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सहीह बुख़ारी

नंबर 4706

नंबर 4706किताब 65, नंबर 228
حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي ظَبْيَانَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ ‏{‏كَمَا أَنْزَلْنَا عَلَى الْمُقْتَسِمِينَ‏}‏ قَالَ آمَنُوا بِبَعْضٍ وَكَفَرُوا بِبَعْضٍ، الْيَهُودُ وَالنَّصَارَى‏.‏
Narrated Ibn `Abbas concerning:"As We have sent down (the Scripture) on those who are divided (Jews and Christians)." (15.90) They believed in part of it and disbelieved in the other, (and they) are the Jews and the Christians

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।