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तशरीह के साथ हदीसें

क़िसास

11 हदीसें

एक बच्ची का सर दो पत्थरों के बीच रखकर कुचला हुआ पाया गयाः

عن أنَسُ بنُ مالك رضي الله عنه قال: «أَنَّ جَارِيَةً وُجِدَ رَأْسُهَا مَرْضُوضاً بَيْنَ حَجَرَيْنِ، فَقِيلَ من فَعَلَ هَذَا بِك: فُلانٌ، فُلانٌ؟ حَتَّى ذُكِرَ يَهُودِيٌّ، فَأَوْمَأَتْ بِرَأْسِهَا، فَأُخِذَ الْيَهُودِيُّ فَاعْترف، فَأَمَرَ النَّبِي صلى الله عليه وسلم أَنْ يُرَضَّ رَأْسَهُ بَيْنَ حَجَرَيْنِ». وَلِمُسْلِمٍ وَالنَّسَائِيَّ «أَنَّ يَهُودِيّاً قَتَلَ جَارِيَةً عَلَى أَوْضَاحٍ، فَأَقَادَهُ رَسُولُ الله».
अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि एक बच्ची का सिर दो पत्थरों के बीच रखकर कुचला हुआ पाया गया, तो उससे कहा गया कि किसने तेरे साथ ऐसा किया है? क्या अमुक ने किया है? क्या अमुक ने किया है? यहाँ तक कि जब एक यहूदी का नाम आया, तो उसने सिर से इशारा किया कि हाँ। अतः, उस यहूदी को पकड़ लिया गया और उसने जुर्म स्वीकार भी कर लिया। चुनांचे नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आदेश दिया कि उसके सिर को दो पत्थरों के बीच रखकर कुचल दिया जाए। मुस्लिम तथा नसई में है किः एक यहूदी ने एक बच्ची की (अथवा एक दासी की) हत्या चाँदी के ज़ेवरों के कारण कर दी, जो वह पहनी हुई थी। अतः अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उस से किसास लेने का आदेश दिया)।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में एक बच्ची मिली, जिस्का सर दो पथ्तरों के बीच कुचल दिया गया था, किन्तु अभी सांसें बाकी थीं, तो लोगों ने उस से हत्यारे के बारे पूछा और जो हत्यारा समझे जा रहे थे, उनका नाम लेने लगे यहाँ तक कि एक यहूदी का नाम आया, तो उस ने सर से इशारा किया कि हाँ, यही। अतः यहूदी को पकड़ लिया गया और उसने जुर्म स्वीकार कर लिया कि चाँदी के ज़ेवर के कारण उसे कतल किया है। नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आदेश दिया कि उस के साथ भी वही किया जाए जो उसने किया है, चुनांचे उसका सर भी दो पत्थरों के बीच कुचल दिया गया।

हवाला

- صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. - صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423 هـ - عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ تأسيس الأحكام للنجمي، ط2، دار علماء السلف، 1414ه - الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381ه - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ.

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क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा।

عَنْ عَبْدِ اللهِ بنِ مَسْعُودٍ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَوَّلُ مَا يُقْضَى بَيْنَ النَّاسِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِي الدِّمَاءِ».
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि क़यामत के दिन लोगों के एक-दूसरे पर अत्याचार करने से संबंधित जिस चीज़ के बारे में सबसे पहले निर्णय लिया जाएगा, वह रक्त का विषय है। जैसे क़त्ल करना और ज़ख़्मी करना।

फ़ायदे
  1. रक्त के विषय का महत्व। क्योंकि आरंभ महत्वपूर्ण चीज़ों से किया जाता है।
  2. पाप उनके द्वारा हुई हानि और बिगाड़ की महानता के अनुसार बड़े हो जाते हैं। और यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि किसी बेगुनाह इन्सान की हत्या करना एक बहुत बड़ी हानि और बिगाड़ है। और इससे बड़ा बिगाड़ अल्लाह के प्रति अविश्वास और उसका साझी ठहराने के सिवा और कुछ नहीं है।
हवाला

صحيح البخاري (9/ 2) (6864). صحيح مسلم (3/ 1304) (1678). خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، لفيصل آل مبارك (ص319). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص640). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (2/ 103).

