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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 880

नंबर 880किताब 9, नंबर 73
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الأَجْلَحِ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ مِقْسَمٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم صَلَّى بِمِنًى الظُّهْرَ وَالْفَجْرَ ثُمَّ غَدَا إِلَى عَرَفَاتٍ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ وَأَنَسٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ مِقْسَمٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ عَلِيُّ بْنُ الْمَدِينِيِّ قَالَ يَحْيَى قَالَ شُعْبَةُ لَمْ يَسْمَعِ الْحَكَمُ مِنْ مِقْسَمٍ إِلاَّ خَمْسَةَ أَشْيَاءَ ‏.‏ وَعَدَّهَا وَلَيْسَ هَذَا الْحَدِيثُ فِيمَا عَدَّ شُعْبَةُ ‏.‏
Al-Hakam reported from Miqsam, that Ibn Abbas narrated:That the Prophet prayed Zuhr and Fajr in Mina, then he left in the morning to Arafat
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।