतः अपनी हथेलियों, बाज़ुओं और क़दमों में पोंछ लेते और फिर वज़ू किए बिना ही नमाज़ पढ़ लेते।
  4. यदि मेरी उम्मत पर कठिन न होता, तो मैं उन्हें आदेश देता कि प्रत्येक वज़ू के समय मिसवाक कर लिया करें।
  5. वज़ू सम्पूर्ण रूप से करो और उंग्लियों के बीच ख़िलाल करो तथा यदि रोज़े से न हो तो नाक में पानी डालकर अच्छी तरह से नाक झाड़ो।
  6. मैंने अम्मार बिन यासिर को दाढ़ी का ख़िलाल करते देखा तो उनसे कहा गया, अथवा यह कहा कि मैंने उनसे कहा : क्या आप दाढ़ी का खिलाल करते हैं? उन्होंने कहा : “क्यों न करूँ? बेशक मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को अपनी दाढ़ी का ख़िलाल करते हुए देखा है।”
  7. जिसका वज़ू नहीं, उसकी नमाज़ नहीं और जिसने वज़ू करने से पहले अल्लाह का नाम नहीं लिया, उसका वज़ू नहीं।
  8. “अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक साअ से पाँच मुद तक पानी से स्नान करते और एक मुद पानी से वज़ू करते थे।”
  9. “जो मुसलमान अच्छी तरह वज़ू करता है, फिर खड़े होकर मन तथा तन के साथ दो रकात नमाज़ पढ़ता है, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो जाती है।”
  10. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने (अंगों को) एक-एक बार (धोकर) वज़ू किया।
  11. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने वज़ू के अंगों को दो-दो बार धोया।
  12. अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक साअ पानी से जनाबत का स्नान और एक मुद्द पानी से वज़ू कर लिया करते थे।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com