सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

दास मुक्त करना

15 हदीसें

एक अंसारी ने अपने दास से कह दिया कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो।

عن جابر بن عبد الله رضي الله عنهما قال: دَبَّرَ رَجُلٌ مِنْ الأَنْصَارِ غُلاماً لَهُ-، وَفِي لَفْظٍ: بَلَغَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم : أَنَّ رَجُلاً مِنْ أَصْحَابِهِ أَعْتَقَ غُلاماً لَهُ عنْ دُبُرٍ- لَمْ يَكُنْ لَهُ مَالٌ غَيْرُهُ فَبَاعَهُ رَسُولُ الله بِثَمَانِمِائَةِ دِرْهَمٍ، ثُمَّ أَرْسَلَ ثَمَنَهُ إلَيْهِ.
जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि एक अंसारी ने अपने दास से कह दिया कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो। तथा एक रिवायत में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को पता चला कि एक सहाबी ने अपने दास से कह दिया है कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो। हालाँकि उसके पास कोई अन्य धन भी नहीं है। अतः, आपने उसे आठ सौ दिरहम में बेच दिया और क़ीमत उस सहाबी को भेज दी।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

एक अंसारी व्यक्ति ने अपने दास को अपनी मृत्यु के बाद मुक्ति का वचन दे दिया, जबकि उसके पास उसके सिवा कोई धन नहीं था। जब नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को इसकी सूचना मिली, तो आपने उनके इस काम को सहमति देने के बजाय नकार दिया और दास को आठ सौ दिरहम में बेचकर उसकी कीमत उसे भिजवा दी। क्योंकि इनसान का अपनी तथा अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने का महत्व दास मुक्त करने से कहीं अधिक है। आपने ऐसा इसलिए भी किया कि कहीं उसे इसके बाद लोगों को सामने हाथ न फैलाना पड़े। इस प्रकार की हदीसों के अंदर कई ऐसे अहकाम हैं, जिनका ज्ञान इनसान को रखना चाहिए, यद्यपि उनपर अमल करने की ज़रूरत न पड़े। इन हदीसों को सीखने तथा समझने से यह कहकर दूरी नहीं बनाई जा सकती कि आज दास प्रथा का चलन समाप्त हो चुका है। क्योंकि आज भी अफ्रीका के कुछ भागों में दास प्रथा का चलन है और यह भी संभव है कि बाद में फिर कभी यह प्रचलित हो जाए। दास प्रथा का चलन पुराने ज़माने से रहा है, इस्लाम के दौर में भी था और उसके बाद भी। यह और बात है कि इस्लाम एक स्वतंत्रता प्रिय धर्म है और दास को मुक्त करने की प्रेरणा देता है।

हवाला

صحيح البخاري، للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب، الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله البسام -تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जिसने किसी गुलाम में अपना भाग मुक्त किया तथा उसके पास इतना धन हो, जो उसकी पूरी क़ीमत को पहुँचता हो, तो गुलाम की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाए और अन्य साझेदारों को उसकी ओर से उनके हिस्सों की क़ीमत अदा कर दिए जाए, तभी उसकी ओर से पूरा गुलाम मुक्त होगा, अन्यथा उसकी ओर से जितना मुक्त हुआ, सो हुआ

عن عَبْدُ الله بن عمر رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «مَن أَعْتَقَ شِرْكًا له في عَبْدٍ، فكان له مالٌ يَبْلُغُ ثَمَنَ العَبْدِ: قُوِّمَ عليه قِيمَةَ عَدْلٍ ، فأعطى شُرَكَاءَهُ حِصَصَهُمْ، وعَتَقَ عليه العَبْدُ ، وإلا فقد عَتَقَ منه ما عَتَقَ».
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से वर्णन करते हैं कि आपने फ़रमायाः जिसने किसी गुलाम में अपना भाग मुक्त किया तथा उसके पास इतना धन हो, जो उसकी पूरी क़ीमत को पहुँचता हो, तो उसकी न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाए और अन्य साझेदारों को उनके हिस्सों की क़ीमत अदा कर दी जाए, तभी उसकी ओर से पूरा गुलाम मुक्त किया जाना समझा जाएगा। अन्यथा, उसकी ओर से जितना मुक्त हुआ, सो हुआ।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जिस व्यक्ति की किसी दास अथवा दासी में हिस्सेदारी हो, चाहे हिस्सेदारी कम हो या ज़्यादा, यदि वह उस दास का एक भाग मुक्त कर देता है, तो उसका हिस्सा मुक्त हो जाएगा। अब अगर वह संपन्न है और अपने साझीदार के हिस्से की क़ीमत भी दे सकता है, तो पूरा दास मुक्त हो जाएगा। मुक्त करने वाले का भाग भी और उसके साझीदार का भाग भी। वह अपने साझीदार के भाग की क़ीमत का अंदाज़ा बाज़ार के अनुसार करके अपने साझीदार को दे देगा। और अगर वह अपने साझीदार के हिस्से की क़ीमत देने में सक्षम न हो, तो उसके कारण उसके साथी का नुक़सान होने नहीं दिया जाएगा। मुक्त केवल उसी का भाग होगा और उसके साझीदार के भाग की दासता बरक़रार रहेगी।

