सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

मुस्लिम समाज

7 हदीसें

रिश्तों-नातों को निभाने वाला वह नहीं है जो एहसान के बदले एहसान करे, बल्कि असल रिश्तों-नातों को निभाने वाला वह है जो उससे संबंध विच्छेद किए जाने के बावजूद उसे जोड़े।

عن عبد الله بن عمرو رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «لَيْسَ الْوَاصِلُ بِالْمُكَافِئِ، وَلَكِنِ الْوَاصِلُ الَّذِي إِذَا قُطِعَتْ رَحِمُهُ وَصَلَهَا».
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "रिश्तों-नातों को निभाने वाला वह नहीं है जो एहसान के बदले एहसान करे, बल्कि असल रिश्तों-नातों को निभाने वाला वह है जो उससे संबंध विच्छेद किए जाने के बावजूद उसे जोड़े।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि रिश्तों-नातों को मिभाने के मामले में एक आदर्श व्यक्ति वह नहीं है, जो उपाकर के बदले में उपकार करता हो। इस मामले में एक आदर्श व्यक्ति वह है, जो दूसरी ओर से रिश्ते-नाते को तोड़े जाने के बावजूद रिश्ता जोड़े और बुरा करने के बावजूद भला करे।

फ़ायदे
  1. शरीयत की दृष्टि में रिश्ते-नातों को निभाने का अमल उसी समय मान्य है, जब रिश्ता तोड़ने वाले के साथ रिश्ता जोड़ा जाए, अत्याचार करने वाले को क्षमा किया जाए और वंचित रखने वाले को दिया जाए। वो रिश्ता निभाना नहीं, जो बदले के तौर पर हो।
  2. रिश्ता निभाना धन, दुआ, भलाई के आदेश और बुराई से मनाही आदि द्वारा जहाँ तक संभव हो भला करने और बुराई से बचाने के नाम है।
हवाला

صحيح البخاري (8/ 6) (5991). منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، لحمزة محمد قاسم (5/ 242). بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (1/ 397). نزهة المتقين، لمصطفى الخن وغيره (1/ 311). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 190).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

अपने भाई की मदद करो, वह ज़ालिम हो या मज़लूम।

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «انْصُرْ أَخَاكَ ظَالِمًا أَوْ مَظْلُومًا». فَقَالَ رَجُلٌ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، أَنْصُرُهُ إِذَا كَانَ مَظْلُومًا، أَفَرَأَيْتَ إِذَا كَانَ ظَالِمًا كَيْفَ أَنْصُرُهُ؟ قَالَ: « تَحْجُزُهُ -أَوْ تَمْنَعُهُ- مِنَ الظُّلْمِ؛ فَإِنَّ ذَلِكَ نَصْرُهُ».
अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अपने भाई की मदद करो, वह ज़ालिम हो या मज़लूम। एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! जब वह मज़लूम हो तो उसकी मदद करूँगा। परन्तु, जब वह ज़ालिम हो तो उसकी मदद भला कैसे करूँ? फ़रमायाः उसे अत्याचार से रोको। यही उसकी मदद है।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري (3/ 128) (2443). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (2/ 589). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 326).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

वह मोमिन जो लोगों से मेल-जोल रखता है तथा उनकी ओर से मिलने वाली यातनाओं पर सब्र करता है, उस मोमिन से अच्छा है, जो लोगों से मेल-जोल नहीं रखता तथा उनकी यातनाओं पर सब्र नहीं करता।

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «المؤمن الذي يخالط الناس، ويصبر على أذاهم خير من الذي لا يخالط الناس ولا يصبر على أذاهم».
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायः “वह मोमिन जो लोगों से मेल-जोल रखता है तथा उनकी ओर से मिलने वाली यातनाओं पर सब्र करता है, उस मोमिन से अच्छा है, जो लोगों से मेल-जोल नहीं रखता तथा उनकी यातनाओं पर सब्र नहीं करता।”
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

سنن الترمذي، لمحمد بن عيسى بن سَوْرة الترمذي، أبو عيسى، تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر (جـ 1، 2)، ومحمد فؤاد عبد الباقي (جـ 3)، وإبراهيم عطوة عوض (جـ 4، 5)، ط شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي – مصر. سنن ابن ماجه، لابن ماجة أبو عبد الله محمد بن يزيد القزويني، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، ط دار إحياء الكتب العربية - فيصل عيسى البابي الحلبي. صحيح الجامع الصغير وزيادته، لأبي عبد الرحمن محمد ناصر الدين الألباني، ط المكتب الإسلامي. توضيح الأحكام من بلوغ المرام، الشيخ عبد الله بن عبد الرحمن البسام، ط مكتبة الأسد الإسلامية، الطبعة الخامسة. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، الشيخ عبد الله بن صالح الفوزان، ط دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، الشيخ صالح الفوزان بن عبد الله الفوزان، طبعة الرسالة فتح ذي الجلال والإكرام، الشيخ محمد بن صالح العثيمين، ط المكتبة الإسلامية، الطبعة الأولى. سبل السلام بشرح بلوغ المرام، للإمام محمد بن إسماعيل الصنعاني، ط دار الحديث.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

