सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 649

नंबर 649किताब 7, नंबर 33
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ سَعِيدٍ الْكِنْدِيُّ الْكُوفِيُّ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنْ أَشْعَثَ، عَنْ عَوْنِ بْنِ أَبِي جُحَيْفَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَدِمَ عَلَيْنَا مُصَدِّقُ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَأَخَذَ الصَّدَقَةَ مِنْ أَغْنِيَائِنَا فَجَعَلَهَا فِي فُقَرَائِنَا وَكُنْتُ غُلاَمًا يَتِيمًا فَأَعْطَانِي مِنْهَا قَلُوصًا ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي جُحَيْفَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏
Awn bin Abi Jubaitah narrated from his father:"The charity collector of the Prophet came to us. So he took the charity from our rich to our poor. I was a orphan boy, so he came to me and gave me a young she-camel from it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।