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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 648

नंबर 648किताब 7, नंबर 32
حَدَّثَنَا أَبُو عَمَّارٍ الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ دَاوُدَ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ جَرِيرٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِنَحْوِهِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ دَاوُدَ عَنِ الشَّعْبِيِّ، أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ مُجَالِدٍ ‏.‏ وَقَدْ ضَعَّفَ مُجَالِدًا بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ وَهُوَ كَثِيرُ الْغَلَطِ ‏.‏
Jarir narrated :similar (narration to no. 647 with a different chain) from the Prophet
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book on Zakat

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।