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सुनन अबू दाऊद

नंबर 449

नंबर 449किताब 2, नंबर 59
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْخُزَاعِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَنَسٍ، وَقَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى يَتَبَاهَى النَّاسُ فِي الْمَسَاجِدِ ‏"‏ ‏.‏
अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक कि लोग मस्जिदों के बारे में गर्व न करने लगें।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।