हवाला

صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जिसने किसी दास में अपना भाग मुक्त कर दिया, उसे अपने धन से पूरा दास मुक्त करना होगा। परन्तु, यदि उसके पास पर्याप्त धन न हो, तो उस दास की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाएगी और उस दास से प्रयास करने को कहा जाएगा। हाँ, मगर उसे तंग नहीं किया जाएगा

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «من أعتق شِقْصَاً مِنْ مملوك، فعليهِ خَلاصُهُ كله في ماله، فإِنْ لم يكن له مال؛ قُوِّمَ المملوك قِيمَةَ عَدْلٍ، ثمَّ اُسْتُسْعِيَ العبد، غير مَشْقُوقٍ عليه».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिसने किसी दास में अपना भाग मुक्त कर दिया, उसे अपने धन से पूरा दास मुक्त करना होगा। परन्तु, यदि उसके पास पर्याप्त धन न हो, तो उस दास की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाएगी और उस दास से अपनी क़ीमत चुकाने का प्रयास करने को कहा जाएगा। हाँ, मगर उसे तंग नहीं किया जाएगा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जो किसी साझे के दास में से अपना भाग मुक्त कर दे, यदि उसके पास इतना धन हो कि सभी साझीदारों को उनके हिस्सों की क़ीमत दे सकता है, तो उसे पूरा दास मुक्त करना होगा। लेकिन यदि उसके पास धन न हो अथवा सारे भागीदारों के भाग चुकाने के समान धन न हो, अथवा ऐसा करने से उसे क्षति होती हो, तो इस दशा में दास को दो अख्तयार होंगेः प्रथम, स्वयं को उतना आज़ाद रखे, जितना हुआ है। इस दशा में वह कुछ मुक्त और कुछ दास रहेगा। दूसराः जिसने आज़ाद नहीं किया है, उसका भाग देने के लिए परिश्रम करे। ऐसा मूल्य तय करने के पश्चात करेगा। इसी को 'इसतिसआ' कहा जाता है।

हवाला

عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم- لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية 1408هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

अगर तुमने उसे अपने मामा लोगों को दे दिया होता, तो अधिक सवाब मिलता

عن أم المؤمنين ميمونة بنت الحارث رضي الله عنها : أنها أعتقت وَليدَةً ولم تستأذن النبي صلى الله عليه وسلم فلما كان يَومُها الذي يَدورُ عليها فيه، قالت: أشَعَرْتَ يا رسول الله، أني أعتقت وليدتي؟ قال: «أو فعلت؟» قالت: نعم. قال: «أما إنك لو أعطيتها أخوالك كان أعظم لأجرك».
मुसलमानों की माता मैमूना बिंत हारिस- रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को बताए बिना अपनी एक दासी को मुक्त कर दिया। फिर जब उनकी बारी का दिन आया, जब आप उनके पास आते थे, तो कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल, क्या आपको पता है कि मैंने अपनी दासी को मुक्त कर दिया है? आपने कहाः "क्या सचमुच तुमने ऐसा कर दिया है?" उन्होंने कहा कि हाँ, तो आपने ने कहाः "अगर तुमने उसे अपने मामा लोगों को दे दिया होता, तो अधिक सवाब मिलता।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. - كنوز رياض الصالحين»، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه مرعاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح - أبو الحسن عبيد الله المباركفوري - إدارة البحوث العلمية والدعوة والإفتاء - الجامعة السلفية - بنارس الهند الطبعة: الثالثة - 1404 هـ، 1984.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

तीन आदमी ऐसे हैं, जिनको दोगुना सवाब मिलेगा। एक वह अह्ले किताब जो अपने नबी पर ईमान लाया और फिर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाया, दूसरा वह ग़ुलाम जो अल्लाह का और अपने मालिकों का हक़ अदा करता रहा और तीसरा वह व्यक्ति, जिसके पास कोई दासी हो, फिर वह उसे शिष्टाचार सिखाए और अच्छी तरह सिखाए तथा शिक्षा दे और अच्छी से अच्छी शिक्षा दे और आज़ाद करके शादी कर ले, तो उसके लिए भी दोगुना सवाब है।

