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सहीह बुख़ारी

नंबर 3967

नंबर 3967किताब 64, नंबर 20
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الصَّوَّافُ، حَدَّثَنَا يُوسُفُ بْنُ يَعْقُوبَ ـ كَانَ يَنْزِلُ فِي بَنِي ضُبَيْعَةَ وَهْوَ مَوْلًى لِبَنِي سَدُوسَ ـ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ، عَنْ أَبِي مِجْلَزٍ، عَنْ قَيْسِ بْنِ عُبَادٍ، قَالَ قَالَ عَلِيٌّ ـ رضى الله عنه فِينَا نَزَلَتْ هَذِهِ الآيَةُ ‏{‏هَذَانِ خَصْمَانِ اخْتَصَمُوا فِي رَبِّهِمْ ‏}‏
Narrated `Ali:The following Holy Verse:-- "These two opponents (believers and disbelievers) dispute with each other about their Lord." (22.19) was revealed concerning us

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।