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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3589

नंबर 3589किताब 25, नंबर 19
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي بَكْرَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّهُ كَتَبَ إِلَى ابْنِهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ يَقْضِي الْحَكَمُ بَيْنَ اثْنَيْنِ وَهُوَ غَضْبَانُ ‏"‏ ‏.‏
Abd al-Rahman bin Abi Bakrah reported on the authority of his father that he wrote to his son:The Messenger of Allah (ﷺ) said: A judge should not decide between the two while he is in anger
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (7158) Sahih Muslim (1717)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Office of the Judge (Kitab Al-Aqdiyah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।