सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 573

नंबर 573किताब 6, नंबर 30
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَيُّوبَ بْنِ مُوسَى، عَنْ عَطَاءِ بْنِ مِينَاءَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ سَجَدْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي ‏(‏اقْرَأْ بِاسْمِ رَبِّكَ الَّذِي خَلَقَ ‏)‏ وَ ‏(‏إِذََا السَّمَاءُ انْشَقَّتْ ‏)‏
Abu Hurairah narrated:"We prostrated with the Messenger of Allah in: 'Read! In the Name of your Lord' and 'When the heaven is split asunder
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book on Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।