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यदि कोई व्यक्ति तुम्हारी अनुमति के बिना तुम्हें झाँके और तुम कंकड़ मारकर उसकी आँख फोड़ दो, तो तुम्हें कोई गुनाह न होगा

عن أبي هُريرة -رضي اللهُ عنه- مرفوعًا: «لو أن رجلا -أو قال: امْرَأً- اطَّلَعَ عليك بغير إِذْنِكَ؛ فَحَذَفْتَهُ بحَصَاةٍ، فَفَقَأْتَ عينه: ما كان عليك جُنَاحٌ».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से मरफ़ूअन वर्णित है कि यदि कोई व्यक्ति तुम्हारी अनुमति के बिना तुम्हें झाँके और तुम कंकड़ मारकर उसकी आँख फोड़ दो, तो तुम्हें कोई गुनाह न होगा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बताया है कि यदि कोई इनसान किसी को उसकी अनुमति के बिना, उसके घर के द्वार से अथवा दीवार आदि के ऊपर से झाँके और वह उसकी ओर कंकड़ फेंककर उसकी आँख फोड़ दे या किसी लोहे से उसकी आँख को ज़ख़्मी कर दे, तो इस फोड़ने तथा ज़ख़्मी करने वाले पर न गुनाह है और न प्रतिकार। क्योंकि असल क़सूर झाँकने वाले का है।

हवाला

1- صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. 2- صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. 3- تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ. 4- تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار علماء السلف، الطبعة: الثانية 1414هـ.

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कोई मुसलमान, जो इस बात की गवाही देता हो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (उपास्य) नहीं और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के रसूल हैं, उसका ख़ून केवल उसी समय हलाल होगा जब वह इन तीन लोगों में से कोई एक हो

عن عائشة رضي الله عنها قالت: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : "لا يَحِلّ دمُ امرئ مسلم، يشهد أن لا إله إلا الله، وأن محمدًا رسول الله، إلا بإحدى ثلاث: رجل زَنَى بَعْدَ إِحْصَان، فإنه يُرْجَم، ورجل خرج مُحاربًا لله ورسوله، فإنه يُقَتُل، أو يُصلَّبُ، أو يُنفى من الأرض، أو يَقتلَ نفسًا، فيُقتلُ بها".
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “कोई मुसलमान, जो इस बात की गवाही देता हो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (उपास्य) नहीं और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के रसूल हैं, उसका ख़ून केवल उसी समय हलाल होगा जब वह इन तीन लोगों में से कोई एक हो : ऐसा व्यक्ति जो विवाह के पश्चात व्यभिचार करे, तो उसे संगसार किया जाएगा; ऐसा व्यक्ति जो अल्लाह तथा उसके रसूल से लड़ने के लिए निकले (अर्थात लोगों को रास्तों पर लूटे) तो उसे कत्ल किया जाएग अथवा सूली पर चढ़ाया जाएगा या फिर तड़ीपार (मुल्क बदर) कर दिया जाएगा और ऐसा व्यक्ति जो किसी को कत्ल कर दे, तो उसे भी कत्ल किया जाएगा।”
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

