عن أبي رِمْثَةَ رضي الله عنه قال: انطلقت مع أبي نحو النبي صلى الله عليه وسلم ثم إن رسول الله صلى الله عليه وسلم ، قال لأبي: «ابنك هذا؟» قال: إِي ورَبِّ الكعبة، قال: «حقا؟» قال: أشهد به، قال: فتبسم رسول الله صلى الله عليه وسلم ضاحكا من ثَبْتِ شَبَهِي في أبي، ومِنْ حَلِفِ أَبِي عَلَيَّ، ثم قال: «أما إنه لا يَجْني عليك، ولا تَجْني عليه»، وقرأ رسول الله صلى الله عليه وسلم : {ولا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أخرى} [الأنعام: 164].
अबू रिमस़ा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैं अपने पिता के साथ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास गया। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मेरे पिता से फ़रमाया : “क्या यह तुम्हारा बेटा है?” उन्होंने कहा : हाँ, काबा के रब की क़सम। आपने फ़रमाया : “क्या सच में?” उन्होंने कहा : मैं इसकी गवाही देता हूँ। वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरे पिता से मेरी समानता देखकर तथा मेरे पिता के मेरे बारे में क़सम खाने को देखकर मुस्कुराने लगे, फिर आपने फ़रमाया : “याद रहे, न तो यह तुम्हारे ऊपर जुल्म करे और न तुम इसपर जुल्म करो।” फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने यह आयत तिलावत फ़रमाई : {ولا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أخرى} (कोई व्यक्ति किसी का बोझ नहीं उठाएगा।) [सूरा अल-अनआम : 164]
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
سنن أبي داود، المحقق: محمد محيي الدين عبد الحميد، الناشر: المكتبة العصرية، صيدا – بيروت.
السنن الصغرى، للنسائي، تحقيق: عبد الفتاح أبو غدة، الناشر: مكتب المطبوعات الإسلامية، حلب، الطبعة: الثانية، 1406 – 1986.
مسند الإمام أحمد بن حنبل، المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون، إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م.
سنن الدارمي، تحقيق: حسين سليم أسد الداراني-الناشر: دار المغني للنشر والتوزيع، المملكة العربية السعودية-الطبعة: الأولى، 1412 هـ - 2000 م.
إرواء الغليل في تخريج أحاديث منار السبيل- محمد ناصر الدين الألباني، إشراف: زهير الشاويش،الناشر: المكتب الإسلامي – بيروت،الطبعة: الثانية 1405 هـ - 1985م.
فتح ذي الجلال والإكرام شرح بلوغ المرام، محمد بن صالح بن محمد العثيمين، تحقيق: صبحي بن محمد رمضان، وأُم إسراء بنت عرفة، المكتبة الإسلامية، القاهرة، الطبعة الأولى، 1427هـ.
توضيح الأحكام من بلوغ المرام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، مكتبة الأسدي، مكة، الطبعة الخامسة، 1423.
تفسير القرآن العظيم، إسماعيل بن عمر بن كثير، المحقق: سامي بن محمد السلامة، الناشر: دار طيبة للنشر والتوزيع، الطبعة: الثانية 1420هـ - 1999 م.
بلوغ المرام من أدلة الأحكام، أحمد بن علي بن حجر العسقلاني، تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري-الناشر: دار الفلق – الرياض-الطبعة: السابعة، 1424 هـ.
سبل السلام، محمد بن إسماعيل الصنعاني، الناشر: دار الحديث.
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुममें से कोई व्यक्ति अपने भाई की ओर हथियार से इशारा न करे। क्योंकि उसे नहीं पता कि शायद शैतान उसके हाथ में मौजूद हथियार को हरकत दे दे और फलस्वरूप वह जहन्नम के गढ़े में जा गिरे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस बात से सावधान किया है कि कोई मुसलमान अपने भाई की ओर किसी हथियार से इशारा करे। क्योंकि इस बात की संभावना तो रहती ही है कि शैतान उसे उसके हाथ में मौजूद हथियार को चलाने पर उकसा दे और वह अपने भाई की हत्या या उसे ज़ख़्मी कर दे और इस तरह गुनाह में संलिप्त होकर जहन्नम के गढ़े में जा गिरे।
फ़ायदे
मुसलमान के ख़ून के हराम होने का बयान।
मुसलमान का सम्मान करना वाजिब है। उसे अपने कथन एवं कार्य द्वारा कष्ट देने से बचना चाहिए। कष्ट देने में लोहे या हथियार से इशारा करना भी शामिल है। मज़ाक़ ही में क्यों न हो। क्योंकि हो सकता है कि शैतान के बहकावे में आकर मार दे या बिना चाहे हथियार उसके हाथ से गिर जाए और उसके भाई का नुक़सान हो जाए।
शरीयत ने निषिद्ध कार्यों की ओर ले जाने वाली चीज़ों से मना करके ग़लत काम के रास्ते बंद करने का तरीक़ा अपनाया है।
शरीयत चाहती है कि समाज का ताना-बाना स्वस्थ रहे, लोगों के संबंध सुरक्षित रहें, उन्हें भयभीत न किया जाए, इशारे और धमकी ही से क्यों न हो।
हवाला
صحيح البخاري (9/ 49) (7072).
صحيح مسلم (4/ 2020) (2617).
عمدة القاري شرح صحيح البخاري (24/ 187).
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com