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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2529

नंबर 2529किताब 15, नंबर 53
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ، عَنْ أَبِي الْعَبَّاسِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ ‏:‏ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏:‏ يَا رَسُولَ اللَّهِ أُجَاهِدُ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ أَلَكَ أَبَوَانِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ نَعَمْ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ فَفِيهِمَا فَجَاهِدْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ ‏:‏ أَبُو الْعَبَّاسِ هَذَا الشَّاعِرُ اسْمُهُ السَّائِبُ بْنُ فَرُّوخَ ‏.‏
‘Abd Allah bin ‘Amr said “A man came to the Prophet(ﷺ) and said “Apostle of Allaah(ﷺ), May I take part in jihad?” He asked “Do you have parents?” He replied “Yes”. So, strive for them.” Abu Dawud said:The name of the narrator Abu al-'Abbas, a poet, is al-Sa'ib b. Farrukh
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih Bukhari (3004) Sahih Muslim (2549)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।