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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 920

नंबर 920किताब 9, नंबर 113
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، وَعَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَخَّرَ طَوَافَ الزِّيَارَةِ إِلَى اللَّيْلِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَقَدْ رَخَّصَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ فِي أَنْ يُؤَخَّرَ طَوَافُ الزِّيَارَةِ إِلَى اللَّيْلِ وَاسْتَحَبَّ بَعْضُهُمْ أَنْ يَزُورَ يَوْمَ النَّحْرِ وَوَسَّعَ بَعْضُهُمْ أَنْ يُؤَخَّرَ وَلَوْ إِلَى آخِرِ أَيَّامِ مِنًى ‏.‏
Aishah narrated:"The Prophet delayed the visiting Tawaf until the night
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।