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तशरीह के साथ हदीसें

स्त्रियों से संबंधित अहकाम

29 हदीसें

स्त्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, क्योंकि स्त्री पसली से पैदा की गई है और पसली का सबसे टेढ़ा भाग उसका ऊपरी भाग है। यदि तुम उसे सीधा करने जाओगे, तो उसे तोड़ दोगे और यदि उसे छोड़ दोगे, तो हमेशा टेढ़ी ही रहेगी। अतः, स्त्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करो।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «اسْتَوْصُوا بالنِّساءِ خَيْرًا؛ فَإِنَّ المرأة خُلِقَتْ مِن ضِلعٍ، وَإنَّ أعْوَجَ مَا في الضِّلَعِ أعْلاهُ، فَإنْ ذَهَبتَ تُقيمُهُ كَسَرْتَهُ، وإن تركته، لم يزل أعوج، فاستوصوا بالنساء». وفي رواية: «المرأة كالضِّلَعِ إنْ أقَمْتَهَا كَسَرْتَهَا، وَإن اسْتَمتَعْتَ بها، استمتعت وفيها عوَجٌ». وفي رواية: «إنَّ المَرأةَ خُلِقَت مِنْ ضِلَع، لَنْ تَسْتَقِيمَ لَكَ عَلَى طَريقة، فإن استمتعت بها استمتعت بها وفيها عوج، وإنْ ذَهَبْتَ تُقِيمُهَا كَسَرْتَها، وَكَسْرُهَا طَلاَقُهَا».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "स्त्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, क्योंकि स्त्री पसली से पैदा की गई है और पसली का सबसे टेढ़ा भाग उसका ऊपरी भाग है। यदि तुम उसे सीधा करने जाओगे, तो उसे तोड़ दोगे और यदि उसे छोड़ दोगे, तो हमेशा टेढ़ी ही रहेगी। अतः, स्त्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करो।" तथा एक रिवायत में हैः "स्त्री पसली की तरह है, यदि उसे सीधा करने जाओगे, तो उसे तोड़ दोगे और यदि उससे लाभ उठाते रहोगे, तो उसके टेढ़ेपन के साथ लाभ उठाते रहोगे।" एक और रिवायत में हैः "स्त्री पसली से पैदा की गई है, जो कभी सीधी नहीं हो सकती। यदि उससे लाभ उठाते रहे, तो उसेक टेढ़ेपन के साथ लाग उठाते रहोगे और यदि सीधा करने गए, तो तोड़ दोगे। उसे तोड़ने का अर्थ तलाक़ देना है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الدمام، الطبعة: الأولى 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، فيصل بن عبد العزيز المبارك، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة للنشر والتوزيع، الرياض، الطبعة: الأولى 1423هـ، 2002م. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، الطبعة: الأولى 1428هـ، 2007م. شرح رياض الصالحين للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الرابعة عشر 1407هـ، 1987م. النهاية في غريب الحديث والأثر، مجد الدين أبو السعادات المبارك بن الأثير، تحقيق: طاهر أحمد الزاوى، محمود محمد الطناحي، نشر: المكتبة العلمية، بيروت، الطبعة: 1399هـ، 1979م.

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निश्चय ही दुनिया मीठी और हरी-भरी है और अल्लाह तुम्हें उसमें उत्तराधिकारी बनाने वाला है, ताकि देख सके कि तुम किस तरह के काम करते हो। अतः, दुनिया से बचो एवं स्त्रियों से बचो

عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ رضي الله عنه عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِنَّ الدُّنْيَا حُلْوَةٌ خَضِرَةٌ، وَإِنَّ اللهَ مُسْتَخْلِفُكُمْ فِيهَا، فَيَنْظُرُ كَيْفَ تَعْمَلُونَ، فَاتَّقُوا الدُّنْيَا وَاتَّقُوا النِّسَاءَ، فَإِنَّ أَوَّلَ فِتْنَةِ بَنِي إِسْرَائِيلَ كَانَتْ فِي النِّسَاءِ».
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "निश्चय ही दुनिया मीठी और हरी-भरी है और अल्लाह तुम्हें उसमें उत्तराधिकारी बनाने वाला है, ताकि देख सके कि तुम किस तरह के काम करते हो। अतः, दुनिया से बचो एवं स्त्रियों से बचो। क्योंकि बनू इसराईल की पहली परीक्षा स्त्रियों ही के विषय में थी।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि दुनिया का स्वाद मीठा है और वह देखने में हरी-भरी है, जिसके कारण लोग उसके धोखे में आ जाते हैं और इसमें इतना लीन हो जाते हैं कि उसे ही अपने ध्यान का केंद्र बना लेते हैं। जबकि अल्लाह ने इस सांसारिक जीवन में हमें एक-दूसरे का उत्तराधिकारी बनाया है, ताकि यह देखे कि हमारा अमल कैसा रहता है? हम उसके बताए हुए तरीक़े के अनुसार जीवन गुज़ारते हैं या उसके आदेशों का उल्लंघन करते हैं? उसके बाद फ़रमाया : इस बात से सावधान रहना कि दुनिया की सुख-सुविधाएँ और उसकी चमक-दमक तुमको धोखे में डाल दे और अल्लाह की आदेशित चीज़ों को छोड़ने और उसकी मना की हुई चीज़ों में पड़ने पर आमादा कर लें। दुनिया के जिन फ़ितनों से सबसे ज़्यादा बचना ज़रूरी है, उनमें से एक फ़ितना औरतों का फ़ितना है। बनी इसराईल का पहला फ़ितना औरतों ही से संबंधित था।

फ़ायदे
  1. परहेज़गारी (धर्मप्रायणता) के मार्ग पर चलने और दुनिया की ज़ाहिरी चमक-दमक के शिकार न होने की प्रेरणा।
  2. इसमें औरतों के फ़ितने में पड़ने, जैसे अजनबी औरतों को देखने और उनके साथ एकांत में रहने आदि से सावधान किया गया है।
  3. औरतों का फ़ितना दुनिया के बड़े फ़ितनों में से एक है।
  4. पिछली उम्मतों से नसीहत और सबक लेने चाहिए। क्योंकि जो कुछ बनी इसराईल के साथ हुआ, वह दूसरों के साथ भी हो सकता है।
  5. औरत के फ़ितने के विभिन्न रूप हैं। जब वह पत्नी होती है, तो कभी-कभी मर्द को इतना खर्च करने पर मजबूर करती है, जो उसकी क्षमता से बाहर होता है, जिसकी वजह से वह दीन के कामों में समय नहीं दे पाता और खुद को दुनिया की तलब में लगा देता है। और जब वह अजनबी औरत होती है और घर से सज-धजकर बेपर्दा होकर बाहर निकलती तथा मर्दों के साथ घुलती-मिलती है, तो विभिन्न श्रेणियों के व्यभिचार के द्वार खुलते हैं। इसलिए एक मोमिन को औरतों के फ़ितने से सुरक्षा के लिए अल्लाह की शरण लेनी चाहिए।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 2098) (2742). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 146). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 173). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 103).

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तुममें से कोई उठता है और अपनी पत्नी को दास की तरह मारता है। जबकि हो सकता है कि वह उसी दिन के अंतिम भाग में उससे संभोग भी करे।

عن عبد الله بن زمعة رضي الله عنه أنّه سمع النبي صلى الله عليه وسلم يخطب، وذكر الناقة والذي عقرها، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إذِ انبَعَثَ أشقاها: انْبَعَثَ لَهَا رجل عزِيز، عَارِم منيع في رَهطِه»، ثم ذكر النساء، فوعظ فيهنَّ، فقال: «يَعمِد أحدكم فيجلد امرأته جلد العبد، فلعلَّه يُضَاجِعُهَا من آخر يومه» ثمَّ وعظهم فِي ضَحِكِهم من الضَّرطَة، وقال: «لم يضحك أحدكم ممَّا يفعل؟!».
अब्दुल्लाह बिन ज़मआ (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि उन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ख़ुतबा देते हुए सुना। आपने (ख़ुतबे के दौरान सालेह अलैहिस्सलाम के) ऊँट तथा उसका वध करने वाले का ज़िक्र करते हुए फ़रमायाः (क़ुरआन की आयत) 'जब उनका सबसे अभागा व्यक्ति उठा' का अर्थ यह है कि उसे मारने के लिए एक शक्तिशाली, दुराचारी और अपनी क़ौम का मज़बूत व्यक्ति खड़ा हुआ।" फिर स्त्रियों के बारे में बताया और उनके बारे में समझाते हुए फ़रमायाः "तुममें से कोई उठता है और अपनी पत्नी को दास की तरह मारता है। जबकि हो सकता है कि वह उसी दिन के अंतिम भाग में उससे संभोग भी करे।" फिर मलद्वार से निकलने वाली हवा पर हँसने के बारे में समझाते हुए फ़रमायाः "तुममें से कोई ऐसे काम पर क्यों हँसता है, जो वह ख़ुद भी करता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الدمام، الطبعة: الأولى 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، فيصل بن عبد العزيز المبارك، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة للنشر والتوزيع، الرياض، الطبعة: الأولى 1423هـ، 2002م. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، محمد علي بن البكري بن علان، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، الطبعة: الرابعة 1425هـ. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، الطبعة: الأولى 1428هـ. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، الطبعة: الرابعة 1428هـ. شرح رياض الصالحين، محمد بن صالح العثيمين، دار الوطن، الرياض، الطبعة: 1426هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، كنوز إشبيليا، الرياض، الطبعة: الأولى1430هـ، 2009م. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الرابعة عشر 1407هـ.

