حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، عَنْ مِسْعَرٍ، قَالَ سَمِعْتُ شَيْخًا، فِي الْمَسْجِدِ يَقُولُ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ كَانَ فِي كَلاَمِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم تَرْتِيلٌ أَوْ تَرْسِيلٌ .
Narrated Jabir ibn Abdullah: The Messenger of Allah (ﷺ) spoke in a distinct and leisurely manner
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।