عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ رضي الله عنه قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللهِ مَا النَّجَاةُ؟ قَالَ: «امْلِكْ عَلَيْكَ لِسَانَكَ، وَلْيَسَعْكَ بَيْتُكَ، وَابْكِ عَلَى خَطِيئَتِكَ».
उक़बा बिन आमिर जुहनी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो और अपने गुनाहों पर रोया करो।"
इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
उक़बा बिन आमिर रज़ियल्लाहु अनहु ने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा कि वह कौन-कौन सी चीज़ें हैैं, जो एक मोमिन के लिए दुनिया एवं आख़िरत में मुक्ति का सबब बनती हैं?
चुनांचे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनसे कहा कि तीन बातों का ख़्याल रखा करो :
1- सभी प्रकार की बुरी एवं व्यर्थ बातों से अपनी ज़बान की रक्षा करो और केवल अच्छी बातों के लिए ही मुँह खोला करो।
2- अपने घर में रहा करो ताकि तनहाई में अल्लाह की इबादत कर सको, उसकी बंदगी में लगे रहो और फ़ितनों से अलग रहा करो।
3- अपने गुनाहों पर रोया करो, शर्मिंदा रहो और अल्लाह के सामने तौबा करो।
फ़ायदे
- सहाबा की भरपूर कोशिश रहा करती थी कि मुक्ति के रास्ते जान सकें।
- दुनिया व आख़िरत में मुक्ति दिलाने वाली चीज़ों का बयान।
- जब दूसरे का भला करना संभव न हो या लोगों से मेल-जोल रखने की अवस्था में अपने दीन एवं खुद का नुक़सान होने का भय हो तो इन्सान को स्वयं को अपने आप तक सीमित कर लेना चाहिए।
- घर को लाज़िम पकड़ने की ओर इशारा, खासकर फ़ितने के समय, क्योंकि यह धर्म को बचाने का एक तरीका है।
हवाला
سنن الترمذي (4/ 208) (2406).
مسند أحمد (28/ 654) (17452).
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (3/ 15).
نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 1039).
مرقاة المفاتيح، لعلي القاري (7/ 3039).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن ابن مسعود رضي الله عنه مرفوعاً: أن رجلاً أصاب من امرأةٍ قُبْلَةً، فأتى النبي صلى الله عليه وسلم فأخبره، فأنزل الله تعالى : (وأقم الصلاة طَرَفَيِ النَّهَار وزُلَفًا مِنَ اللَّيلِ إِنَّ الحَسَنَاتِ يُذْهِبنَ السَّيِئَات) [هود: 114] فقال الرجل: ألي هذا يا رسول الله؟ قال: «لِجَمِيعِ أُمَّتِي كُلِّهِم».
अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि एक व्यक्ति ने एक स्त्री को बोसा देकर अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को आकर बताया, तो अल्लाह तआला ने यह आयत उतारीः "وأقم الصلاة طَرَفَيِ النَّهَار وزُلَفًا مِنَ اللَّيلِ إِنَّ الحَسَنَاتِ يُذْهِبنَ السَّيِئَات" (दिन के दोनों किनारों और रात के कुछ भागों में नमाज़ कायम करो। निश्चय ही नेकियाँ गुनाहों को मिटा देती हैं।) (सूरा हूदः 114) उस व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, क्या यह मेरे साथ खास है? आपने कहाः "नहीं, बल्कि मेरी उम्मत के तमाम लोगों के लिए है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ.
- صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب، الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ.
- دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين؛ لمحمد بن علان الشافعي، تحقيق خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، الطبعة الرابعة، 1425ه.
- بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى1418ه.
- نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ.
- كنوز رياض الصالحين،لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا، الطبعة الأولى، 1430ه.
- شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.
- منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري تأليف حمزة محمد قاسم مكتبة دار البيان، دمشق، الجمهورية العربية السورية، مكتبة المؤيد، الطائف، المملكة العربية السعودية، 1410 هـ - 1990 م.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أنس رضي الله عنه مرفوعاً: جاء رجل إلى النبي صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسول الله، أصَبْتُ حدًّا، فَأَقِمْه عليَّ، وحضرت الصلاة، فصلى مع رسول الله صلى الله عليه وسلم فلمَّا قضى الصلاة، قال: يا رسول الله، إني أصَبْتُ حَدًّا فأقم فيَّ كتاب الله. قال: «هل حَضَرْتَ مَعَنَا الصلاة»؟ قال: نعم. قال: «قد غُفِر لك».
अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि एक व्यक्ति अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर बोलाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं हद (धार्मिक दंड) का अधिकारी हो गया हूँ। अतः, मुझपर हद जारी कर दें। इसी बीच नमाज़ का समय आ गया और वह अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ नमाज़ में शामिल हो गया। जब नमाज़ पूरी हो गई, तो फिर बोला कि ऐ अल्लाह के रसूल, मैं हद का हक़दार हो गया हूँ, अतः मुझपर अल्लाह की किताब का निर्णय लागू कर दें। इसपर आपने कहाः "क्या तू हमारे साथ नमाज़ में शरीक था?" उसने कहाः जी हाँ! तो आपने कहाः "जा, तुझे क्षमा कर दिया गया है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ.
- صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ.
- كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه.
- شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.
- جامع العلوم والحكم في شرح خمسين حديثاً من جوامع الكلم عبد الرحمن بن بن رجب بن الحسن الحنبلي - تحقيق: الدكتور محمد الأحمدي أبو النور دار السلام للطباعة والنشر والتوزيع الطبعة: الثانية، 1424 هـ - 2004 م.
- بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه.
- نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه أن نبي الله صلى الله عليه وسلم قال: «كان فيمن كان قبلكم رجل قتل تسعة وتسعين نفسًا، فسأل عن أعلم أهل الأرض، فَدُلَّ على راهب، فأتاه فقال: إنه قتل تسعة وتسعين نفسا فهل له من توبة؟ فقال: لا، فقتله فكمَّل به مئة، ثم سأل عن أعلم أهل الأرض، فَدُلَّ على رجل عالم، فقال: إنه قتل مائة نفس فهل له من توبة؟ فقال: نعم، ومَنْ يَحُولُ بينه وبين التوبة؟ انْطَلِقْ إلى أرض كذا وكذا فإن بها أناسا يعبدون الله تعالى فاعبد الله معهم، ولا ترجع إلى أرضك فإنها أرض سوء، فانطلق حتى إذا نَصَفَ الطريقَ أتاه الموت، فاختصمت فيه ملائكة الرحمة وملائكة العذاب، فقالت ملائكة الرحمة: جاء تائبا، مُقْبِلا بقلبه إلى الله تعالى ، وقالت ملائكة العذاب: إنه لم يعمل خيرا قط، فأتاهم ملك في صورة آدمي فجعلوه بينهم -أي حكمًا- فقال: قِيسُوا ما بين الأرضين فإلى أَيَّتِهِمَا كان أدنى فهو له، فقاسوا فوجدوه أدنى إلى الأرض التي أراد، فقبضته ملائكة الرحمة».
وفي رواية في الصحيح: «فكان إلى القرية الصالحة أقرب بشبر فجعل من أهلها».
وفي رواية في الصحيح: «فأوحى الله تعالى إلى هذه أن تَبَاعَدِي، وإلى هذه أن تَقَرَّبِي، وقال: قيسوا ما بينهما، فوجدوه إلى هذه أقرب بشبر فغُفِرَ له».
وفي رواية: «فَنَأَى بصدره نحوها».
