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सहीह बुख़ारी

नंबर 3968

नंबर 3968किताब 64, नंबर 21
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ جَعْفَرٍ، أَخْبَرَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِي هَاشِمٍ، عَنْ أَبِي مِجْلَزٍ، عَنْ قَيْسِ بْنِ عُبَادٍ، سَمِعْتُ أَبَا ذَرٍّ ـ رضى الله عنه ـ يُقْسِمُ لَنَزَلَتْ هَؤُلاَءِ الآيَاتُ فِي هَؤُلاَءِ الرَّهْطِ السِّتَّةِ يَوْمَ بَدْرٍ‏.‏ نَحْوَهُ‏.‏
Narrated Qais bin Ubad:I heard Abu Dhar swearing that these Holy Verses were revealed in connection with those six persons on the day of Badr

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।