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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 678

नंबर 678किताब 7, नंबर 62
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَخْبَرَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ زَكَرِيَّا، عَنِ الْحَجَّاجِ بْنِ دِينَارٍ، عَنِ الْحَكَمِ بْنِ عُتَيْبَةَ، عَنْ حُجَيَّةَ بْنِ عَدِيٍّ، عَنْ عَلِيٍّ، أَنَّ الْعَبَّاسَ، سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ تَعْجِيلِ صَدَقَتِهِ قَبْلَ أَنْ تَحِلَّ فَرَخَّصَ لَهُ فِي ذَلِكَ ‏.‏
Ali narrated:"Al-Abbas asked the Messenger of Allah about paying his charity (Zakat) in advance before its time is due (by being in possession for a whole year), he permitted him to do that
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।