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सहीह बुख़ारी

नंबर 3902

नंबर 3902किताब 63, नंबर 127
حَدَّثَنَا مَطَرُ بْنُ الْفَضْلِ، حَدَّثَنَا رَوْحٌ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ بُعِثَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لأَرْبَعِينَ سَنَةً، فَمَكُثَ بِمَكَّةَ ثَلاَثَ عَشْرَةَ سَنَةً يُوحَى إِلَيْهِ، ثُمَّ أُمِرَ بِالْهِجْرَةِ فَهَاجَرَ عَشْرَ سِنِينَ، وَمَاتَ وَهُوَ ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ‏.‏
इब्ने अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है वह कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब नबी बनाया गया तो आप की आयु चालीस वर्ष थी, आप मक्का में तेरह वर्ष तक रहे जहाँ आप पर वह्य उतरती रही, फिर आप को हिजरत (पलायन) का आदेश दिया गया तो आप ने हिजरत की जहां (मदीना में) आप दस साल तक रहे, और जब आप की मृत्यु हुई उस समय आप की आयु तिरसठ (63) साल थी।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।