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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4006

नंबर 4006किताब 32, नंबर 38
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، قَالَ حَدَّثَنَا ح، وَحَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ الْمَهْرِيُّ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنَا هِشَامُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لِبَنِي إِسْرَائِيلَ ‏{‏ ادْخُلُوا الْبَابَ سُجَّدًا وَقُولُوا حِطَّةٌ تُغْفَرْ لَكُمْ خَطَايَاكُمْ ‏}‏ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Abu Sa’id Al Khudri :The Messenger of Allah (ﷺ) said: Allah, the Exalted, said to the children of Israel : "... but enter the gate with humility, in posture and in words, and you will be forgiven your faults (tughfar lakum)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · Dialects and Readings of the Qur'an (Kitab Al-Huruf Wa Al-Qira'at)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।