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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 839

नंबर 839किताब 9, नंबर 32
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ طَاوُسٍ، وَعَطَاءٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم احْتَجَمَ وَهُوَ مُحْرِمٌ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَنَسٍ وَعَبْدِ اللَّهِ ابْنِ بُحَيْنَةَ وَجَابِرٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَقَدْ رَخَّصَ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ فِي الْحِجَامَةِ لِلْمُحْرِمِ وَقَالُوا لاَ يَحْلِقُ شَعَرًا ‏.‏ وَقَالَ مَالِكٌ لاَ يَحْتَجِمُ الْمُحْرِمُ إِلاَّ مِنْ ضَرُورَةٍ ‏.‏ وَقَالَ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَالشَّافِعِيُّ لاَ بَأْسَ أَنْ يَحْتَجِمَ الْمُحْرِمُ وَلاَ يَنْزِعُ شَعَرًا ‏.‏
Ibn Abbas narrated:"The Messenger of Allah was cupped while he was a Muhrim
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · The Book on Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।