अबू सईद खुदरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः तुमसे पहले के लोगों में एक व्यक्ति था, जिसने निन्यानवे लोगों का वध किया था। उसने लोगों से धरती के सबसे बड़े ज्ञानी का पता लगाया तो उसे एक सन्यासी के बारे में बताया गया। वह उसके पास जाकर बोला कि उसने सौ आदमियों का वध किया है। क्या अब उसकी तौबा क़बूल हो सकती है? उसने कहाः नहीं! यह सुन उसने सन्यासी को भी मार कर सौ की गिनती पूरी कर ली। फिर धरती के सबसे बड़े ज्ञानी के बारे में पूछा तो एक धार्मिक ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के बारे में बताया गया। वह उसके पास गया और बोला कि उसने सौ लोगों को मार डाला है। ऐसे में, क्या उसकी तौबा क़बूल हो सकती है? उसने कहाः अवश्य, भला उसके और तौबा के बीच कौन-सी वस्तु दीवार बन सकती है? अमुक स्थान पर चले जाओ। वहाँ अल्लाह की इबादत करने वाले बहुत से लोग रहते हैं। उनके साथ अल्लाह की इबादत करते रहना और कभी अपने देश न आना। यह बहुत बुरा स्थान है। अतः, वह चल पड़ा। यहाँ तक कि जब आधे रास्ते तक पहुँचा तो उसकी मौत आ गई। अब, उसके बारे में रहमत के फ़रिश्ते और अज़ाब के फ़रिश्ते आपस में बहस करने लगे। रहमत के फ़रिश्तों का कहना थाः यह तौबा करके पूरी निष्ठा के साथ महान अल्लाह की ओर लौट चुका था। जबकि अज़ाब के फ़रिश्तों का कहना थाः उसने कभी कोई सत्कर्म नहीं किया है। ऐसे में, उनके पास इंसान के भेस में एक फ़रिश्ता आया, जिसे उन्होंने अपना निर्णायक मान लिया। उसने कहाः दोनों तरफ़ की ज़मीनों की दूरी नापो, वह जिधर से अधिक निकट होगा, उधर वालों में से माना जाएगा। फ़रिश्तों ने नापकर पाया कि वह जिधर जा रहा था, उधर से ही ज़्यादा निकट था। अतः, रहमत के फ़रिश्तों ने उसके प्राण निकाले।
तथा सहीह की एक रिवायत में हैः वह नेक लोगों की बस्ती से एक बित्ता निकट था, अतः उसे उन लोगों में शामिल कर दिया गया।
तथा सहीह की एक अन्य रिवायत में हैः महान अल्लाह ने धरती के इस भाग को आदेश दिया कि फैल जाओ और उस भाग को आदेश दिया कि सिमट जाओ। तथा कहा कि दोनों भागों की दूरी नापो। फिर ऐसा हुआ कि उसे इस भाग से निकट पाया गया और इस तरह क्षमा कर दिया गया।
तथा एक और रिवायत में हैः वह अपने सीने के सहारे बुरे लोगों की बस्ती से अच्छे लोगों की बस्ती की ओर थोड़ा सा सरक गया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
-نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م.
-شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426هـ.
-كنوز رياض الصالحين، نشر: دار كنوز إشبيليا، الطبعة: الأولى، 1430هـ - 2009م.
-بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي.
-المعجم الوسيط، نشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت – لبنان، الطبعة: الثانية.
-صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ.
-صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «للَّهُ أَفْرَحُ بِتَوْبَةِ عَبْدِهِ مِنْ أَحَدِكُمْ، سَقَطَ عَلَى بَعِيرِهِ، وَقَدْ أَضَلَّهُ فِي أَرْضِ فَلاَةٍ».
وفي رواية: «لَلَّهُ أَشَدُّ فَرَحًا بِتَوْبَةِ عَبْدِهِ حِينَ يَتُوبُ إِلَيْهِ، مِنْ أَحَدِكُمْ كَانَ عَلَى رَاحِلَتِهِ بِأَرْضِ فَلَاةٍ، فَانْفَلَتَتْ مِنْهُ وَعَلَيْهَا طَعَامُهُ وَشَرَابُهُ، فَأَيِسَ مِنْهَا، فَأَتَى شَجَرَةً، فَاضْطَجَعَ فِي ظِلِّهَا، وقَدْ أَيِسَ مِنْ رَاحِلَتِهِ، فَبَيْنَا هُوَ كَذَلِكَ إِذَا هُوَ بِهَا، قَائِمَةً عِنْدَهُ، فَأَخَذَ بِخِطَامِهَا، ثُمَّ قَالَ مِنْ شِدَّةِ الْفَرَحِ: اللهُمَّ أَنْتَ عَبْدِي وَأَنَا رَبُّكَ! أَخْطَأَ مِنْ شِدَّةِ الْفَرَح».
अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्लाह अपने बंदे की तौबा से उस व्यक्ति से कहीं अधिक प्रसन्न होता है, जिसने किसी मरुस्थल में अपना ऊँट गुम करके फिर पा लिया हो।
तथा एक रिवायत में हैः अल्लाह अपने बंदे की तौबा से, जब वह उसके आगे तौबा करता है, उस आदमी से भी अधिक प्रसन्न होता है जो किसी मरुस्थल में अपनी सवारी पर हो, उसपर उसके खाने-पीने का सामान भी हो कि वह सवारी उससे छूट जाए और वह उससे निराश होकर एक पेड़ की छाया में लेट जाए। इसी निराशा की हालत में वह सवारी अचानक उसके सामने आ खड़ी हो और वह उसकी मुहार पकड़कर खुशी की शिद्दत में कह डालेः 'ऐ अल्लाह, तू मेरा बंदा है और मैं तेरा रब!' अत्यधिक प्रसन्नता के कारण इस तरह की गलती कर बैठे।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस हदीस में बयान किया है कि अल्लाह बंदे के सच्चे मन से उसकी ओर लौटते हुए उसके आदेशों का पालन करने से उससे कहीं अधिक प्रसन्न होता है, जितना तुममें से कोई अचानक अपनी खोई हुई सवारी मिल जाने से होता है, जो यात्रा के दौरान किसी बियाबान (मरुभूमि) में हो और उसके पास न पानी हो, न खाना हो और न आस-पास कोई व्यक्ति हो। फिर इस अवस्था में उसकी सवारी का ऊँट गुम हो जाए और ढूँढने के बावजूद भी न मिल सके। ऐसे में वह एक पेड़ के पास जाकर उसके नीचे सो जाए और मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे। उसे न ऊँट मिलने की आशा हो और न जीवित बच पाने की उम्मीद, क्योंकि खाने-पीने का सामान ऊँट पर ही था। इसी दयनीय अवस्था में वह अचानक देखे कि उसका ऊँट सामने खड़ा है और उसकी मुहार उस पेड़ में फँसी हुई है, जिसके नीचे वह सोया हुआ है। क्या उसकी इस खुशी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है? इस खुशी की कल्पना केवल वही कर सकता है, जो इस प्रकार की परिस्थिति से गुज़रा हो। यह बहुत बड़ी ख़ुशी है। मृत्यु के पश्चात् जीवन की खुशी। यही कारण है कि उसने ऊँट की मुहार पकड़कर कहा : "ऐ अल्लाह! तू मेरा बंदा है और मैं तेरा प्रभु!" वह दरअसल अल्लाह की प्रशंसा करना और यह कहना चाहता था कि ऐ अल्लाह! तू मेरा प्रभु है और मैं तेरा बंदा, लेकिन अशेष प्रसन्नता के कारण कुछ और कह गया।
हवाला
-نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م.
-دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لابن علان، نشر دار الكتاب العربي.
-شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426هـ.
-كنوز رياض الصالحين، نشر: دار كنوز إشبيليا، الطبعة: الأولى، 1430ه 2009م.
-تطريز رياض الصالحين، لفيصل الحريملي، نشر: دار العاصمة، الرياض، الطبعة: الأولى، 1423هـ. - 2002م.
-بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي.
-المعجم الوسيط، نشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت – لبنان، الطبعة: الثانية.
-صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ.
-صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «إن الله عز وجل يقبل تَوْبَةَ العَبْدِ ما لم يُغَرْغِرْ».
अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः निश्चय ही, अल्लाह बंदे की तौबा उस समय तक कबूल करता है, जब तक उसकी जान गले में न आ जाए।
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
तशरीह
अल्लाह बंदे की तौबा उस समय तक ग्रहण करता है, जब तक प्राण कंठ तक न पहुँच जाए। जब प्राण कंठ तक पहुँच जाता है, तो तौबा ग्रहण नहीं होती। अल्लाह तआला का फ़रमान है : "और उनकी तौबा (क्षमा याचना) स्वीकार्य नहीं, जो बुराईयाँ करते रहते हैं, यहाँ तक कि जब उनमें से किसी की मौत का समय आ जाता है, तो कहता हैः अब मैंने तौबा कर ली।" [सूरा अन-निसा, आयत संख्या : 18]
हवाला
نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م.
شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426هـ.
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي.
المعجم الوسيط، نشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت – لبنان، الطبعة الثانية.
مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى، 1421هـ - 2001م.
سنن الترمذي، نشر: شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي – مصر، الطبعة الثانية، 1395هـ - 1975م.