यह हदीस इस बात का प्रमाण है कि ऐसे मुसलमानों का रक्तपात हराम है, जो गवाही देते हों कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के रसूल हैं, तथा उन्होंने कोई ऐसा काम भी न किया हो, जो इन दो गवाहियों के विरुद्ध हो और इन्सान को इस्लाम के दायरे से निकाल बाहर करता हो। इसका कारण यह है कि विधि-निर्माता पाक एवं महान अल्लाह का एक लक्ष्य जान की सुरक्षा तथा उसे शांति प्रदान करना भी है। उसने अपनी शरीयत में उसकी सुरक्षा का पूरा प्रबंध भी किया है। उसने अल्लाह का साझी बनाने के बाद सबसे बड़ा गुनाह किसी ऐसे व्यक्ति के क़त्ल को ही क़रार दिया है, जिसे क़त्ल करना उसने हराम घोषित कर रखा है। यहाँ उसने ऐसे मुसलमान के क़त्ल को हराम क़रार दिया है, जो अल्लाह के सत्य पूज्य होने और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के रसूल होने की गवाही देता हो, जब तक वह निम्नांकित तीन कामों में से किसी एक काम में संलिप्त न हो जाए : पहला : वह इसके बाद भी व्यभिचार में संलिप्त हो जाए कि अल्लाह ने उसे शादीशुदा बनाया और मान्य निकाह के द्वारा उसकी शर्मगाह की सुरक्षा का प्रबंध किया। दूसरा : वह किसी निर्दोष मुसलमान का नाहक़ क़त्ल कर दे। इस प्रकार के व्यक्ति के बारे में न्याय एवं समानता की बात यह है कि उसके साथ भी वही किया जाए, जो उसने दूसरे के साथ किया है, ताकि सत्य का बोलबाला रहे और अत्याचारियों को अत्याचार से रोका जा सके। तीसरा : ऐसा व्यक्ति जो मुसलमानों के विरुद्ध अल्लाह और उसके रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से युद्ध के लिए खड़ा हो जाए तथा लोगों का रास्ता रोक कर लूट-पाट करे, भयभीत करे और फ़साद मचाए। ऐसे व्यक्ति को क़त्ल किया जाएगा, सूली दी जाएगी या फिर ताड़ीपार कर दिया जाएगा, ताकि लोग उसकी बुराई एवं अत्याचार से सुरक्षित रह सकें। इन तीन लोगों को क़त्ल किया जाएगा कि इनके क़त्ल ही में धर्म, जान एवं मान-सम्मान की सुरक्षा निहित है।

हवाला

- سنن أبي داود , تحقيق: محمد محي الدين, المكتبة العصرية. - سنن للنسائي, تحقيق: عبد الفتاح أبو غدة, مكتب المطبوعات الإسلامية الطبعة: الثانية، 1406 - صحيح الجامع الصغير وزيادة للألباني , المكتب الإسلامي - بلوغ المرام من أدلة الأحكام لابن حجر تحقيق: سمير بن أمين الزهيري, دار الفلق - ط: السابعة، 1424 هـ - توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام، مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - عون المعبود شرح سنن أبي داود، للعظيم آبادي دار الكتب العلمية - بيروت, الطبعة: الثانية، 1415 هـ - تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427 هـ 2006 م - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ - فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية - الطبعة الأولى 1427.

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मोमिनों का रक्त समान है तथा वह अपने शत्रुओं के विरुद्ध एक हाथ के समान हैं। उनके दिए गए सुरक्षा-वचन का पालन सबको करना पड़ेगा। सुन लो, किसी मोमिन को किसी काफ़िर के बदले में क़त्ल नहीं किया जाएगा और न किसी संधि के तहत रह रहे व्यक्ति को संधि काल के भीतर क़त्ल किया जाएगा। जिसने कोई अपराध किया उसका गुनाह उसी के ऊपर है। जिसने कोई अपराध किया या किसी अपराधी को पनाह दी, उसके ऊपर अल्लाह की, फ़रिश्तों की तथा तमाम लोगों की लानत है।