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कोई मोमिन पुरुष किसी मोमिन स्त्री से नफ़रत न करे। यदि वह उसके किसी काम को नापसंद करता है, तो उसके किसी दूसरे (अथवा अन्य) काम को पसंद करेगा।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي لله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا يَفْرَكْ مُؤْمِنٌ مُؤْمِنَةً، إِنْ كَرِهَ مِنْهَا خُلُقًا رَضِيَ مِنْهَا آخَرَ» أَوْ قَالَ: «غَيْرَهُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "कोई मोमिन पुरुष किसी मोमिन स्त्री से नफ़रत न करे। यदि वह उसके किसी काम को नापसंद करता है, तो उसके किसी दूसरे (अथवा अन्य) काम को पसंद करेगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने पति को अपनी पत्नी से इस तरह नफ़रत करने से मना किया है कि उसपर अत्याचार करने, उसे छोड़ रखने तथा उसे भुला देने की नौबत आ जाए। क्योंकि हर इन्सान के अंदर प्राकृतिक रूप से कमियाँ मौजूद हैं। अगर उसकी कोई बात नापसंद होगी, तो कोई बात पसंद ज़रूर होगी। अतः जो बात पसंद हो, उसपर प्रसन्न रहे और जो बात पसंद न हो, उसपर सब्र करे। इससे खुशगवार वातावरण बनेगा और नापसंदीदगी इस हद तक नहीं पहुँचेगी कि अलगाव की स्थिति आ जाए।

फ़ायदे
  1. इस हदीस में मोमिन को न्याय करने, पत्नी के साथ होने वाले हर झगड़े में विवेक से काम लेने और भावनाओं में बहकर कोई काम न करने की प्रेरणा दी गई है।
  2. एक मोमिन की शान यह होनी चाहिए कि वह अपनी पत्नी से इस तरह नफ़रत न करे कि अलगवा की नौबत आ जाए। उसकी नापसंद बातों में नज़र बचाकर उन बातों पर ध्यान देना चाहिए, जो पसंद हों।
  3. सुंदर दामपत्य जीवन बिताने की प्रेरणा।
  4. ईमान अच्छे आचरण धारण करने की प्रेरणा देता है। मोमिन पुरुष एवं मोमिन स्त्री अच्छे आचरण रहित नहीं हो सकते। अगर ईमान है, तो आचरण अच्छा ज़रूर होगा।
हवाला

صحيح مسلم (2/ 1091) (1469). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 359). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 122). فتح رب البرية بتلخيص الحموية، لابن عثيمين (ص117). مجموع فتاوى ابن باز (25/ 246). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 282).

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अगर तुम चाहो, तो सब्र करो, तुम्हें जन्नत मिलेगी और अगर चाहो, तो मैं अल्लाह से तुम्हारे लिए स्वास्थ्य लाभ की दुआ कर दूँ।

عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضيَ اللهُ عنهما: أنَّهُ قَالَ لعَطَاءِ بْنِ أَبِي رَبَاحٍ: أَلَا أُرِيكَ امْرَأَةً مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ؟ قُلْتُ: بَلَى، قَالَ: هَذِهِ الْمَرْأَةُ السَّوْدَاءُ، أَتَتِ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَتْ: إِنِّي أُصْرَعُ وَإِنِّي أَتَكَشَّفُ، فَادْعُ اللهَ لِي، قَالَ: «إِنْ شِئْتِ صَبَرْتِ وَلَكِ الْجَنَّةُ، وَإِنْ شِئْتِ دَعَوْتُ اللهَ أَنْ يُعَافِيَكِ» قَالَتْ: أَصْبِرُ، قَالَتْ: فَإِنِّي أَتَكَشَّفُ فَادْعُ اللهَ أَنْ لَا أَتَكَشَّفَ، فَدَعَا لَهَا.
अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है कि उन्होंने अता बिन अबू रबाह से कहाः क्या मैं तुम्हें जन्नती स्त्रियों में से एक स्त्री न दिखाऊँ? अता कहते हैं कि मैंने कहाः अवश्य दिखाएँ। उन्होंने कहाः यह काली-कलोटी स्त्री, नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आई और कहने लगीः मुझपर मिर्गी का दौरा पड़ता है और मेरा शरीर खुल जाता है। अतः अल्लाह से मेरे लिए दुआ फ़रमाएँ। आपने कहाः "अगर तुम चाहो, तो सब्र करो, तुम्हें जन्नत मिलेगी और अगर चाहो, तो मैं अल्लाह से तुम्हारे लिए स्वास्थ्य लाभ की दुआ कर दूँ।" यह सुनकर उसने कहाः मैं सब्र करूँगी। फिर उसने कहाः मेरा शरीर खुल जाता है। अतः, अल्लाह से दुआ करें कि मेरा शरीर न खुले। चुनांचे आपने उसके लिए दुआ फ़रमाई।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري (7/ 116) (5652). صحيح مسلم (4/ 1994) (2576). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 95). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (1/ 235).

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जब तुममें से किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति माँगे, तो वह उसे न रोके।

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما عَنِ النَّبيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إذا اسْتَأذَنَت أَحَدَكُم امرَأَتُه إلى المسجِد فَلا يَمنَعهَا، قال: فقال بلال بن عبد الله: والله لَنَمنَعُهُنَّ، قال: فَأَقبَلَ عليه عبد الله، فَسَبَّهُ سَبًّا سَيِّئًا، ما سَمِعتُه سَبَّهُ مِثلَهُ قَطُّ، وقال: أُخبِرُك عن رسول الله صلى الله عليه وسلم وتقول: والله لَنَمنَعُهُنَّ؟». وفي لفظ: «لا تَمنَعُوا إِمَاء الله مسَاجِد الله...».
अबदुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जब तुममें से किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति माँगे, तो वह उसे न रोके।" वर्णनकर्ता कहते हैं कि यह सुन, बिलाल बिन अबदुल्लाह ने कहाः अल्लाह की क़सम, हम उन्हें अवश्य रोकेंगे। वर्णनकर्ता कहते हैं कि अब्दुल्लाह ने उनकी ओर मुँह करके उन्हें इतना बुरा-भला कहा कि मैंने उन्हें इस तरह बुरा-भला कहते कभी नहीं सुना था। साथ ही फ़रमायाः मैं तुम्हें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की हदीस सुना रहा हूँ और तुम कहते हो कि हम उन्हें अवश्य रोकेंगे? तथा एक रिवायत के शब्द हैंः अल्लाह की बंदियों को अल्लाह की मस्जिदों से न रोको।
इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अबदुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) ने एक हदीस सुनाई कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया है कि यदि किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति माँगे, तो उसे न रोके; ताकि वह मस्जिद में जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ने की फज़ीलत से वंचित न हो। इससे पता चलता है कि महिला का मस्जिद जाना जायज़ है। अबदुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) ने जब यह हदीस सुनाई, तो उस समय वहाँ उनका एक बेटा उपस्थित था। उन्हें लग रहा था अब हालात नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के समय जैसे नहीं रहे और स्त्रियों ने पहले की तुलना में अधिक बनाव-सिंगार शुरू कर दिया है। अतः, स्त्रियों की सुरक्षा के जज़्बे से ओत-प्रोत होकर कह उठे कि अल्लाह की क़सम, हम उन्हें ज़रूर रोकेंगे। (ज्ञात हो कि उनका उद्देश्य अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की बात पर आपत्ति करना नहीं था।) लेकिन, उनके इस रवैये से उनके पिता यह समझ बैठे कि वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की हदीस पर आपत्ति जता रहे हैं। इसलिए अल्लाह और उसके रसूल के विरोध के क्रोध से प्रभावित होकर उन्होंने अपने बेटे को बहुत ज़्यादा बुरा-भला कहा और फ़रमायाः मैं तुम्हें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की हदीस सुना रहा हूँ और तुम कहते हो कि अल्लाह की क़सम, हम उन्हें अवश्य रोकेंगे?

