حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا يُونُسُ، حَدَّثَنَا شَيْبَانُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ،. وَقَالَ لِي خَلِيفَةُ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّهُ حَدَّثَهُمْ أَنَّ أَهْلَ مَكَّةَ سَأَلُوا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يُرِيَهُمْ آيَةً، فَأَرَاهُمُ انْشِقَاقَ الْقَمَرِ.
Narrated Anas:That the Meccan people requested Allah's Messenger (ﷺ) to show them a miracle, and so he showed them the splitting of the moon
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।