عن قيس بن عباد، قال: انطلقت أنا والأشتر، إلى علي رضي الله عنه فقلنا: هل عَهِدَ إليك رسول الله صلى الله عليه وسلم شيئًا لم يَعْهَدْهُ إلى الناس عامة؟ قال: لا، إلا ما في كتابي هذا، قال مسدد: قال: فأخرج كتابًا، وقال أحمد: كتابا من قِرَابِ سيفه، فإذا فيه «المؤمنون تَكَافَأُ دماؤهم، وهم يد على من سِوَاهم، ويسعى بذِّمَّتِهِم أدناهم، ألا لا يُقتل مؤمن بكافر، ولا ذُو عَهْد في عهده، من أحدث حَدَثَاً فعلى نفسه، ومن أحدث حدثا، أو آوى مُحْدِثاً فعليه لعنة الله والملائكة والناس أجمعين».
क़ैस बिन अब्बाद से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैं तथा अश्तर, अली -रज़ियल्लाहु अन्हु- के पास गए तथा हमने कहा : क्या अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आपको कोई ऐसी बात बताई है, जो आम लोगों को न बताई हो? उन्होंने फ़रमाया : नहीं, सिवाय उसके जो मेरी इस पुस्तिका में है। मुसद्दद कहते हैं कि मेरे गुरू ने बताया कि फिर उन्होंने एक पुस्तिका निकाली और अहमद कहते हैं कि फिर उन्होंने अपनी तलवार के म्यान से एक पुस्तिका निकाली, जिसमें लिखा था : “मोमिनों का रक्त समान है तथा वह अपने शत्रुओं के विरुद्ध एक हाथ के समान हैं। उनके दिए गए सुरक्षा-वचन का पालन सबको करना पड़ेगा। सुन लो, किसी मोमिन को किसी काफ़िर के बदले में क़त्ल नहीं किया जाएगा और न किसी संधि के तहत रह रहे व्यक्ति को संधि काल के भीतर क़त्ल किया जाएगा। जिसने कोई अपराध किया उसका गुनाह उसी के ऊपर है। जिसने कोई अपराध किया या किसी अपराधी को पनाह दी, उसके ऊपर अल्लाह की, फ़रिश्तों की तथा तमाम लोगों की लानत है।”
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

سنن أبي داود - سليمان بن الأشعث السِّجِسْتاني تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد: المكتبة العصرية، صيدا – بيروت. السنن الصغرى للنسائي - أحمد بن شعيب ، النسائي -تحقيق: عبد الفتاح أبو غدة-مكتب المطبوعات الإسلامية – حلب- الطبعة: الثانية، 1406 – 1986. مسند الإمام أحمد بن حنبل المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي مؤسسة الرسالة الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م. إرواء الغليل في تخريج أحاديث منار السبيل /محمد ناصر الدين الألباني - إشراف: زهير الشاويش-المكتب الإسلامي – بيروت-الطبعة: الثانية 1405 هـ - 1985م. ذخيرة العقبى في شرح المجتبى.المؤلف: محمد بن علي بن آدم بن موسى الإثيوبي الوَلَّوِي دار المعراج الدولية للنشر و دار آل بروم للنشر والتوزيع الطبعة: الأولى/ 1416 هـ - 1996 م. عمدة القاري شرح صحيح البخاري/بدر الدين العينى - دار إحياء التراث العربي – بيروت-بدون تاريخ. - تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427 هـ - 2006 م. فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية - الطبعة الأولى 1427. توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام. مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة.الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ .

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कुछ ग़रीब लोगों के एक गुलाम ने कुछ अमीर लोगों के एक गुलाम का कान काट दिया। अतः, उसके घर वाले नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहने लगे कि ऐ अल्लाह के रसूल! हम निर्धन लोग हैं। चुनांचे आपने कोई जुर्माना नहीं लगाया।