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام، لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

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ऐ अल्लाह, मैं लोगों को दो कमज़ोरों के हक़ को नष्ट करने से डराता हूँ; यतीम तथा स्त्री।

عن أبي شريح خويلد بن عمرو الخزاعي و أبي هريرة رضي الله عنهما عن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «اللَّهُمَّ إِنِّي أُحَرِّجُ حَقَّ الضَعِيفَين: اليَتِيم والمَرْأَة».
अबू शुरैह ख़ुवैलिद बिन अम्र और अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "ऐ अल्लाह, मैं लोगों को दो कमज़ोरों के हक़ को नष्ट करने से डराता हूँ; यतीम तथा स्त्री।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. رياض الصالحين، للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. السنن الكبرى للنسائي، تحقيق: حسن عبد المنعم شلبي، ط1، مؤسسة الرسالة - بيروت، 1421هـ. سنن ابن ماجه، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء الكتب العربية، فيصل عيسى البابي الحلبي. صحيح الجامع الصغير وزيادته، للألباني، ط3، المكتب الإسلامي، بيروت، 1408هـ. مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط و عادل مرشد وآخرون، تحت إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، (ط1)، مؤسسة الرسالة، 1421هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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अल्लाह उस व्यक्ति पर दया करे, जो रात को उठे, नमाज़ पढ़े और अपनी पत्नी को जगाए। यदि वह इनकार करे, तो उसके चेहरे पर पानी छिड़के। अल्लाह उस स्त्री पर दया करे, जो रात को उठे, नमाज़ पढ़े और अपनी पति को जगाए। यदि वह इनकार करे, तो उसके चेहरे पर पानी छिड़के

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «رَحِمَ الله رجلا ًقام من الليل، فَصَلى وأيْقَظ امرأته، فإن أَبَتْ نَضَحَ في وَجْهِهَا الماء، رَحِمَ الله امرأة قامت من الليل، فَصَلت وأَيْقَظت زوجها، فإن أَبَى نَضَحَت في وجْهِه الماء».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "अल्लाह उस व्यक्ति पर दया करे, जो रात को उठे, नमाज़ पढ़े और अपनी पत्नी को जगाए। यदि वह इनकार करे, तो उसके चेहरे पर पानी छिड़के। अल्लाह उस स्त्री पर भी दया करे, जो रात को उठे, नमाज़ पढ़े और अपने पति को जगाए। यदि वह इनकार करे, तो उसके चेहरे पर पानी छिड़के।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
हवाला

-سنن أبي داود، سليمان بن الأشعث السِّجِسْتاني، تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، المكتبة العصرية. -سنن ابن ماجه، ابن ماجه أبو عبد الله محمد بن يزيد القزويني، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء الكتب العربية، فيصل عيسى البابي الحلبي. - السنن الصغرى للنسائي، أحمد بن شعيب، النسائي، تحقيق: عبد الفتاح أبو غدة، مكتب المطبوعات الإسلامية، حلب، الطبعة الثانية، 1406ه – 1986م. -مسند الإمام أحمد بن حنبل، المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421هـ - 2001م. -صَحِيحُ التَّرْغِيب وَالتَّرْهِيب، محمد ناصر الدين الألباني، مكتَبة المَعارف لِلنَشْرِ والتوزيْع، الرياض، المملكة العربية السعودية - الطبعة الأولى، 1421هـ - 2000م. - نزهة المتقين بشرح رياض الصالحين، تأليف مصطفى سعيد الخن، مصطفى البغا - محي الدين مستو- علي الشربجي- محمد أمين لطفي - مؤسسة الرسالة - بيروت – لبنان - الطبعة الرابعة عشرة. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا، الطبعة الأولى، 1430ه. - مرعاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، المؤلف: أبو الحسن عبيد الله المباركفوري، إدارة البحوث العلمية والدعوة والإفتاء - الجامعة السلفية - بنارس الهند- الطبعة: الثالثة، 1404هـ - 1984م.

