An-Nisaa 4:129
النساءوَلَن تَسْتَطِيعُوٓا۟ أَن تَعْدِلُوا۟ بَيْنَ ٱلنِّسَآءِ وَلَوْ حَرَصْتُمْ ۖ فَلَا تَمِيلُوا۟ كُلَّ ٱلْمَيْلِ فَتَذَرُوهَا كَٱلْمُعَلَّقَةِ ۚ وَإِن تُصْلِحُوا۟ وَتَتَّقُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ كَانَ غَفُورًا رَّحِيمًا
और तुम पत्नियों के बीच पूर्ण न्याय कदापि नहीं कर[84] सकते, चाहे तुम इसके कितने ही इच्छुक हो। अतः (अवांछित पत्नी से) पूरी तरह विमुख[85] न हो जाओ कि उसे अधर में लटकी हुई छोड़ दो। और यदि तुम आपस में सामंजस्य[86] बना लो और (अल्लाह से) डरते रहो, तो निःसंदेह अल्लाह क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान है।
[84] क्योंकि यह स्वभाविक है कि मन का आकर्षण किसी एक की ओर होगा।
[85] अर्थात जिसमें उसके पति की रूचि न हो, और न व्यवहारिक रूप से बिना पति के हो।
[86] अर्थात सब के साथ व्यवहार तथा सहवास संबंध में बराबरी करो।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
- ऐ पतियो - तुम चाहते हुए भी, दिली लगाव के मामले में पत्नियों के साथ पूरी तरह से न्याय नहीं कर सकते। इसके कुछ कारण हैं, जो तुम्हारे नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। इसलिए उस पत्नी से पूरी तरह विमुख न हो जाओ, जो तुम्हें पसंद नहीं है। फिर तुम उसे अधर में लटकी हुई की तरह छोड़ दो; न तो उसका कोई पति है, जो उसका हक़ अदा करे, और न वह बिना पति वाली है कि शादी की अपेक्षा करे। यदि तुम अपने बीच के मामलों को सुधार लो इस प्रकार कि दिल के न चाहते हुए भी अपने आपको पत्नी के अधिकारों का निर्वाहन करने के लिए बाध्य कर लो और पत्नी के मामले में अल्लाह से डरते रहो, तो अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला और तुम पर दयावान है।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net