अशअरी लोग जब युद्ध में खाने-पीने की चीज़ों की कमी का सामना करते हैं या शहर में उनके बाल बच्चों का खाना कम पड़ने लगता है,

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : "إنَّ الأشعريين إذا أرمَلُوا في الغَزْوِ، أو قَلَّ طعامُ عِيالِهم بالمدينةِ، جَمَعُوا ما كان عندهم في ثوبٍ واحدٍ، ثم اقتَسَمُوه بينهم في إناءٍ واحدٍ بالسَّوِيَّةِ، فَهُم مِنِّي وأنا مِنهُم".
अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “अशअरी लोग जब युद्ध में खाने-पीने की चीज़ों की कमी का सामना करते हैं या शहर में उनके बाल बच्चों का खाना कम पड़ने लगता है, तो सब लोग जो कुछ पास में होता है, एक कपड़े में जमा कर देते हैं और फिर एक बरतन से आपस में बराबर बाँट लेते हैं। अतः, वे मुझसे हैं और मैं उनसे हूँ।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري , ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار طوق النجاة, الطبعة: الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت. فتح الباري لابن حجر العسقلاني ,رقم كتبه وأبوابه وأحاديثه: محمد فؤاد عبد الباقي- قام بإخراجه وصححه وأشرف على طبعه: محب الدين الخطيب- عليه تعليقات العلامة: عبد العزيز بن عبد الله بن باز.دار المعرفة, ط بدون, 1379ه. شرح مسلم للنووي, دار إحياء التراث, ط2, 1392ه. تطريز رياض الصالحين لفيصل بن عبد العزيز المبارك النجدي, تحقيق: عبد العزيز آل حمد, دار العاصمة , الطبعة: الأولى، 1423هـ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي, دار ابن الجوزي،الطبعة الأولى 1418ه. شرح رياض الصالحين لابن عثيمين , دار الوطن للنشر، الرياض, الطبعة: 1426 هـ. كنوز رياض الصالحين بإشراف حمد العمار, دار كنوز إشبيليا, الطبعة الأولى, 1430ه. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين, مؤسسة الرسالة, الطبعة الرابعة عشرة, 1407ه.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को सूचना मिली कि अम्र बिन औफ़ के बेटों के बीच लड़ाई हो गई है। अतः, अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- कुछ लोगों के साथ उनके बीच सुलह कराने पहुँचे।

