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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2530

नंबर 2530किताब 15, नंबर 54
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ، أَنَّ دَرَّاجًا أَبَا السَّمْحِ، حَدَّثَهُ عَنْ أَبِي الْهَيْثَمِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، ‏:‏ أَنَّ رَجُلاً، هَاجَرَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنَ الْيَمَنِ، فَقَالَ ‏:‏ ‏"‏ هَلْ لَكَ أَحَدٌ بِالْيَمَنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ أَبَوَاىَ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ أَذِنَا لَكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ ارْجِعْ إِلَيْهِمَا فَاسْتَأْذِنْهُمَا، فَإِنْ أَذِنَا لَكَ فَجَاهِدْ، وَإِلاَّ فَبِرَّهُمَا ‏"‏ ‏.‏
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अंहु) से रिवायत है कि एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास यमन से हिजरत करके आया। आपने उससे पूछाः "क्या यमन में तेरा कोई है?" उसने कहाः मेरे माता-पिता हैं। आपने कहाः दोनों ने तुझे अनुमति दी है? उसने कहाः नहीं। आपने फ़रमायाः "उनके पास वापस जाओ और उनसे अनुमति माँगो। यदि दोनों अनुमति दे दें, तो जिहाद में शामिल हो, वरना उनकी बात मानो तथा उनकी सेवा करो।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।