عن عمران بن حصين أن غلامًا لأناس فقراء قطع أذُنَ غُلَامٍ لأناس أغنياء، فأتى أهله النبي صلى الله عليه وسلم ، فقالوا: يا رسول الله، إنا أناس فقراء. «فلم يجعل عليه شيئًا».
इमरान बिन हुसैन -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि कुछ ग़रीब लोगों के एक गुलाम ने कुछ अमीर लोगों के एक गुलाम का कान काट दिया। अतः, उसके घर वाले नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहने लगे कि ऐ अल्लाह के रसूल! हम निर्धन लोग हैं। चुनांचे आपने कोई जुर्माना नहीं लगाया।
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
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- سنن أبي داود، سليمان بن الأشعث السِّجِسْتاني، تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد: المكتبة العصرية، صيدا – بيروت. - السنن الصغرى للنسائي، أحمد بن شعيب النسائي، تحقيق: عبد الفتاح أبو غدة، مكتب المطبوعات الإسلامية، حلب، الطبعة: الثانية، 1406 – 1986. - مسند الإمام أحمد بن حنبل، المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م. - منحة العلام في شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله الفوزان،طبعة دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى 1428. - توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله البسام، مكتبة الأسدي –مكة المكرمة –الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. - تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام: تأليف الشيخ صالح الفوزان- عناية عبد السلام السليمان - مؤسسة الرسالة الطبعة الأولى. - فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية القاهرة، تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي- الطبعة الأولى 1427. - ذخيرة العقبى في شرح المجتبى، المؤلف: محمد بن علي بن آدم الإثيوبي الوَلَّوِي، دار المعراج الدولية للنشر ودار آل بروم للنشر والتوزيع الطبعة: الأولى/ 1416 هـ - 1996 م. - نيل الأوطار، محمد بن علي الشوكاني، تحقيق: عصام الدين الصبابطي، دار الحديث، مصر- الطبعة: الأولى، 1413هـ - 1993م. - بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م.

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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आदेश दिया था कि जिसे कोई ज़ख़्म लगा हो, वह अपना ज़ख़्म ठीक होने से पहले क़िसास न ले। क़िसास तभी ले, जब उसका ज़ख़्म ठीक हो जाए।

عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، قال: قضى رسول الله صلى الله عليه وسلم في رجل طعن رجلًا بِقَرْنٍ في رِجْلِهِ، فقال: يا رسول الله، أَقِدْنِي، فقال له رسول الله صلى الله عليه وسلم : "لا تعجل حتى يبرأ جرحك"، قال: فأبى الرجل إلا أن يَسْتَقِيدَ، فَأَقَادَهُ رسول الله صلى الله عليه وسلم منه، قال: فَعَرَجَ المُستَقيدُ، وبَرأ المُستقادُ منه، فأتى المُستَقِيدُ إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم ، فقال له: يا رسول الله، عَرَجْتُ، وبَرَأَ صاحبي؟ فقال له رسول الله صلى الله عليه وسلم : "ألم آمرك ألا تستقيد، حتى يبرأ جرحك؟ فعصيتني فأبعدك الله، وبطل جرحك" ثم أمر رسول الله -صلى الله عليه وسلم، بعد الرجل الذي عرج- من كان به جرحٌ أن لا يستقيد حتى تبرأ جراحته، فإذا برئت جراحته استقاد.
अम्र बिन शुऐब से वर्णित है, वह अपने पिता से, तथा वह अपने दादा से रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक व्यक्ति के बारे में फैसला सुनाया, जिसके पाँव में किसी ने सींग से मारा था। निर्णय के दौरान उसने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ! मुझे क़िसास चाहिए। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उससे कहा : “अभी जल्दी न करो और अपना घाव ठीक होने तक प्रतीक्षा करो।” वर्णनकर्ता कहते हैं : लेकिन वह क़िसास लेने पर ही अड़ा रहा, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उसका क़िसास दिलवा दिया। बाद में ऐसा हुआ कि क़िसास लेने वाला लंगड़ा हो गया तथा जिससे क़िसास लिया गया था वह ठीक हो गया। अतः, क़िसास लेने वाला अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और आपसे बोला : ऐ अल्लाह के रसूल! मैं लंगड़ा हो गया हूँ तथा जिससे मेरा मामला था वह ठीक हो गया है। यह सुन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उससे कहा : “क्या मैंने तुमको आदेश नहीं दिया था कि अभी घाव ठीक होने तक क़िसास मत लो? तुमने मेरी बात नहीं मानी। अतः अल्लाह तुम्हें दूर करे और तुम्हारा घाव व्यर्थ जाए।” फिर इस व्यक्ति के लंगड़ा हो जाने की घटना सामने आने के बाद अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आदेश दिया कि जिसे कोई ज़ख़्म लगा हो, वह अपना ज़ख़्म ठीक होने से पहले क़िसास न ले। क़िसास तभी ले, जब उसका ज़ख़्म ठीक हो जाए।"
इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