عن سهل بن سعد الساعدي رضي الله عنهما أن رسول الله صلى الله عليه وسلم بَلَغَهُ أن بني عمرو بن عوف كان بينهم شَرٌّ، فخرج رسول الله صلى الله عليه وسلم يصلح بينهم في أناس معه، فحُبِس رسول الله صلى الله عليه وسلم وحَانتِ الصلاة، فجاء بلال إلى أبي بكر رضي الله عنهما ، فقال: يا أبا بكر، إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قد حُبِس وحَانت الصلاة فهل لك أن تَؤُمَّ الناس؟ قال: نعم، إن شِئت، فأقام بلال الصلاة، وتقدم أبو بكر فكبَّر وكبَّر الناس، وجاء رسول الله صلى الله عليه وسلم يمشي في الصفوف حتى قام في الصفِّ، فأخذ الناس في التَّصْفيقِ، وكان أبو بكر رضي الله عنه لا يَلْتَفِتُ في الصلاة، فلما أكثر الناس في التَّصْفيقِ الْتَفَتَ، فإذا رسول الله صلى الله عليه وسلم فأشار إليه رسول الله صلى الله عليه وسلم فرفع أبو بكر رضي الله عنه يَدَهُ فحمد الله، ورجع القَهْقَرَى وراءه حتى قام في الصف، فتقدم رسول الله صلى الله عليه وسلم فصلى للناس، فلما فرغ أقبل على الناس، فقال: «أيها الناس، ما لكم حين نَابكم شيء في الصلاة أخذتم في التصفيق؟! إنما التصفيق للنساء. من نَابه شيء في صلاته فليَقُل: سبحان الله، فإنه لا يسمعه أحد حين يقول: سبحان الله، إلا التَفَتَ، يا أبا بكر: ما مَنَعَك أن تصلي بالناس حين أشَرْتُ إليك؟»، فقال أبو بكر: ما كان ينبغي لابن أبي قُحافة أن يصلي بالناس بين يدي رسول الله صلى الله عليه وسلم .
सह्ल बिन साद साइदी -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को सूचना मिली कि अम्र बिन औफ़ के बेटों के बीच लड़ाई हो गई है। अतः, अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- कुछ लोगों के साथ उनके बीच सुलह कराने पहुँचे। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वापसी में कुछ देर हो गई और नमाज़ का समय निकट आ गया, तो बिलाल –अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- अबू बक्र -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- के पास आए और बोले : ऐ अबू बक्र, अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वहाँ देर हो गई और नमाज़ का समय भी निकट आ गया है। ऐसे में क्या आप लोगों की इमामत कर सकते हैं? फ़रमायाः हाँ, यदि तुम चाहो। चुनाँचे, बिलाल –अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- ने इक़ामत कही और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहु- आगे बढ़े और तकबीर कही तथा लोगों ने भी तकबीर कही। इसी बीच अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सफों के दरमियान चलते हुए आ गए और सफ़ में खड़े हो गए। आपको देख, लोग ताली बजाने लगे। अबू बक्र –रज़ियल्लाहु अनहु- चूँकि नमाज़ में इधर-उधर नज़र नहीं डालते थे, इसलिए उन्हें कुछ पता न चल सका। जब लोग ज़्यादा ताली बजाने लगे, तो अबू बक्र –रज़ियल्लाहु अनहु- ने नज़र डाली और देखा कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- आ गए हैं। अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इशारे से उन्हें नमाज़ पढ़ाने को कहा। लेकिन उन्होंने हाथ उठाया, अल्लाह की प्रशंसा की और पीछे की ओर हटते हुए सफ़ में खड़े हो गए। यह देख, अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- आगे बढ़े और लोगों को नमाज़ पढ़ाई। जब नमाज़ ख़त्म हुई, तो आपने लोगों की ओर मुँह करके फ़रमाया : “ऐ लोगों, क्या बात है कि जब नमाज़ में कोई बात होती है, तो तुम ताली बजाने लगते हो? सुनो, ताली महिलाओं के लिए है। जिसे नमाज़ में कोई बात पेश आए, वह सुबहान अल्लाह कहे। क्योंकि जो भी किसी को सुबहान अल्लाह कहते हुए सुनेगा, वह मुतवज्जेह होगा। ऐ अबू बकर, तुम्हें किस चीज़ ने मेरे इशारा करने के बावजूद नमाज़ पढ़ाने से रोका?” अबू बक्र ने कहा : अबू क़ुहाफ़ा के बेटे को शोभा नहीं देता कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की उपस्थिति में लोगों को नमाज़ पढ़ाए।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار ، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430هـ. بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي، سنة النشر:1418 هـ - 1997م. نزهة المتقين، تأليف: جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ، الطبعة الرابعة عشر 1407هـ. شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426هـ. صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. دليل الفالحين، تأليف: محمد بن علان، الناشر: دار الكتاب العربي، نسخة الإلكترونية، لا يوجد بها بيانات نشر. صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

अल्लाह तुम्हारे लिए तीन बातों को पसंद करता है और तुम्हारे लिए तीन बातों को नापसंद करता है।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنَّ اللهَ يَرْضَى لَكُمْ ثَلَاثًا، وَيَكْرَهُ لَكُمْ ثَلَاثًا، فَيَرْضَى لَكُمْ: أَنْ تَعْبُدُوهُ، وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا، وَأَنْ تَعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللهِ جَمِيعًا وَلَا تَفَرَّقُوا، وَيَكْرَهُ لَكُمْ: قِيلَ وَقَالَ، وَكَثْرَةَ السُّؤَالِ، وَإِضَاعَةِ الْمَالِ».
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "अल्लाह तुम्हारे लिए तीन बातों को पसंद करता है और तुम्हारे लिए तीन बातों को नापसंद करता है। उसे तुम्हारे लिए पसंद है कि: तुम केवल उसी की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ और सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़ लो और बिखराव का शिकार होने से बचो। जबकि उसे तुम्हारे लिए नापसंद है: बेकार की बातें करना, बहुत ज़्यादा प्रश्न करन और धन बर्बाद करन।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया है कि अल्लाह बंदों की तीन आदतों को पसंद करता है और तीन आदतों को नापसंद। जिन तीन आदतों को पसंद करता है, वह इस प्रकार हैं : बंदे केवल उसी की इबादत करें और किसी को उसका साझी न बनाएँ, सब मिलकर अल्लाह के वचन, क़ुरान एवं सुन्नत को मज़बूती से पकड़े रहें तथा मुसलमानों की जमात से अलग न हों। और जिन तीन आदतों को नापसंद करता है, वह हैं, ऐसी बातें करना जिनका कोई फ़ायदा न हो, जो बातें सामने न आई हों उनके बारे में पूछना या लोगों से उनका धन, उनके पास मौजूद चीज़ें और ऐसी वस्तुएँ माँगना जिन्हें माँगना आवश्यक न हो और माल बर्बाद करना और ग़ैर-शरई कार्यों में खर्च करना और माल को बर्बादी के हवाले करना।

