सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

नवजात शिशु से संबंधित अहकाम

10 हदीसें

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सर के कुछ भाग के बालों को मूँड़ने और कुछ भाग को छोड़ देने से मना किया है।

عن ابن عمر رضي الله عنهما: أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنِ الْقَزَعِ.
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सर के कुछ भाग के बालों को मूँड़ने और कुछ भाग को छोड़ देने से मना किया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सर के कुछ भाग के बालों को मूँड़ने और कुछ को छोड़ देने से मना किया है। इस मनाही के अंदर छोटे और बड़े सभी लोग शामिल हैं। रही बात औरत की, तो उसके लिए अपने सर के बालों को मूँड़ना सही नहीं है।

फ़ायदे
  1. इस्लामी शरीयत इन्सान के ज़ाहिरी शक्ल-सूरत पर भी तवज्जो देती है।
हवाला

صحيح البخاري (7/ 163) (5921). صحيح مسلم (3/ 1675) (2120). نزهة المتقين (2/ 1126). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (19/ 380). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (6/ 381).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जब किसी ने क्षण भर के लिए भी अपने बच्चे का इक़रार कर लिया, तो वह उसका इनकार नहीं कर सकता।

عن عمر بن الخطاب رضي الله عنه قال: "إذا أقرَّ الرجل بولده طَرْفَةَ عين فليس له أن ينفيه".
उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि उन्होंने फ़रमायाः जब किसी ने क्षण भर के लिए भी अपने बच्चे का इक़रार कर लिया, तो वह उसका इनकार नहीं कर सकता।
इसे बैहक़ी ने रिवायत किया है।दर्जाइसकी सनद ह़सन है।
हवाला

منحة العلام في شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله الفوزان-طبعة دار ابن الجوزي-الطبعة الأولى 1428. توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله البسام- مكتبة الأسدي –مكة المكرمة –الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام:تأليف الشيخ صالح الفوزان- عناية عبد السلام السليمان - مؤسسة الرسالة الطبعة الأولى . فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام للشيخ ابن عثيمين- المكتبة الإسلامية القاهرة- تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي- الطبعة الأولى 1427. السنن الكبرى - لأحمد بن الحسين بن علي البيهقي - المحقق: محمد عبد القادر عطا: دار الكتب العلمية، بيروت – لبنان- الطبعة: الثالثة، 1424 هـ - 2003 م. التلخيص الحبير في تخريج أحاديث الرافعي الكبير لابن حجر العسقلاني تحقيق: أبو عاصم حسن بن عباس, مؤسسة قرطبة - مصر, الطبعة: الأولى، 1416هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

तुम्हारे नामों में अल्लाह के निकट सबसे प्रिय नाम अब्दुल्लाह और अब्दुर रहमान हैं।

عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضيَ اللهُ عنهما قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنَّ أَحَبَّ أَسْمَائِكُمْ إِلَى اللهِ عَبْدُ اللهِ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ».
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुम्हारे नामों में अल्लाह के निकट सबसे प्रिय नाम अब्दुल्लाह और अब्दुर रहमान हैं।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि अल्लाह के यहाँ सबसे प्रिय नाम अब्दुल्लाह या अब्दुर रहमान है।

फ़ायदे
  1. क़ुर्तुबी कहते हैं : इन दोनों नामों के साथ इन जैसे सारे नाम, जैसे अब्दुर रहीम, अब्दुल मलिक और अब्दुस समद आदि जुड़ जाएँगे। ये नाम अल्लाह के यहाँ सबसे प्रिय इसलिए हैं कि इनके अंदर अल्लाह का उचित स्थान, बंदे का उचित स्थान और बंदे का कर्तव्य बताया गया है और बंदे का कर्तव्य अल्लाह की बंदगी करना है। यहाँ बंदे को उसके पालनहार के साथ वास्तविक अंदाज़ में जोड़ा गया है, जिसके नतीजे में इन नामों वाले लोग इन नामों की पुष्टि करते हैं और अपने पालनहार से जुड़ने का गौरव प्राप्त करते हैं। किसी और ने कहा है : केवल इन्हीं दो नामों को ज़िक्र करने का कारण यह है कि पवित्र क़ुरान में अल्लाह एवं रहमान के अतिरिक्त अल्लाह की किसी और नाम से बंदे को जोड़ा नहीं गया है। उच्च एवं महान अल्लाह ने कहा है : "और यह कि जब अल्लाह का बंदा उसकी इबादत के लिए खड़ा हुआ।" तथा एक अन्य स्थान में कहा है : "और रहमान के बंदे", इसकी पुष्टि इस आयत से भी होती है : "कहो, तुम सब अल्लाह को पुकारो या रहमान को पुकारो।"
हवाला

صحيح مسلم (3/ 1682) (2132). فتح الباري لابن حجر (10/ 570).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com