مسند الإمام أحمد بن حنبل، المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م. منحة العلام في شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله الفوزان-طبعة دار ابن الجوزي-الطبعة الأولى 1428. توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله البسام- مكتبة الأسدي –مكة المكرمة –الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام: تأليف الشيخ صالح الفوزان- عناية عبد السلام السليمان - مؤسسة الرسالة الطبعة الأولى. فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام للشيخ ابن عثيمين- المكتبة الإسلامية القاهرة- تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي- الطبعة الأولى 1427. الفتح الرباني لترتيب مسند الإمام أحمد بن حنبل الشيباني ومعه بلوغ الأماني من أسرار الفتح الرباني، أحمد بن عبد الرحمن بن محمد البنا الساعاتي - دار إحياء التراث العربي- الطبعة: الثانية. إرواء الغليل في تخريج أحاديث منار السبيل للألباني، المكتب الإسلامي الطبعة: الثانية 1405 هـ. معجم اللغة العربية المعاصرة، المؤلف: د أحمد مختار عبد الحميد عمر بمساعدة فريق عمل, الناشر: عالم الكتب. الطبعة: الأولى، 1429 هـ.

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अल्लाह के बंदों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो यदि अल्लाह पर क़सम खा लें, तो अल्लाह उसे पूरा कर देता है।