फ़ायदे
  1. अल्लाह इबादत में निष्ठा को पसंद करता है और अविश्वास से नफ़रत करता है।
  2. अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़े रहने की प्रेरणा कि इससे एकता एवं आपसी प्रेम पैदा होता है।
  3. जमात के साथ रहने की प्रेरणा तथा जमात से जुड़े रहने एवं उसे एकजुट रखने का आदेश, जबकि इसकी विपरीत दिशा में चलते हुए बिखराव के शिकार होने और आपसी कलह में फँसने की मनाही।
  4. ऐसी चीज़ों के बारे में बहुत ज़्यादा बात करने की मनाही, जिनसे इन्सान का कोई सरोकार न हो। क्योंकि बात अगर जायज़ चीज़ों के बारे में हो रही है, तो बिना मतलब समय बर्बाद हो रहा है और अगर हराम चीज़ों के बारे में हो रही है, तो गुनाह का पहाड़ खड़ा हो रहा है।
  5. लोगों के टोह में रहने तथा उनकी बातों एवं कार्यों की नक़ल उतारने की मनाही।
  6. लोगों से उनका धन बहुत ज़्यादा माँगने की मनाही।
  7. धन नष्ट करना हराम है। इस हदीस में धन को लाभकारी कार्यों में खर्च करने की प्रेरणा दी गई है।
हवाला

صحيح مسلم (3/ 1340) (1715). البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (30/ 85). إكمال المعلم بفوائد مسلم (5/ 568).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

क्या मैं तुम्हें उस चीज़ के बारे में न बताऊँ, जो श्रेणी में रोज़ा, नमाज़ और सदक़ा से भी उत्तम है?

عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَلاَ أُخْبِرُكُمْ بِأَفْضَلَ مِنْ دَرَجَةِ الصِّيَامِ وَالصَّلاَةِ وَالصَّدَقَةِ؟» قَالُوا: بَلَى، قَالَ: «صَلاَحُ ذَاتِ البَيْنِ، فَإِنَّ فَسَادَ ذَاتِ البَيْنِ هِيَ الحَالِقَةُ».
अबू दरदा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "क्या मैं तुम्हें उस चीज़ के बारे में न बताऊँ, जो श्रेणी में रोज़ा, नमाज़ और सदक़ा से भी उत्तम है?" सहाबा ने कहा : अवश्य। तो आपने फ़रमाया : "आपसी मामलों का सुधार, और याद रखो कि आपसी मामलों में बिगाड़ ही धर्म को जड़ से उखाड़ फेंकने वाली वस्तु है।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद और तिर्मिज़ी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सहाबा से पूछा : क्या मैं तुम्हें अधिक नफ़ल रोज़े, नमाज़ और सदक़ा के सवाब से भी उत्तम बात न बताऊँ? उन्होंने उत्तर दिया : जी हाँ। आपने कहा : झगड़ने वालों के बीच सुलह कराना, क्योंकि दुश्मनी लोगों के बीच फूट, अलगाव, आपसी द्वेष और एक-दूसरे से मुँह मोड़ने को जन्म देती है। वास्तव में, आपसी मामलों में बिगाड़ से पैदा होने वाली नफ़रत ही वह वस्तु है जो धर्म और दुनिया को नष्ट कर देती है और उसे जड़ से उखाड़ फेंकती है, जैसे उस्तरा बालों को जड़ से मूंड देता है।

फ़ायदे
  1. नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का सहाबा से सवाल करने और उन्हें जवाब जानने के लिए प्रेरित करने का तरीक़ा।
  2. तीबी कहते हैं : इसमें आपसी मामलों के सुधार और उनके बिगाड़ से बचने की प्रेरणा है; क्योंकि सुधार, अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थामने और मुसलमानों के बीच फूट न पड़ने का कारण बनता है, जबकि आपसी मामलों का बिगाड़ धर्म में सेंध के समान है। अतः, जो व्यक्ति उनके सुधार का कार्य करता है और उनके बिगाड़ को दूर करता है, उसका दर्जा उस रोज़े रखने वाले और नमाज़ पढ़ने वाले से भी बढ़ जाता है, जो केवल अपनी व्यक्तिगत इबादत में व्यस्त रहता है।
हवाला

سنن أبي داود (7/ 280) (4919). سنن الترمذي (4/ 244) (2509). تحفة الأحوذي (7/ 179). شرح سنن أبي داود للعباد (559/ 32).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com