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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2528

नंबर 2528किताब 15, नंबर 52
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنَا عَطَاءُ بْنُ السَّائِبِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ ‏:‏ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏:‏ جِئْتُ أُبَايِعُكَ عَلَى الْهِجْرَةِ وَتَرَكْتُ أَبَوَىَّ يَبْكِيَانِ ‏.‏ فَقَالَ ‏:‏ ‏ "‏ ارْجِعْ عَلَيْهِمَا فَأَضْحِكْهُمَا كَمَا أَبْكَيْتَهُمَا ‏"‏ ‏.‏
Narrated Abdullah ibn Amr ibn al-'As: A man came to the Messenger of Allah (ﷺ) and said: I came to you to take the oath of allegiance to you on emigration, and I left my parents weeping. He (the Prophet) said: Return to them and make them laugh as you made them weep
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।