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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4491

नंबर 4491किताब 40, नंबर 141
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ بُكَيْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الأَشَجِّ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يُجْلَدُ فَوْقَ عَشْرِ جَلَدَاتٍ إِلاَّ فِي حَدٍّ مِنْ حُدُودِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ ‏"‏ ‏.‏
Abu Burdah reported the Messenger of Allah (ﷺ) as saying:No more than ten lashes are to be given, except in the case of one of the punishment prescribed by Allah, the Exalted
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih Bukhari (6848) Sahih Muslim (1708)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 40 · Prescribed Punishments (Kitab Al-Hudud)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।