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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4839

नंबर 4839किताब 43, नंबर 67
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ، وَأَبُو بَكْرٍ ابْنَا أَبِي شَيْبَةَ قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أُسَامَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، رَحِمَهَا اللَّهُ قَالَتْ كَانَ كَلاَمُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَلاَمًا فَصْلاً يَفْهَمُهُ كُلُّ مَنْ سَمِعَهُ ‏.‏
Narrated Aisha, Ummul Mu'minin: The Messenger of Allah (ﷺ) spoke in a distinct manner so that anyone who listened to him could understand it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · General Behavior (Kitab Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।