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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4005

नंबर 4005किताब 32, नंबर 37
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ شَقِيقٍ، قَالَ قِيلَ لِعَبْدِ اللَّهِ إِنَّ أُنَاسًا يَقْرَءُونَ هَذِهِ الآيَةَ ‏{‏ وَقَالَتْ هِيتَ لَكَ ‏}‏ فَقَالَ إِنِّي أَقْرَأُ كَمَا عُلِّمْتُ أَحَبُّ إِلَىَّ ‏{‏ وَقَالَتْ هَيْتَ لَكَ ‏}‏ ‏.‏
Narrated Shariq:'Abd Allah (b. Mas'ud) was told that the people had read this verse: "She said: Now come, thou" (hita laka). He said: I read it as I have been taught ; it is dearer to me. It goes "wa qalat haita laka" (She said: Now come thou)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · Dialects and Readings of the Qur'an (Kitab Al-Huruf Wa Al-Qira'at)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।