سنن ابن ماجه، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء الكتب العربية، فيصل عيسى البابي الحلبي.
صحيح الجامع الصغير وزياداته، للألباني، نشر: المكتب الإسلامي.
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ أَبِي مُوسَى رضي الله عنه عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِنَّ اللهَ عَزَّ وَجَلَّ يَبْسُطُ يَدَهُ بِاللَّيْلِ لِيَتُوبَ مُسِيءُ النَّهَارِ، وَيَبْسُطُ يَدَهُ بِالنَّهَارِ لِيَتُوبَ مُسِيءُ اللَّيْلِ، حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ مِنْ مَغْرِبِهَا».
अबू मूसा रज़ियल्लाहु अन्हु अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत करते हैं कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : ''महान अल्लाह रात में हाथ फैलाता है, ताकि दिन में गुनाह करने वाला तौबा कर ले और दिन में हाथ फैलाता है, ताकि रात में गुनाह करने वाला तौबा कर ले, यहाँ तक कि सूरज अपने डूबने के स्थान से निकल आए।''
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि अल्लाह बंदे की तौबा क़बूल करता है। जब बंदा दिन में गुनाह करने के बाद रात में तौबा करता है, तो अल्लाह उसकी तौबा क़बूल कर लेता है। इसी तरह जब रात में गुनाह करने के बाद दिन में तौबा करता है, तो उसकी तौबा क़बूल कर लेता है। अल्लाह बंदे के इस अमल से खुश होकर उसकी तौबा क़बूल करने के लिए अपना हाथ फैलाता है। तौबा का द्वारा उस समय तक खुला रहेगा, जब तक दुनिया की समाप्ति की एक निशानी के तौर पर सूरज पश्चिम से निकल न आए। जब सूरज पश्चिम से निकल जाएगा, तो तौबा का द्वार बंद हो जाएगा।
फ़ायदे
- बंदे की तौबा उस समय तक क़बूल होगी, जब तक तौबा का द्वार खुला रहे। याद रहे कि तौबा का द्वार पश्चिम से सूरज निकलने के बाद बंद हो जाएगा। इसी तरह तौबा क़बूल होने के लिए ज़रूरी है कि बंदा आत्मा के गले तक पहुँचने से पहले तक तौबा कर ले।
- इन्सान को गुनाह के कारण मायूस नहीं होना चाहिए। क्योंकि अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला एवं दयालु है, और तौबा का द्वार खुला हुआ है।
- तौबा की शर्तें : 1- गुनाह से खुद को दूर कर लेना। 2- उसमें संलिप्त होने पर शर्मिंदा होना। 3- इस बात का पक्का इरादा कर लेना कि वह गुनाह फिर कभी नहीं करेगा। उल्लिखित तीनों शर्तें उस समय हैं, जब गुनाह का संबंध अल्लाह के किसी अधिकार के हनन से हो। अगर गुनाह का संबंध बंदे के किसी अधिकार के हनन से हो, तो तौबा के सही होने के लिए अधिकार वाले को उसका अधिकार लौटाना या उससे क्षमा प्राप्त करना ज़रूरी है।
हवाला
صحيح مسلم (4/ 2113) (2759).
نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 35).
شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (1/ 103).
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 55).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «مَنْ تَابَ قَبْلَ أَنْ تَطْلُعَ الشَّمْسُ مِنْ مَغْرِبِهَا تَابَ اللهُ عَلَيْهِ».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिसने सूर्य के पश्चिम से उदय होने से पहले तौबा कर ली, अल्लाह उसकी तौबा को ग्रहण करेगा।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
इस हदीस से मालूम हुआ कि पवित्र एवं उच्च अल्लाह अपने पापी बंदे की तौबा उस समय तक ग्रहण करेगा, जब तक सूरज अपने अस्त होने के स्थान उदय न हो जाए। क्योंकि यही तौबा ग्रहण होने के समय का अंतिम समय है और यह क़यामत की बड़ी निशानियों में से एक है।
हवाला
-نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407هـ - 1987م.
-شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426هـ.
-المعجم الوسيط، نشر: دار إحياء التراث العربي، بيروت – لبنان، الطبعة: الثانية.
-صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
यह हदीस HadeethEnc.com परयहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com