عن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه مرفوعاً: «ثلاثة لهم أجْرَان: رجُلٌ من أهل الكتاب آمن بِنَبِيِّه، وآمَن بمحمد، والعَبْد المملوك إذا أَدَّى حَقَّ الله، وحَقَّ مَوَالِيه، ورجل كانت له أمَة فأدَّبَها فأحسن تَأدِيبَها، وَعَلَّمَهَا فأحسن تَعْلِيمَهَا، ثم أعْتَقَها فتزوجها؛ فله أجران».
अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: "तीन आदमी ऐसे हैं, जिनको दोगुना सवाब मिलेगा। एक वह अह्ले किताब (यहूदी और ईसाई) जो अपने नबी पर ईमान लाया और फिर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाया। दूसरा वह ग़ुलाम जो अल्लाह का और अपने मालिकों का हक़ अदा करता रहा और तीसरा वह व्यक्ति जिसके पास कोई दासी हो, फिर वह उसे सदाचार सिखाए और अच्छी तरह सिखाए तथा शिक्षा दे और अच्छी से अच्छी शिक्षा दे और आज़ाद करके शादी कर ले, तो उसके लिए भी दोगुना सवाब है।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الرابعة عشر، 1407ه 1987م. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين، نشر: دار الوطن للنشر، الرياض، الطبعة: 1426ه. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، للهلالي، نشر: دار ابن الجوزي. صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

आज़ाद किए हुए ग़ुलाम की मृत्यु के पश्चात, उसका उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में, उसके उत्तराधिकारी होने का अधिकार उसे प्राप्त होगा, जिसने उसे आज़ाद किया है।

عن عائشة بنت أبي بكر رضي الله عنهما قالت: كانت في بريرة ثلاث سنن: خُيِّرَتْ على زوجها حين عتقت. وأُهْدِيَ لها لحم، فدخل علي رسول الله صلى الله عليه وسلم والبُرْمَةُ على النار، فدعا بطعام، فَأُتِيَ بخبز وأُدْمٌ من أدم البيت، فقال: ألم أَرَ البرمة على النار فيها لحم؟ قالوا: بلى، يا رسول الله، ذلك لحم تُصدِّق به على بريرة، فكرهنا أن نطعمك منه، فقال: هو عليها صدقة، وهو منها لنا هدية. وقال النبي صلى الله عليه وسلم فيها: إنما الوَلاء لمن أعتق».
आइशा बिंत अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहती हैंः बरीरा (रज़ियल्लाहु अनहा) के कारण अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ओर से तीन तरीके सामने आएः जब वह आज़ाद हो गईं तो आपने उन्हें अपने पति के साथ रहने या न रहने का अख़्तियार दिया। उन्हें कहीं से मांस भेजा गया। मांस की हंडी चूल्हे पर थी कि आप मेरे यहाँ आए और खाना माँगा। सामने रोटी और घर में मौजूद सालन रखा गया तो फ़रमायाः क्या मैंने चूल्हे पर मांस की हाँडी नहीं देखी है? सबने कहाः हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल! लेकिन वह मांस तो बरीरा को सद़के में मिला है। इसीलिए हमने उसे आपको खिलाना गवारा नहीं किया। इसपर आपने फ़रमायाः वह उसके लिए सदक़ा है, लेकिन उसकी ओर से हमारे लिए भेंट है। तथा अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उन्हीं के बारे में फ़रमायाः आज़ाद किए हुए ग़ुलाम की मृत्यु के