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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 659

नंबर 659किताब 7, नंबर 43
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ مَدُّويَهْ، حَدَّثَنَا الأَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ، عَنْ شَرِيكٍ، عَنْ أَبِي حَمْزَةَ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ قَيْسٍ، قَالَتْ سَأَلْتُ أَوْ سُئِلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَنِ الزَّكَاةِ فَقَالَ ‏"‏ إِنَّ فِي الْمَالِ لَحَقًّا سِوَى الزَّكَاةِ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ تَلاَ هَذِهِ الآيَةَ الَّتِي فِي الْبَقَرَةِ ‏(‏ لَيْسَ الْبِرَّ أَنْ تُوَلُّوا وُجُوهَكُمْ ‏)‏ الآيَةَ ‏.‏
Fatimah bint Qais narrated that :she asked -or, the Prophet was asked - about Zakat, and he said: "Indeed there is a duty on wealthy aside from Zakat." Then he recited this Ayah which is in Al-Baqarah: 'It is not Al-Birr (piety, righteousness) that you turn your faces.' (Al-Baqarah 2:)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।