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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 873

नंबर 873किताब 9, नंबर 66
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ عَبْدِ الْمَلِكِ، عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ خَرَجَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم مِنْ عِنْدِي وَهُوَ قَرِيرُ الْعَيْنِ طَيِّبُ النَّفْسِ فَرَجَعَ إِلَىَّ وَهُوَ حَزِينٌ فَقُلْتُ لَهُ فَقَالَ ‏ "‏ إِنِّي دَخَلْتُ الْكَعْبَةَ وَوَدِدْتُ أَنِّي لَمْ أَكُنْ فَعَلْتُ إِنِّي أَخَافُ أَنْ أَكُونَ أَتْعَبْتُ أُمَّتِي مِنْ بَعْدِي ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Aishah narrated:"The Prophet left me while he had a joyous look of contentment and he returned to me grieving. So I asked him about that and he said: 'I entered the Ka'bah, and I wished that I had not done it. I fear that my Ummah will follow me (in that) after me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।