पश्चात, उसका उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में, उसका उत्तराधिकारी होने का अधिकार उसे प्राप्त होगा, जिसने उसे आज़ाद किया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) उस बरकत वाले सौदे को याद करते हुए, जो बरीरा (रज़ियल्लाहु अंहा) को उनसे क़रीब लाया था, अपनी इस मुक्त की हुई दासी की कुछ बरकतों को याद करती हैं। क्योंकि अल्लाह ने उनसे संबंधित चार ऐसे महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं, जो आम आदेश के रूप में हमेशा के लिए बाक़ी रह गए। पहला आदेशः वह अपने दास पति मुग़ीस (रज़ियल्लाहु अंहु) के विवाह में थीं कि मुक्त हो गईं, जिसके बाद उन्हें अपने पहले पति के निकाह में रहने या उसे छोड़कर अलग हो जाने की अनुमति दे दी गई, क्योंकि अब वह आज़ाद थीं और उनका पति ग़ुलाम। इस तरह वह अपने पति के समकक्ष नहीं रह गई थीं, जबकि यहाँ समकक्षता का एतबार होगा। यही कारण है कि वह निकाह रद्द करके उनसे अलग हो गईं और अन्य स्त्रियों के लिए एकआदर्श के रूप में सामने आईं। दूसरा आदेशः वह आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) के घर में थीं और उनको मांस दान किया गया। मांस हंडी में पक ही रहा था कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) के यहाँ आए और खाना माँगा। आपको रोटी और घर में मौजूद सालन दिया गया और बरीरा (रज़ियल्लाहु अंहा) को सदक़े में मिलने वाला मांस नहीं दिया गया, क्योंकि सब को पता था कि आप सदक़ा नहीं खाते। लेकिन आपने कहाः क्या मैंने चूल्हे पर मांस की हंडी नहीं देखी है? घर के लोगों ने कहाः हाँ, देखा तो है, लेकिन लेकिन वह बरीरा को सदक़े में मिला है और हम नहीं चाहते कि आप उसे खाएँ। इसपर आपने कहाः वह उसे सदक़े में मिला है, लेकिन उसकी ओर से हमारे लिए उपहार है। तीसरा आदेशः उनके मालिकों ने जब उनको आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) से बेचना चाहा, तो यह शर्त लगा दी कि 'वला' उनको प्राप्त होगा, ताकि जब मुक्त होने के बाद वह अपनी निसबत उनकी ओर करें, तो उन्हें गौरव का अनुभव हो तथा हो सकता है कि उन्हें मीरास और सहायता आदी भौतिक लाभ भी मिलें। ऐसे में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः " 'वला' उसके लिए है, जिसने आज़ाद किया हो।" बेचने वाले या किसी और के लिए नहीं। 'वला' वह संबंध है, जो मुक्ति प्राप्त करने के बाद, किसी मुक्त दास और उसके मुक्त करने वाले मालिक के बीच में हो। चुनांचे मुक्ति प्राप्त करने वाला दास यदि मर जाए और उसका कोई उत्तराधिकारी न हो या फिर सभी निर्धारित भाग वालों के अपना-अपना भाग ले लेने के बाद कुछ बच जाए, तो वह उसे मिलेगा, जिसने उसे आज़ाद किया हो।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ. خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام لفيصل بن عبد العزيز آل المبارك ، ط2، 1412 هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381ه. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

