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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 853

नंबर 853किताब 9, नंबर 46
حَدَّثَنَا أَبُو مُوسَى، مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ لَمَّا جَاءَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِلَى مَكَّةَ دَخَلَ مِنْ أَعْلاَهَا وَخَرَجَ مِنْ أَسْفَلِهَا ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ ‏.‏ قَاَلَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Aishah narrated:"When Prophet came to Makkah he entered it from its higher side, and left from its lower side
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।