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सहीह बुख़ारी

नंबर 3901

नंबर 3901किताब 63, नंबर 126
حَدَّثَنِي زَكَرِيَّاءُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، قَالَ هِشَامٌ فَأَخْبَرَنِي أَبِي، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ سَعْدًا، قَالَ اللَّهُمَّ إِنَّكَ تَعْلَمُ أَنَّهُ لَيْسَ أَحَدٌ أَحَبَّ إِلَىَّ أَنْ أُجَاهِدَهُمْ فِيكَ مِنْ قَوْمٍ كَذَّبُوا رَسُولَكَ صلى الله عليه وسلم وَأَخْرَجُوهُ، اللَّهُمَّ فَإِنِّي أَظُنُّ أَنَّكَ قَدْ وَضَعْتَ الْحَرْبَ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُمْ‏.‏ وَقَالَ أَبَانُ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ عَنْ أَبِيهِ أَخْبَرَتْنِي عَائِشَةُ مِنْ قَوْمٍ كَذَّبُوا نَبِيَّكَ وَأَخْرَجُوهُ مِنْ قُرَيْشٍ‏.‏
Narrated Aisha:Sa`d said, "O Allah! You know that there is none against whom I am eager to fight more willingly for Your Cause than those people who disbelieved Your Apostle and drove him out (of his city). O Allah! I think that You have ended the fight between us and them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।