عَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضيَ اللهُ عنهما قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنَّ أَحَبَّ أَسْمَائِكُمْ إِلَى اللهِ عَبْدُ اللهِ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ».
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुम्हारे नामों में अल्लाह के निकट सबसे प्रिय नाम अब्दुल्लाह और अब्दुर रहमान हैं।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि अल्लाह के यहाँ सबसे प्रिय नाम अब्दुल्लाह या अब्दुर रहमान है।
फ़ायदे
- क़ुर्तुबी कहते हैं : इन दोनों नामों के साथ इन जैसे सारे नाम, जैसे अब्दुर रहीम, अब्दुल मलिक और अब्दुस समद आदि जुड़ जाएँगे। ये नाम अल्लाह के यहाँ सबसे प्रिय इसलिए हैं कि इनके अंदर अल्लाह का उचित स्थान, बंदे का उचित स्थान और बंदे का कर्तव्य बताया गया है और बंदे का कर्तव्य अल्लाह की बंदगी करना है। यहाँ बंदे को उसके पालनहार के साथ वास्तविक अंदाज़ में जोड़ा गया है, जिसके नतीजे में इन नामों वाले लोग इन नामों की पुष्टि करते हैं और अपने पालनहार से जुड़ने का गौरव प्राप्त करते हैं। किसी और ने कहा है : केवल इन्हीं दो नामों को ज़िक्र करने का कारण यह है कि पवित्र क़ुरान में अल्लाह एवं रहमान के अतिरिक्त अल्लाह की किसी और नाम से बंदे को जोड़ा नहीं गया है। उच्च एवं महान अल्लाह ने कहा है : "और यह कि जब अल्लाह का बंदा उसकी इबादत के लिए खड़ा हुआ।" तथा एक अन्य स्थान में कहा है : "और रहमान के बंदे", इसकी पुष्टि इस आयत से भी होती है : "कहो, तुम सब अल्लाह को पुकारो या रहमान को पुकारो।"
हवाला
صحيح مسلم (3/ 1682) (2132). فتح الباري لابن حجر (10/ 570).