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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 660

नंबर 660किताब 7, नंबर 44
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الطُّفَيْلِ، عَنْ شَرِيكٍ، عَنْ أَبِي حَمْزَةَ، عَنْ عَامِرٍ الشَّعْبِيِّ، عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ قَيْسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ فِي الْمَالِ حَقًّا سِوَى الزَّكَاةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ إِسْنَادُهُ لَيْسَ بِذَاكَ ‏.‏ وَأَبُو حَمْزَةَ مَيْمُونٌ الأَعْوَرُ يُضَعَّفُ ‏.‏ وَرَوَى بَيَانٌ وَإِسْمَاعِيلُ بْنُ سَالِمٍ عَنِ الشَّعْبِيِّ هَذَا الْحَدِيثَ قَوْلَهُ وَهَذَا أَصَحُّ ‏.‏
Fatimah bint Qais narrated that :the Prophet said: "Indeed there is a duty on wealth aside from Zakat
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।