حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ الْفَضْلِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ أَبِي مَعْمَرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ انْشَقَّ الْقَمَرُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم شِقَّتَيْنِ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " اشْهَدُوا ".
Narrated `Abdullah bin Masud:During the lifetime of the Prophet (ﷺ) the moon was split into two parts and on that the Prophet (ﷺ) said, "Bear witness (to this)
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।