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19 हदीसें
  1. स्त्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, क्योंकि स्त्री पसली से पैदा की गई है और पसली का सबसे टेढ़ा भाग उसका ऊपरी भाग है। यदि तुम उसे सीधा करने जाओगे, तो उसे तोड़ दोगे और यदि उसे छोड़ दोगे, तो हमेशा टेढ़ी ही रहेगी। अतः, स्त्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करो।
  2. निश्चय ही दुनिया मीठी और हरी-भरी है और अल्लाह तुम्हें उसमें उत्तराधिकारी बनाने वाला है, ताकि देख सके कि तुम किस तरह के काम करते हो। अतः, दुनिया से बचो एवं स्त्रियों से बचो
  3. तुममें से कोई उठता है और अपनी पत्नी को दास की तरह मारता है। जबकि हो सकता है कि वह उसी दिन के अंतिम भाग में उससे संभोग भी करे।
  4. कोई मोमिन पुरुष किसी मोमिन स्त्री से नफ़रत न करे। यदि वह उसके किसी काम को नापसंद करता है, तो उसके किसी दूसरे (अथवा अन्य) काम को पसंद करेगा।
  5. अगर तुम चाहो, तो सब्र करो, तुम्हें जन्नत मिलेगी और अगर चाहो, तो मैं अल्लाह से तुम्हारे लिए स्वास्थ्य लाभ की दुआ कर दूँ।
  6. जब तुममें से किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति माँगे, तो वह उसे न रोके।
  7. ऐ अल्लाह, मैं लोगों को दो कमज़ोरों के हक़ को नष्ट करने से डराता हूँ; यतीम तथा स्त्री।
  8. अल्लाह उस व्यक्ति पर दया करे, जो रात को उठे, नमाज़ पढ़े और अपनी पत्नी को जगाए। यदि वह इनकार करे, तो उसके चेहरे पर पानी छिड़के। अल्लाह उस स्त्री पर दया करे, जो रात को उठे, नमाज़ पढ़े और अपनी पति को जगाए। यदि वह इनकार करे, तो उसके चेहरे पर पानी छिड़के
  9. दुनिया एक क्षणिक उपभोग की वस्तु है और उसकी सर्वश्रेठ वस्तु नेक स्त्री है।
  10. तुम लोग औरतों के यहाँ प्रवेश करने से बचो।" यह सुन एक अंसारी व्यक्ति ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! पति के निकट के रिश्तेदार (पति के भाई एवं चचेरे भाई आदि) के बारे में आप क्या फ़रमाते हैं? आपने फ़रमाया : "पति का निकट का रिश्तेदार तो मौत है।
  11. तुममें से जिस महिला की तीन संतानें मर जाएँ, वह उसके लिए जहन्नम से आड़ बन जाती हैं
  12. ऐ औरतो! तुम सदक़ा किया करो, क्योंकि मैंने जहन्नम के अंदर तुम्हारी संख्या अधिक देखी है।" औरतों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसा क्यों है? आपने उत्तर दिया : "तुम लानत अधिक करती हो और पति की नाशुक्री करती हो। मैंने विवेक एवं दीन में अधूरी होने के बावजूद तुम (औरतों) से ज़्यादा किसी को भी एक विवेकशील व्यक्ति के विवेक को भ्रमित कर देने वाला नहीं देखा।
  13. उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, जब भी शैतान तुम्हें (ऐ उमर!) किसी रास्ते पर चलता हुआ देखता है, तो तुम्हारा रास्ता छोड़ कर कोई और रास्ता अपना लेता है
  14. कोई स्त्री दो दिन की दूरी के सफर पर उस समय तक न निकले, जब तक उसके साथ उसका पति या कोई महरम (ऐसा रिश्तेदार जिसके साथ कभी शादी न हो सकती हो) न हो
  15. तसबीह (सुबहान अल्लाह कहना) पुरुषों के लिए है और ताली बजाना स्त्रियों कि लिए।
  16. जब कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को अपने बिस्तर पर बुलाए और उसके इनकार करने पर वह नाराज़ होकर रात गुज़ारे, तो फ़रिश्ते सुबह तक उसपर लानत करते रहते हैं।
  17. कोई व्यक्ति किसी शादीशुदा स्त्री के पास हरगिज़ रात न बिताए। हाँ, यह और बात है कि वह उसकी पत्नी हो या उसकी कोई ऐसी रिश्तेदार हो, जिससे हमेशा के लिए निकाह जायज़ नहीं है।
  18. उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने सेनाओं के सेनापतियों के नाम उन लोगों के विषय में पत्र लिखकर आदेश जारी किया, जो अपनी पत्नियों से दूर रहते थे कि वे उन्हें उपस्थित करके कहें कि या तो (अपनी पत्नियों को) खर्च दें या उनको तलाक़ दे दें। फिर, यदि तलाक़ देते हैं तो जितने दिनों तक उन्हें अपने विवाह में रखा है, उतने दिनों का खर्च भेज दें।
  19. तुम्हें इसे अपने पास रखने का हक़ अधिक है, जब तक दूसरी शादी न कर लो।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com