अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा बता रहे हैं कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम माइज़ बिन मालिक असलमी पर व्यभिचार का शरई दंड लागू करने के बाद खड़े हुए, लोगों को संबोधित किया और इस दौरान फ़रमाया : अल्लाह के मना किए हुए इस जघन्न पाप तथा इस प्रकार के अन्य बुरे कार्यों से बचो। लेकिन अगर कोई इस तरह का काम कर गुज़रता है, तो उसपर दो चीज़ें अनिवार्य होंगी : 1- चूँकि अल्लाह ने पर्दा डाल रखा है, इसलिए अल्लाह के डाले हुए पर्दे में छुपा रहे और किसी को अपने गुनाह के बारे में न बताए। 2- अपने गुनाह पर जमे रहने के बजाय फ़ौरन तौबा कर ले। हाँ, अगर किसी का गुनाह हमारे सामने आ गया, तो हम अल्लाह की किताब में लिखे अनुसार उस गुनाह का दंड उसे देंगे।
- कोई गुनाह हो जाने पर उसे लोगों के सामने लाने से बचने और अल्लाह के आगे तौबा करने की प्रेरणा।
- गुनाह की सूचना जब शासक के पास पहुँच जाए, तो उसे उसका शरई दंड लागू करना पड़ेगा।
- गुनाहों से बचना और उनसे तौबा करना ज़रूरी है।
المستدرك على الصحيحين للحاكم (4/ 272) (7615). السنن الكبرى للبيهقي (8/ 572). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (8/ 435). فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (5/ 370). توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام (6/ 249). شرح الزرقاني على موطأ الإمام مالك (4/ 235).