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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 881

नंबर 881किताब 9, नंबर 74
حَدَّثَنَا يُوسُفُ بْنُ عِيسَى، وَمُحَمَّدُ بْنُ أَبَانَ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مُهَاجِرٍ، عَنْ يُوسُفَ بْنِ مَاهَكَ، عَنْ أُمِّهِ، مُسَيْكَةَ عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلاَ نَبْنِي لَكَ بَيْتًا يُظِلُّكَ بِمِنًى قَالَ ‏ "‏ لاَ مِنًى مُنَاخُ مَنْ سَبَقَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏
Aishah said:"We said: 'O Messenger of Allah! Shall we build a structure to shade you at Mina? He said: 'No., Mina is a resting place for whoever arrives
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।