कर्तव्यनिष्ठ दास के लिए दोगुना प्रतिफल है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «للعبد المملوك المصلح أجران»، والذي نفس أبي هريرة بيده لولا الجهاد في سبيل الله والحج، وبر أمي، لأحببت أن أموت وأنا مملوك.
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "कर्तव्यनिष्ठ दास के लिए दोगुना प्रतिफल है।" उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में अबू हुरैरा की जान है, यदि अल्लाह के मार्ग में जिहाद, हज तथा माँ की देख-रेख की ज़िम्मेवारी न होती, तो मैं इस बात को पसंद करता कि दासता की अवस्था में मरूँ।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه. صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين, مؤسسة الرسالة, الطبعة الرابعة عشر, 1407ه. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد بن علان الصديقي, دار الكتاب العربي. كنوز رياض الصالحين، بإشراف حمد العمار, دار كنوز إشبيليا, الطبعة الأولى, 1430ه. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي, دار ابن الجوزي. شرح رياض الصالحين لابن عثيمين، دار مدار الوطن للنشر، الرياض, الطبعة : 1426 هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जो किसी मुस्लिम दास को मुक्त करता है, अल्लाह उसके एक-एक अंग के बदले में इसके एक-एक अंग को जहन्नम से मुक्त कर देता है, यहाँ कि उसकी शर्मगाह के बदले इसकी शर्मगाह को मुक्त कर देता है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «من أعتق رقبة مسلمة أعتق الله بكل عضو منه، عضوًا منه في النار، حتى فرجه بفرجه».
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से मरफ़ूअन वर्णित है : "जो किसी मुस्लिम दास को मुक्त करता है, अल्लाह उसके एक-एक अंग के बदले में इसके एक-एक अंग को जहन्नम से मुक्त कर देता है, यहाँ कि उसकी शर्मगाह के बदले इसकी शर्मगाह को मुक्त कर देता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري، تحقيق محمد الناصر، دار طوق النجاة المصورة عن السلطانية الطبعة الأولى 1422. صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين, مؤسسة الرسالة, الطبعة الرابعة عشر, 1407ه. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد بن علان الصديقي, دار الكتاب العربي. كنوز رياض الصالحين، بإشراف حمد العمار, دار كنوز إشبيليا, الطبعة الأولى, 1430ه. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي, دار ابن الجوزي. شرح رياض الصالحين لابن عثيمين، دار مدار الوطن للنشر، الرياض, الطبعة : 1426 هـ. تطريز رياض الصالحين، لفيصل بن عبد العزيز المبارك النجدي, تحقيق: عبد العزيز آل حمد, دار العاصمة , الطبعة: الأولى، 1423 هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
15 में से 8
15 हदीसें
  1. एक अंसारी ने अपने दास से कह दिया कि तुम मेरे मरने के बाद आज़ाद हो।
  2. जिसने किसी गुलाम में अपना भाग मुक्त किया तथा उसके पास इतना धन हो, जो उसकी पूरी क़ीमत को पहुँचता हो, तो गुलाम की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाए और अन्य साझेदारों को उसकी ओर से उनके हिस्सों की क़ीमत अदा कर दिए जाए, तभी उसकी ओर से पूरा गुलाम मुक्त होगा, अन्यथा उसकी ओर से जितना मुक्त हुआ, सो हुआ
  3. जिसने किसी दास में अपना भाग मुक्त कर दिया, उसे अपने धन से पूरा दास मुक्त करना होगा। परन्तु, यदि उसके पास पर्याप्त धन न हो, तो उस दास की न्यायसंगत क़ीमत लगाई जाएगी और उस दास से प्रयास करने को कहा जाएगा। हाँ, मगर उसे तंग नहीं किया जाएगा
  4. अगर तुमने उसे अपने मामा लोगों को दे दिया होता, तो अधिक सवाब मिलता
  5. तीन आदमी ऐसे हैं, जिनको दोगुना सवाब मिलेगा। एक वह अह्ले किताब जो अपने नबी पर ईमान लाया और फिर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाया, दूसरा वह ग़ुलाम जो अल्लाह का और अपने मालिकों का हक़ अदा करता रहा और तीसरा वह व्यक्ति, जिसके पास कोई दासी हो, फिर वह उसे शिष्टाचार सिखाए और अच्छी तरह सिखाए तथा शिक्षा दे और अच्छी से अच्छी शिक्षा दे और आज़ाद करके शादी कर ले, तो उसके लिए भी दोगुना सवाब है।
  6. आज़ाद किए हुए ग़ुलाम की मृत्यु के पश्चात, उसका उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में, उसके उत्तराधिकारी होने का अधिकार उसे प्राप्त होगा, जिसने उसे आज़ाद किया है।
  7. कर्तव्यनिष्ठ दास के लिए दोगुना प्रतिफल है।
  8. जो किसी मुस्लिम दास को मुक्त करता है, अल्लाह उसके एक-एक अंग के बदले में इसके एक-एक अंग को जहन्नम से मुक्त कर देता है, यहाँ कि उसकी शर्मगाह के बदले इसकी शर्मगाह को मुक्त कर देता है।
  9. मैं बनी मुक़र्रिन का सातवाँ व्यक्ति था। हमारी एक दासी थी, जिसे सबसे छोटे भाई ने एक थप्पड़ मार दिया था, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें उसे मुक्त करने का आदेश दिया
  10. यह जो नमाज़ है, इसमें लोगों की आम बात-चीत सही नहीं है। इसमें तो बस तसबीह, तकबीर और क़ुरआन की तिलावत होती है।
  11. 'वला' (अर्थात वारिस बनने का अधिकार) उसके लिए है, जिसने मुक्त करने का उपकार किया हो।
  12. जो शख़्स किसी मुसलमान ग़ुलाम को आज़ाद करेगा, तो अल्लाह आज़ाद किए गए ग़ुलाम के शरीर के हर अंग के बदले उसके शरीर का एक अंग दोज़ख़ से आज़ाद करेगा।
  13. जो किसी महरम रिश्तेदार (दास) का मालिक हो, तो वह (दास उसके आज़ाद किए बिना) आज़ाद है।
  14. सफ़ीना -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैं उम्मे सलमा -रज़ियल्लाहु अन्हा- का ग़ुलाम था, तो उन्होंने कहा : मैं तुझको आज़ाद करती हूँ इस शर्त पर कि तू जब तक जीवित रहेगा अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की सेवा करता रहेगा।
  15. मुकातब (वह ग़ुलाम जो अपने मालिक से यह अनुबंध कर ले कि कुछ पैसा लेकर वह उसको आज़ाद कर देगा) उस समय तक ग़ुलाम है जब तक उसके ऊपर उस अनुबंध का एक दिरहम भी बाकी है।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com