عن أنس أن الرُّبَيِّعَ عمته كَسَرَتْ ثَنِيَّةَ جارية، فطلبوا إليها العفو فأبوا، فعرضوا الأرْشَ فأبَوْا، فأتوا رسول الله صلى الله عليه وسلم وأبوا إلا القصِاَصَ فأمر رسول الله صلى الله عليه وسلم بالقصاص، فقال أنس بن النضر: يا رسول الله أَتُكْسَرُ ثَنِيَّةُ الرُّبَيِّعِ؟ لا والذي بعثك بالحق لا تُكسر ثنيتها. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «يا أنسُ، كتابُ اللهِ القصاصُ». فرضي القومُ فَعَفَوْا، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إن من عباد الله من لو أقسم على الله لأبَرَّهُ».
अनस (रज़ियल्लाह अन्हु) से वर्णित है कि उनकी फ़ूफ़ी रुबय्ये ने एक लड़की के सामने का एक दांत तोड़ दिया। उनके घर वालों ने उससे माफी माँगनी चाही, लेकिन लड़की के घर वालों ने माफ़ करने से इनकार कर दिया। फिर उन लोगों ने तावान देना चाहा, लेकिन उन्होंने इससे भी मना कर दिया। वे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और क़िसास लेने पर तुले रहे। आखिरकार अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने क़िसास का आदेश दे दिया। यह देख अनस बिन नज़्र (रज़ियल्लाह अन्हु) ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या रुबय्ये के सामने का एक दांत तोड़ दिया जाएगा? उस ज़ात की क़सम जिसने आपको सत्य के साथ रसूल बनाकर भेजा है, उसके सामने का दांत नहीं तोड़ा जाएगा। इसपर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “ऐ अनस! अल्लाह की किताब में क़िसास (का आदेश) है।” इतना सुनने के बाद लड़की के रिश्तेदार राज़ी हो गए तथा माफ़ कर दिया। ऐसे में अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “अल्लाह के बंदों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो यदि अल्लाह पर क़सम खा लें, तो अल्लाह उसे पूरा कर देता है।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है और शब्द बुख़ारी के हैं।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري -الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. منحة العلام في شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله الفوزان-طبعة دار ابن الجوزي-الطبعة الأولى 1428. توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله البسام- مكتبة الأسدي - مكة المكرمة - الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام:تأليف الشيخ صالح الفوزان- عناية عبد السلام السليمان - مؤسسة الرسالة الطبعة الأولى فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام للشيخ ابن عثيمين- المكتبة الإسلامية القاهرة- تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي- الطبعة الأولى 1427- فتح الباري شرح صحيح البخاري- أحمد بن علي بن حجر العسقلاني الشافعي- دار المعرفة - بيروت،رقم كتبه وأبوابه وأحاديثه: محمد فؤاد عبد الباقي- قام بإخراجه وصححه وأشرف على طبعه: محب الدين الخطيب- عليه تعليقات العلامة: عبد العزيز بن عبد الله بن باز. البدرُ التمام شرح بلوغ المرام/ الحسين بن محمد بن سعيد ، المعروف بالمَغرِبي - المحقق: علي بن عبد الله الزبن: دار هجر الطبعة: الأولى- 1414 هـ - 1994 م. - بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية الطبعة: الأولى، 1435 هـ - 2014 م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
11 में से 8
11 हदीसें
  1. एक बच्ची का सर दो पत्थरों के बीच रखकर कुचला हुआ पाया गयाः
  2. क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा।
  3. यदि कोई व्यक्ति तुम्हारी अनुमति के बिना तुम्हें झाँके और तुम कंकड़ मारकर उसकी आँख फोड़ दो, तो तुम्हें कोई गुनाह न होगा
  4. कोई मुसलमान, जो इस बात की गवाही देता हो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (उपास्य) नहीं और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के रसूल हैं, उसका ख़ून केवल उसी समय हलाल होगा जब वह इन तीन लोगों में से कोई एक हो
  5. मोमिनों का रक्त समान है तथा वह अपने शत्रुओं के विरुद्ध एक हाथ के समान हैं। उनके दिए गए सुरक्षा-वचन का पालन सबको करना पड़ेगा। सुन लो, किसी मोमिन को किसी काफ़िर के बदले में क़त्ल नहीं किया जाएगा और न किसी संधि के तहत रह रहे व्यक्ति को संधि काल के भीतर क़त्ल किया जाएगा। जिसने कोई अपराध किया उसका गुनाह उसी के ऊपर है। जिसने कोई अपराध किया या किसी अपराधी को पनाह दी, उसके ऊपर अल्लाह की, फ़रिश्तों की तथा तमाम लोगों की लानत है।
  6. कुछ ग़रीब लोगों के एक गुलाम ने कुछ अमीर लोगों के एक गुलाम का कान काट दिया। अतः, उसके घर वाले नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहने लगे कि ऐ अल्लाह के रसूल! हम निर्धन लोग हैं। चुनांचे आपने कोई जुर्माना नहीं लगाया।
  7. अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आदेश दिया था कि जिसे कोई ज़ख़्म लगा हो, वह अपना ज़ख़्म ठीक होने से पहले क़िसास न ले। क़िसास तभी ले, जब उसका ज़ख़्म ठीक हो जाए।
  8. अल्लाह के बंदों में से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो यदि अल्लाह पर क़सम खा लें, तो अल्लाह उसे पूरा कर देता है।
  9. यदि इसके कत्ल में सनआ के सारे लोग संलिप्त होते, तो मैं सभी को (उसके बदले में) कत्ल कर देता।
  10. जो किसी मोमिन को जान-बूझकर क़त्ल करेगा, उसे मृतक के घर वालों के हवाले किया जाएगा। वह चाहें तो उसे क़त्ल कर दें और चाहें तो उससे दियत लें, जो इस प्रकार है : 30 ऐसी ऊँटनियाँ जो तीन साल पूरे करके चौथे साल में प्रवेश कर चुकी हों, 30 ऐसी ऊँटनियाँ जो चार साल पूरे करके पाँचवें साल में प्रवेश कर चुकी हों और 40 गाभिन ऊँटनियाँ। साथ ही दोनों पक्ष के लोग जिसपर सुलह कर लें, वह मृतक के परिजनों के लिए है।
  11. जिसने अपने दास अथवा दासी पर व्यभिचार का आरोप लगाया और वह उससे बरी है, उसे क़यामत के दिन कोड़े लगाए जाएँगे। हाँ, किंतु यदि बात वैसी ही हो, जैसी उसने कही थी (तो नहीं)।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com