An-Nisaa 4:128
النساءوَإِنِ ٱمْرَأَةٌ خَافَتْ مِنۢ بَعْلِهَا نُشُوزًا أَوْ إِعْرَاضًا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَآ أَن يُصْلِحَا بَيْنَهُمَا صُلْحًا ۚ وَٱلصُّلْحُ خَيْرٌ ۗ وَأُحْضِرَتِ ٱلْأَنفُسُ ٱلشُّحَّ ۚ وَإِن تُحْسِنُوا۟ وَتَتَّقُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًا
और यदि किसी स्त्री को अपने पति की ओर से ज़्यादती या बेरुखी का डर हो, तो उन दोनों पर कोई दोष नहीं कि आपस में समझौता कर लें और समझौता कर लेना ही बेहतर[83] है। तथा लोभ एवं कंजूसी तो मानव स्वभाव में शामिल है। परंतु यदि तुम एक-दूसरे के साथ उपकार करो और (अल्लाह से) डरते रहो, तो निःसंदेह अल्लाह तुम्हारे कर्मों से सूचित है।
[83] अर्थ यह है कि स्त्री, पुरुष की इच्छा और रूचि पर ध्यान दे, तो यह संधि की रीति अलगाव से अच्छी है।
मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari. Translated by Azizul Haq Al-Omari वर्शन 1.1.5, 2025-08-05। QuranEnc.com
यदि किसी स्त्री को अपने पति से इस बात का भय हो कि वह उसकी उपेक्षा कर रहा है और उसमें रुचि नहीं ले रहा है, तो उन दोनों पर आपस में समझौता कर लेने में कोई गुनाह नहीं है, इस प्रकार कि वह पति पर अपने कुछ अनिवार्य अधिकारों जैसे- भरण-पोषण एवं रात गुज़ारने की बारी के अधिकार, को छोड़ दे। यहाँ सुलह करना उन दोनों के लिए तलाक़ से बेहतर है। हालाँकि लोभ और कंजूसी मानव स्वभाव में शामिल हैं। इसलिए वह अपने अधिकारों को छोड़ना नहीं चाहती है। ऐसे में पति-पत्नी को इस स्वभाव का उपचार, स्वयं का उदारहृदयता और परोपकार पर प्रशिक्षण करके करना चाहिए। यदि तुम अपने सभी मामलों में उपकार का रास्ता अपनाओ और अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों का परित्याग करके, डरते रहो, तो अल्लाह तुम्हारे कर्मों से अवगत है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
यह संस्करण हर आयत की तशरीह करता है; यह उसका तर्जुमा नहीं है। मतलब: Hindi Translation of Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Quran. Issued by Tafsir Center for Quranic Studies वर्शन 1.0.0, 2024-02-20। QuranEnc.com
अरबी Tanzil का टेक्स्ट है, बिना किसी बदलाव के। मतलब अपने पब्लिशरों के एडिशन हैं, बिना किसी बदलाव के; सबील के अपने जाँच करने वालों ने अभी तक इन्हें नहीं जाँचा है। अरबी: Tanzil उस्मानी टेक्स्ट, वर्शन 1.1। स्रोत: tanzil.net