अल्लाह की बंदियों को अल्लाह की मस्जिदों से न रोको, लेकिन वे बिना सुगंध लगाए निकलें।
عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «لَا تَمْنَعُوا إِمَاءَ اللَّهِ مَسَاجِدَ اللَّهِ، وَلَكِنْ لِيَخْرُجْنَ وَهُنَّ تَفِلَاتٌ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "अल्लाह की बंदियों को अल्लाह की मस्जिदों से न रोको, लेकिन वे बिना सुगंध लगाए निकलें।"
इसे अबू दावूद ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन
तशरीह
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने औरत के सरपरस्त और अभिभावक को औरतों को मस्जिदों में जाने से रोकने से मना किया है और औरतों को आदेश दिया है कि वे ख़ुशबू लगाकर और बनाव-सिंगार करके बाहर न निकलें; ताकि पुरुषों के लिए फ़ितने का कारण न बनें।
फ़ायदे
- औरत को मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की अनुमति है, यदि फ़ितने का डर न हो और वह बिना शृंगार और ख़ुशबू के निकले।
- इससे यह प्रमाणित होता है कि औरत अपने पति के घर से उसकी अनुमति के बिना बाहर नहीं निकल सकती, क्योंकि अनुमति देने का आदेश पतियों को दिया गया है।
- इस्लाम औरतों का ध्यान रखता है और उन्हें ऐसे कामों से नहीं रोकना चाहता जिनमें उनके लिए भलाई हो, जैसे ज्ञान प्राप्त करने के लिए बाहर निकलना आदि।
- पुरुष का स्त्री पर संरक्षक होने तथा उसकी देख-भाल करने का सबूत।
हवाला
سنن أبي داود (1/ 423) (565). شرح سنن أبي داود للعباد (78/ 6). شرح أبي داود للعيني (3/ 50). النهاية في غريب الحديث والأثر ص(109).